बेटियों को पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी, लिव-इन का रजिस्ट्रेशन..., गुजरात असेंबली में पास हुआ UCC बिल

गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास हो गया है. सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे जल्दबाजी और चुनावी रणनीति करार दे रहा है.

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 गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया. (File Photo: PTI) गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया. (File Photo: PTI)

ब्रिजेश दोशी

  • गांधीनगर,
  • 24 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:56 PM IST

गुजरात विधानसभा में मंगलवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास हो गया. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बिल पेश करते हुए उन्होंने इसे गुजरात विधानसभा के इतिहास का ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि यह समानता, न्याय और एकता के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करेगा. सदन में करीब 7.5 घंटे तक चर्चा के बाद देर शाम वोटिंग हुई, जिसके बाद बिल बहुमत से पारित हुआ. उत्तराखंड के बाद  गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य है.

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बिल पर वोटिंग के दौरान कांग्रेस ने इसे सलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग के साथ सदन से वॉक आउट किया. बिल पेश करते हुए अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, 'आज का दिन गुजरात विधानसभा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा. यह बिल खास तौर पर गुजरात की बहन-बेटियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लाया गया है और इसमें सभी को मिलकर सहयोग करना चाहिए. विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने की दिशा में गुजरात ने समान नागरिक संहिता (UCC) के जरिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है.'

उन्होंने कहा, 'गुजरात यूसीसी बिल लाने वाला दूसरा राज्य बन गया है, जो गर्व की बात है. संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य सरकारों को ऐसे कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है. इस बिल को इस तरह तैयार किया गया है कि किसी भी समुदाय के साथ अन्याय न हो. यह कानून सबको न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं के सिद्धांत पर आधारित है. इसमें महिलाओं को समान भागीदारी देने का प्रावधान किया गया है, जिससे बेटियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी.'

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भपूेंद्र पटेल ने आश्वासन दिया कि इस बिल के जरिए किसी के अधिकार नहीं छीने जा रहे हैं और न ही किसी की स्वतंत्रता पर कोई रोक लगाई जा रही है. लिव-इन रिलेशनशिप के नियमन के लिए भी इसमें प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ समुदायों की परंपराओं, जैसे कजिन मैरिज, में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आदिवासी समुदायों को इस बिल से बाहर रखा गया है. समान नागरिक संहिता का उद्देश्य केवल भेदभाव दूर कर समानता स्थापित करना है. उन्होंने सभी सदस्यों से अपील है कि इस बिल को सर्वसम्मति से पारित किया जाए.

गुजरात के यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल की प्रमुख बातें

  1. शादी, तलाक और पैतृक संपत्ति के लिए एक समान कानून
  2. शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
  3. जबरन शादी और बहुविवाह पर 7 साल तक की सजा
  4. कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य, उल्लंघन पर 3 साल की सजा
  5. लिव-इन का रजिस्ट्रेशन न कराने पर 3 महीने की सजा
  6. नाबालिग के साथ लिव-इन पर POCSO के तहत कार्रवाई
  7. बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार

कांग्रेस ने किया बिल का विरोध

वहीं, गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि इसे जल्दबाजी में लाया गया है और पहले इसे समिति के पास भेजा जाना चाहिए था. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह बिल लाई है. उन्होंने कहा कि यूसीसी समिति की रिपोर्ट सदन में पेश नहीं की गई और विधायकों से इस पर चर्चा भी नहीं हुई. उनके मुताबिक, यह बिल राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है और इसमें कुछ समुदायों को बाहर रखने से समानता के सिद्धांत पर सवाल उठते हैं. कांग्रेस ने यह भी कहा कि पूरे देश के लिए समान कानून बनाने का अधिकार संसद का है, ऐसे में राज्य स्तर पर इस तरह के बिल लाना कई सवाल खड़े करता है.

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