बेटियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी, लिव-इन का रजिस्ट्रेशन..., गुजरात असेंबली में UCC बिल पेश

गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पेश हो गया है. सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे जल्दबाजी और चुनावी रणनीति करार दे रहा है.

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 गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया. (File Photo: PTI) गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया. (File Photo: PTI)

ब्रिजेश दोशी

  • गांधीनगर,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पेश किया. बिल पेश करते हुए उन्होंने इसे गुजरात विधानसभा के इतिहास का ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि यह समानता, न्याय और एकता के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करेगा.

उन्होंने नरेंद्र मोदी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने कई बड़े फैसले लिए हैं, जैसे अनुच्छेद 370 हटाना, तीन तलाक कानून और राम मंदिर निर्माण. उन्होंने कहा कि यूसीसी उसी दिशा में एक और बड़ा कदम है.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी नागरिकों के लिए समानता का प्रावधान है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में अब तक समान नागरिक संहिता लागू नहीं हो पाई. उन्होंने कहा कि यह बिल सभी नागरिकों के लिए समान नियम सुनिश्चित करेगा.

गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल की प्रमुख बातें

  1. शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति के लिए एक समान कानून
  2. शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
  3. जबरन शादी और बहुविवाह पर 7 साल तक की सजा
  4. कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य, उल्लंघन पर 3 साल की सजा
  5. लिव-इन का रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने की सजा
  6. नाबालिग के साथ लिव-इन पर POCSO के तहत कार्रवाई
  7. बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्पष्ट किया कि यह कानून भेदभाव खत्म करने के लिए है, न कि किसी की संस्कृति या परंपरा को खत्म करने के लिए. उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों की परंपराओं, जैसे कजिन मैरिज, में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आदिवासी समुदायों को इस बिल से बाहर रखा गया है.

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कांग्रेस ने किया बिल का विरोध

वहीं, गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि इसे जल्दबाजी में लाया गया है और पहले इसे समिति के पास भेजा जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह बिल लाई है. उन्होंने कहा कि यूसीसी समिति की रिपोर्ट सदन में पेश नहीं की गई और विधायकों से इस पर चर्चा भी नहीं हुई. 

उनके मुताबिक, यह बिल राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है और इसमें कुछ समुदायों को बाहर रखने से समानता के सिद्धांत पर सवाल उठते हैं. कांग्रेस ने यह भी कहा कि पूरे देश के लिए समान कानून बनाने का अधिकार संसद का है, ऐसे में राज्य स्तर पर इस तरह के बिल लाना कई सवाल खड़े करता है. फिलहाल, यह बिल राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर व्यापक बहस की संभावना है.

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