30 साल का लिव-इन रिलेशन और एक बेटा भी... 60 साल की पार्टनर अपने साथी के लिए पहुंची HC; जानें क्या है पूरा मामला?

अहमदाबाद में 30 साल पुराने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस याचिका. 60 वर्षीय महिला का आरोप- पार्टनर की बहन ने भाई को किया कैद. बहन ने लगाया संपत्ति हड़पने का आरोप...

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अहमदाबाद की 60 वर्षीय महिला पहुंची कोर्ट.(Representative Image) अहमदाबाद की 60 वर्षीय महिला पहुंची कोर्ट.(Representative Image)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 09 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

गुजरात हाई कोर्ट में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने रिश्तों की परिभाषा और कानूनी पेचीदगियों को एक नए धरातल पर ला खड़ा किया है. 1996 से साथ रह रहे एक बुजुर्ग जोड़े के बीच जब पुरुष की बहन 'दीवार' बनकर खड़ी हुई, तो 60 वर्षीय महिला पार्टनर को अपने साथी को पाने के लिए हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करनी पड़ी. 

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याचिकाकर्ता महिला और संबंधित बुजुर्ग व्यक्ति पिछले 30 वर्षों से बिना शादी किए अहमदाबाद में साथ रह रहे थे. इस लंबे रिश्ते से उनका एक बेटा भी है. विवाद तब शुरू हुआ जब फरवरी 2026 में पुरुष की बहन ने उन्हें बीमार बताकर गांधीनगर स्थित अपने घर बुलाया.

नशे की दवा देने का आरोप
महिला का दावा है कि तब से उनका अपने पार्टनर से संपर्क टूट गया है. आरोप है कि बहन उन्हें नशे की दवाइयां देकर बंधक बनाए हुए है और अहमदाबाद में चल रहे उनके जरूरी इलाज में भी बाधा डाल रही है.

पुलिस में सुनवाई नहीं
महिला ने स्थानीय पुलिस और पुलिस आयुक्त से मदद मांगी, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर अंततः हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

कोर्ट रूम में ड्रामा 
हाई कोर्ट के आदेश पर जब बुजुर्ग व्यक्ति को अदालत में पेश किया गया, तो वे शारीरिक रूप से काफी कमजोर और अस्वस्थ नजर आ रहे थे. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अदालत से कहा कि वे अपनी महिला साथी के साथ ही रहना चाहते हैं. 

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वहीं, दूसरी ओर पुरुष की बहन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक नया मोड़ दे दिया. बहन की दलील है कि महिला की नजर उनके भाई की पारिवारिक संपत्ति पर है. वे केवल अपने भाई की देखभाल कर रही हैं और महिला के दावे झूठे हैं.

जून में होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और पुरुष की इच्छा को ध्यान में रखा है. हालांकि, बहन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई जून 2026 में तय की है.

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