गुजरात में ₹226 करोड़ के क्रिप्टो नेटवर्क का भंडाफोड़, ड्रग्स और टेरर फंडिंग से हैं जुड़े तार

गुजरात में 226 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्रिप्टो नेटवर्क का खुलासा हुआ है. इस मामले में ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग से संबंध पाए गए हैं.

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गुजरात में क्रिप्टो फ्रॉड (Photo: ITG) गुजरात में क्रिप्टो फ्रॉड (Photo: ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:36 AM IST

गुजरात साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने अहमदाबाद से एक बहुत बड़े क्रिप्टोकरेंसी-आधारित नेटवर्क का पता लगाया है, जिसका कथित तौर पर ड्रग्स की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग से संबंध है. इस ऑपरेशन के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों से जुड़े क्रिप्टो वॉलेट के जरिए करीब 226.54 करोड़ रुपये के लेन-देन का पता लगाया गया.

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अधिकारियों के मुताबिक, इस जांच से एक ऐसे बेहद पेचीदा नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो अहमदाबाद, मुंबई और करनाल जैसे भारत के कई शहरों में एक्टिव था. 

इस नेटवर्क के कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों, डार्क वेब पर चलने वाले ड्रग्स बाजारों और टेरर फाइनेंसिंग के आरोपी संगठनों से संबंध थे.

जांच में क्या मिला?

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांचकर्ताओं ने ARTEMISLAB.CC से शुरू हुए कुछ संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया. यह डार्क वेब पर चलने वाला एक कथित अवैध ऑनलाइन ड्रग्स बेचने वाला प्लेटफॉर्म है. बताया गया है कि इन लेन-देन के जरिए जांच अधिकारी उन क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंचे, जो अहमदाबाद के रहने वाले मोहसिन सादिक मोलानी और उनसे जुड़े कई अन्य भारतीय यूजर्स से जुड़े थे.

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने पैसों के लेन-देन को छिपाने के लिए 'मोनेरो' (Monero) नाम की एक प्राइवेसी-फोकस्ड क्रिप्टोकरेंसी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया. जांच के दौरान कथित तौर पर मोनेरो के जरिए करीब 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर (193 करोड़ रुपये) के लेन-देन की पहचान की गई. अधिकारियों ने बताया कि मोनेरो का इस्तेमाल डार्क वेब पर बहुत ज्यादा होता है, क्योंकि इसमें यूजर की पहचान सीक्रेट रखने की सुविधा होती है. अवैध व्यापार और टेरर फाइनेंसिंग से जुड़ी जांचों में इसका नाम अक्सर सामने आता रहा है.

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जांच में आगे पता चला है कि आरोपियों में से एक, मोहम्मद जुबैर मोहम्मद हुसैन पोपटिया, कथित तौर पर एक क्रिप्टो वॉलेट चला रहा था, जिसे 2025 में इजरायल के नेशनल ब्यूरो फॉर काउंटर टेरर फाइनेंसिंग (NBCTF) ने फ्रीज कर दिया था. जांचकर्ताओं ने दावा किया कि इस वॉलेट के तार उन संस्थाओं से जुड़े थे, जिनका कथित तौर पर हमास और दुबई स्थित क्रिप्टो एक्सचेंजों से संबंध था.

अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इस नेटवर्क से होने वाले ट्रांजैक्शन उन क्रिप्टो वॉलेट से जुड़े थे, जिन पर US ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने प्रतिबंध लगाया था. इनमें यमन के अंसार अल्लाह (हूती), ईरान के IRGC-QF और प्रतिबंधित रूसी क्रिप्टो एक्सचेंज Garantex से कथित तौर पर जुड़ी संस्थाएं शामिल थीं.

यह भी पढ़ें: क्रिप्टो की सुरक्षा है जरूरी, Binance के ये 8 तरीके अपनाएं और हैकर्स से अपना अकाउंट बचाएं!

जांचकर्ताओं के मुताबिक, मोहसिन मोलानी कथित तौर पर टेलीग्राम ग्रुप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए यूनाइटेड किंगडम में ग्राहकों के लिए ड्रग्स के ऑर्डर लेता था. इसके बाद, ये ऑर्डर कथित तौर पर मोहम्मद जुबैर पोपटिया को भेजे जाते थे, जो कथित तौर पर दुबई से इस सप्लाई चेन को चलाता था.

एक अन्य आरोपी, इसम सलमान गुलाम अली अंसारी, फिलहाल UK की जेल में बंद है. उसे 2024 में ड्रग्स की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में सजा सुनाई गई थी. जांचकर्ताओं को शक है कि जेल में बंद होने के बावजूद भी यह नेटवर्क अपना काम करता रहा.

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पुलिस ने बताया कि हवाला चैनलों और USDT में बदले गए 'डर्टी क्रिप्टो' का इस्तेमाल कथित तौर पर सीमाओं के पार पैसे भेजने और आपराधिक गतिविधियों को फंड करने के लिए किया गया था.

अधिकारियों ने अब तक भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कई मामले दर्ज किए हैं, जिनमें संगठित अपराध, टेरर फाइनेंसिंग, साजिश और साइबर धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं.

अधिकारियों ने यह भी बताया कि NCCRP पोर्टल पर पहले Binance P2P से जुड़े बैंक अकाउंट्स के खिलाफ 935 शिकायतें दर्ज की गई थीं, जिनका कथित तौर पर आरोपियों से संबंध था. इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की आगे की जांच जारी है.

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