इंदौर के बाद अब गांधीनगर में फैला दूषित पानी का कहर, टाइफाइड के बाद 100 से ज्यादा बच्चे एडमिट

इंदौर के बाद अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पानी की वजह से टाइफाइड के मामलों में तेज उछाल देखने को मिला है, जहां सिविल अस्पताल में 100 से अधिक बच्चों को भर्ती किया गया है. आदिवाड़ा गांव और सेक्टर 24, 26, 27 और 29 में सीवर के गंदे पानी के पीने की लाइन में मिलने से बीमारी फैली, जिससे लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है.

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प्रशासन ने पानी के सैंपल लेना, पाइपलाइन की मरम्मत और इलाज की व्यवस्था तेज कर दी है. (File Photo:PTI) प्रशासन ने पानी के सैंपल लेना, पाइपलाइन की मरम्मत और इलाज की व्यवस्था तेज कर दी है. (File Photo:PTI)

अतुल तिवारी

  • गांधीनगर,
  • 04 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:54 PM IST

इंदौर के बाद अब गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पानी की वजह से टाइफाइड के मामलों में अचानक तेज बढ़ोतरी से हड़कंप मच गया है. गांधीनगर सिविल अस्पताल में 100 से अधिक टाइफाइड पीड़ित बच्चों को भर्ती किया गया है. हालात को देखते हुए गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात सरकार और प्रशासन को युद्धस्तर पर हालात नियंत्रित करने के निर्देश दिए हैं.

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गांधीनगर के आदिवाड़ा गांव और सेक्टर 24, 26, 27 और 29 में बीते एक हफ्ते से दूषित पानी की शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन नगर निगम की ओर से समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए. इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले दो दिनों में टाइफाइड के मामलों में असामान्य उछाल दर्ज किया गया. यह इलाका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संसदीय क्षेत्र होने के कारण उन्होंने खुद अस्पतालों में इलाज, पानी की पाइपलाइन की मरम्मत और बीमारी की रोकथाम को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं.

100 बच्चों का चल रहा इलाज

फिलहाल गांधीनगर सिविल अस्पताल में करीब 100 बच्चों का इलाज चल रहा है, जबकि आसपास के निजी अस्पतालों में भी कई बच्चे भर्ती हैं. इसके अलावा कई मरीज घर पर दवाइयों के सहारे इलाज करा रहे हैं. आजतक की टीम गांधीनगर के आदिवाड़ा इलाके में उस स्थान पर पहुंची, जहां पिछले करीब 10 दिनों से सीवर का गंदा पानी लीक हो रहा था. इसी के पास से पीने के पानी की पाइपलाइन गुजर रही थी, जिसके कारण घरों तक पहुंचने वाला पानी दूषित हो गया. इस पानी को पीने से लोगों को तेज बुखार, बदन दर्द और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होने लगीं.

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'लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार'

दो दिन पहले जब सिविल अस्पताल में टाइफाइड के मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी, तब प्रशासन को इस समस्या की गंभीरता का अंदाजा हुआ. इसके बाद अलग-अलग घरों से पानी के सैंपल लिए गए और लोगों को सतर्क करने का काम शुरू किया गया. आदिवाड़ा गांव के रहने वाले प्रवीण ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से उनके घर आने वाला पानी गंदा और बदबूदार था. अब पानी थोड़ा साफ दिख रहा है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. आसपास के लगभग हर घर में कोई न कोई बीमार है. मजबूरी में लोग बोतलबंद पानी मंगवा रहे हैं और प्रशासन की सलाह पर उसमें भी क्लोरीन मिलाकर इस्तेमाल कर रहे हैं.

पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने बताया कि उनकी बेटी को स्कूल से लौटने के बाद तेज बुखार आया और वह बेहोश हो गई. अस्पताल में दवा दी गई है, लेकिन ज्यादा सुधार नहीं है. दूषित पानी से परेशान परिवार इलाज और बच्चों की हालत को लेकर बेहद चिंतित है. इलाके के लोगों का कहना है कि वे मजदूरी करके गुजारा करते हैं और अब कमाई का बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च हो रहा है.

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी किया सिविल अस्पताल का दौरा

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गांधीनगर सिविल अस्पताल की सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर मीता परीख ने बताया कि तीन अलग-अलग वार्ड में टाइफाइड पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है. अब तक 104 बच्चे भर्ती हुए थे, जिनमें से 19 को छुट्टी दी जा चुकी है और नए मरीज सामने आ रहे हैं. फिलहाल करीब 94 बच्चों का इलाज जारी है. उन्होंने कहा कि टाइफाइड की बीमारी में करीब 15 दिन का चक्र होता है, इसलिए अगले दो हफ्तों तक नए मामले सामने आ सकते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों से हालात पर काबू पाने की उम्मीद है.

प्रशासन हरकत में आ चुका है. राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी गांधीनगर सिविल अस्पताल का दौरा कर मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की और अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी निर्देश दिए. गांधीनगर में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और दूषित पानी की समस्या को जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश की जा रही है.

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