पिछली हार का असर? उमरेठ उपचुनाव से AAP ने बनाई दूरी, नामांकन न भरने की असल वजह बताई

गुजरात की उमरेठ विधानसभा पर होने वाले उपचुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने नामांकन नहीं भरा है. बीजेपी ने दिवंगत विधायक के बेटे हर्षद परमार को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, कांग्रेस ने भी इस क्षेत्र में मजबूत उम्मीदवार भृगुराज सिंह चौहान को मैदान में उतारा है.

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इसुदान गढ़वी ने नामांकन न भरने की वजह बताई. (Photo: ITG) इसुदान गढ़वी ने नामांकन न भरने की वजह बताई. (Photo: ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

गुजरात में बीजेपी विधायक के निधन से खाली हुई सीट उमरेठ का उपचुनाव 23 अप्रैल को है जिसके लिए नामांकन का कल आखिरी दिन था. नामांकन के दिन खत्म होने के बावजूद आम आदमी पार्टी की और से किसी ने नामांकन नहीं किया. इसे लेकर आप ने प्रतिक्रिया दी है और नामांकन न भरने की वजह भी बताई है.

गुजरात में बीजेपी के सामने मुख्य विपक्ष होने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी ने उपचुनाव से किनारा कर लिया है. इसे लेकर आप के अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा, 'हम चुनाव सिर्फ लड़ने के लिए नहीं लड़ते. आम आदमी पार्टी साल 2027 के चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.'

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गढ़वी ने आगे कहा, 'हमने उमरेठ का उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, क्योंकि हमारा पूरा ध्यान स्थानीय निकाय चुनाव पर है.' वहीं, बीजेपी और कांग्रेस के आरोपों पर उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि आप किसी की बी टीम नहीं है, कांग्रेस में दम है तो बीजेपी के सामने लड़कर हराए, कांग्रेस के पास मौका है, वो उमरेठ में बीजेपी को हराकर दिखाए. 

उपचुनाव में जीत के लिए बीजेपी आश्वस्त है इसलिए उन्होंने दिवंगत विधायक के बेटे हर्षद परमार को ही चुनावी मैदान में उतारा है. बीजेपी प्रवक्ता अनिल पटेल का कहना है कि उमरेठ के चुनाव में पिछली बार बीजेपी को जो जन सर्मथन मिला था वो इस बार भी मिलेगा.

बीजेपी को जीत का पूरा भरोसा

उन्होंने कहा, 'हमें जीत का पूरा विश्वास है क्योंकि पूर्व विधायक भी जनता के बीच रहे थे और उनके बेटे भी सालों से जनता के बीच ही है. पहले वो 10 सालों तक सरपंच रहे और फिर अपने पिता की बीमारी की वजह से उनका पूरा कामकाज वहीं देखते थे. इसकी वजह से वो जनता के लिए नया चेहरा नहीं है.'

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आम आदमी पार्टी के चुनाव न लड़ने पर बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि पिछली बार आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को सिर्फ 2 प्रतिशत मत मिले थे और उनका यहां कोई वजूद नहीं है. आप इस बार नहीं लड़ रही उसका कारण वही है क्योंकि पिछली बार आम आदमी पार्टी की डिपोजिट जब्त हुई थी. इसलिए वो इस बार चुनाव मैदान में नहीं है.

कांग्रेस ने लगाया जोर

कांग्रेस ने इस उपचुनाव में स्थानीय नेता भृगुराज सिंह चौहान को टिकट दिया है. जो पिछले 15 से ज्यादा सालों के पंचायत में मजबूत नेतृत्व करते रहे है. उनके नामांकन के दौरान प्रदेश कांग्रेस ने पूरा जोर लगाकर शक्ति प्रदर्शन किया था. वैसे भी ये इलाका कांग्रेस के एक समय के मजबूत गढ़ माने जाने वाले आणंद जिले में आता है. 

साल 2007 में कांग्रेस का विधायक इस सीट पर था उसके बाद साल 2012 में कांग्रेस ने एनसीपी के साथ गठबंधन किया था और इस सीट पर एनसीपी की जीत हुई थी. साल 2017 से इस सीट पर बीजेपी का दबदबा है. इस बार उपचुनाव में कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगाई है.

कांग्रेस प्रवक्ता हेमांग रावल ने आप पर वार करते हुए कहा कि बीजेपी को कोई टक्कर दे सकता है तो वो कांग्रेस ही है, 'आप को साल 2022 के चुनाव में भी उस सीट पर ज्यादा मत नहीं मिले थे और डिपोजिट जब्त हुई थी.' 

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रावल ने आप को लेकर आगे कहा, 'इस बार उन्होंने उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा वो साफ दिखाता है कि आप कहीं पर नहीं है. स्थानीय निकाय चुनाव हो या उमरेठ का उपचुनाव, बीजेपी के साथ सीधी लड़ाई में कांग्रेस ही है. आम आदमी पार्टी कहीं पर नहीं है. चुनाव नतीजों में भी वो साफ दिखाई देगा.'

उमरेठ उपचुनाव से क्यों भागी आप?

एक वरिष्ठ पत्रकार की मानें तो इस उपचुनाव के नतीजों से ज्यादा कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला. क्योंकि विधायक के निधन से सीट खाली हुई थी, वहां पर उनके बेटे को ही बीजेपी ने टिकट दिया है जिससे सहानुभूति उनके बेटे के पास रहेगी. आम आदमी पार्टी वैसै भी मध्य गुजरात के इन इलाकों में ज्यादा मजबूत नहीं है और अपनी जगह नहीं बना पाई. 

ऐसे में उपचुनाव के बदले वो अपने सीमित संसाधनों का इस्तेमाल स्थानीय निकाय चुनाव में करना चाहती है ताकि वहां पर कुछ परिणाम लाकर अपनी तरफ माहौल बना सके. 

साल 2022 के सामान्य चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 4 हजार से कम वोट मिले थे, जो कुछ मतदान के 2.12 प्रतिशत था. ऐसे में इस उपचुनाव में वहां पर उनकी हालत और खराब हो सकती थी. 

उमरेठ विधानसभा के पिछले तीन चुनाव के नतीजे

साल 2012 में कांग्रेस के साथ गठबंधन से एनसीपी के जयंत पटेल (बोस्की) ने बीजेपी के गोविंद परमार को 1,394 मतों से हराया था. साल 2017 बीजेपी के गोविंद परमार ने कांग्रेस की कपिला चावड़ा को 1,883 वोटों से शिकस्त दी थी. वहीं, एनसीपी से लडे जयंत पटेल (बोस्की) को 35,501 मत मिले थे. 2022 में बीजेपी के गोविंद परमार ने कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के जयंत पटेल (बोस्की) को 26717 मतों से मात दे दी थी.

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