DD न्यूज़ दफ्तर के बाहर NSUI का प्रोटेस्ट, राहुल गांधी पर टिप्पणी को लेकर भड़के कांग्रेस कार्यकर्ता

नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित डीडी न्यूज़ दफ्तर के बाहर मंगलवार को एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया. विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक एंकर द्वारा की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से नाराज छात्रों ने पुतला फूंका और परिसर के पास तोड़फोड़ की.

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मंडी हाउस इलाके में NSUI का प्रोटेस्ट (Photo: ITG) मंडी हाउस इलाके में NSUI का प्रोटेस्ट (Photo: ITG)

अनमोल नाथ

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:15 AM IST

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को दिल्ली के मंडी हाउस स्थित डीडी न्यूज़ कार्यालय के बाहर बड़ा विरोध प्रदर्शन किया. यह प्रोटेस्ट डीडी न्यूज़ के प्राइम-टाइम एंकर अशोक श्रीवास्तव द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में किया गया. प्रोटेस्ट के दौरान गुस्साए कार्यकर्ताओं ने एंकर का पुतला फूंका. स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ शुरू कर दी.

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दिल्ली पुलिस ने इस हिंसा के संबंध में तीन एनएसयूआई कार्यकर्ताओं राहुल काजला, अखिलेश यादव और सत्यम कुशवाहा को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया है. 

पुलिस फिलहाल अन्य संदिग्धों की पहचान और तलाश में जुटी है. एनएसयूआई ने इन गिरफ्तारियों को लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश बताया है, जबकि पुलिस ने संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आधार पर कार्रवाई की है.

क्या है पूरा मामला?

पूरा विवाद डीडी न्यूज़ पर हुई एक हालिया डिबेट से शुरू हुआ. आरोप है कि एंकर अशोक श्रीवास्तव ने चर्चा के दौरान राहुल गांधी की तुलना 'सावरकर की चप्पल की धूल' से की थी. एनएसयूआई ने इस बयान को एक संवैधानिक पद पर बैठे शख्स का अपमान और सार्वजनिक प्रसारक की गरिमा के खिलाफ बताया है. प्रसार भारती के तहत आने वाले डीडी न्यूज़ ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक सफाई पेश नहीं की है.

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एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने एंकर की टिप्पणी और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी दोनों की कड़ी निंदा की है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल राजनीतिक प्रोपेगेंडा के लिए किया जा रहा है. संगठन ने प्रशासन के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं- गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई, एंकर द्वारा सार्वजनिक माफी और सरकारी मीडिया संस्थानों की जवाबदेही तय करना.

यह भी पढ़ें: डीडी न्यूज की पहचान बन चुकीं नीलम शर्मा का निधन, मार्च में मिला था 'नारी शक्ति' सम्मान

संपादकीय स्वतंत्रता पर छिड़ी नई बहस

इस घटना ने सरकारी प्रसारकों की निष्पक्षता और संपादकीय स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. विपक्षी दल इसे राजनीतिक पक्षपात का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं आलोचकों का तर्क है कि विरोध के नाम पर तोड़फोड़ करना किसी भी आंदोलन की वैधता को खत्म करता है. फिलहाल, मंडी हाउस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है और पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है.

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