दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर केवल घरों की रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है. गैस की कमी के कारण कई परिवारों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है. इस संकट का सबसे ज्यादा असर शहर की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है. दिल्ली के गोविंदपुरी स्थित नवजीवन कैंप में सिलेंडर की कमी के कारण कई घरों में खाना बनना तक बंद हो गया है.
ब्लैक में महंगे दाम
दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों के लिए स्थिति और कठिन हो गई है. पहले जो गैस सिलेंडर करीब 900 रुपये में मिलता था, वह अब ब्लैक मार्केट में लगभग 4,000 रुपये तक में बिक रहा है. इसी तरह छोटे सिलेंडर में भरे जाने वाले गैस पहले करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम में मिलते थे वो अब लगभग 400 रुपये प्रति किलोग्राम में बेची जा रही है.
लोग खरीद रहे महंगा सिलेंडर
गैस की कमी के कारण कुछ लोग मजबूरी में ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीद रहे हैं, जबकि कई परिवारों ने खाना बनाने के लिए लकड़ी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.
डिलीवरी बॉय ने बताई परेशानी
एक झुग्गी में रहने वाले डिलीवरी बॉय ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि कमर्शियल और घरेलू दोनों तरह के सिलेंडरों की कमी से न केवल उसकी नौकरी प्रभावित हुई है, बल्कि घर की रसोई भी प्रभावित हो गई है. उनका कहना है कि सरकार ने सिलेंडर बुक करने की अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी है, लेकिन कमी के कारण लोगों को काफी परेशानी हो रही है. उन्होंने बताया कि वह कई बार सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली.
सिलेंडर में भरा जाने वाला गैस भी महंगा
करीब 40 साल से जेजे क्लस्टर में रहने वाली एक महिला ने बताया कि अब कई लोग लूज एलपीजी खरीद रहे हैं. पहले यह करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम मिलती थी, लेकिन अब इसकी कीमत लगभग 400 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है. उन्होंने कहा कि इतने महंगे दाम पर भी एक बार में एक किलोग्राम से ज्यादा गैस नहीं दी जाती.
महंगे सिलेंडर से बढ़ी चिंता
कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अब लकड़ी से खाना बनाना शुरू कर दिया है, जबकि कई परिवारों को ब्लैक मार्केटर से 4,000 रुपये तक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. एक महिला ने कहा कि उनके परिवार में 10 सदस्य हैं, ऐसे में इतने महंगे सिलेंडर के साथ घर चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है.
गैस एजेंसियों पर भी नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि गैस एजेंसियां उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं देतीं. इनमें से कई लोग दिहाड़ी मजदूर हैं, जो रोजाना कुछ सौ रुपये ही कमा पाते हैं. ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों से आकर यहां रहते हैं और उन्हें किराया भी देना पड़ता है. उनका कहना है कि एलपीजी की कमी ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है.
मुंबई में कोयले का इस्तेमाल शुरू
मुंबई में कमर्शियल गैस की उपलब्धता कम होने के कारण ज्यादातर दुकानदारों के लिए खाना बनाने का खर्च बढ़ गया है. गैस न मिलने की वजह से कई लोगों ने कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. कुछ दुकानदारों ने बढ़ा हुआ खर्च ग्राहकों पर डाल दिया है, जबकि कुछ इस उम्मीद में हैं कि यह मुश्किल समय जल्द खत्म हो जाएगा. एक दुकानदार ने इस स्थिति को 'कोरोनाकाल से भी बदतर' बताया.
अनमोल नाथ / विद्या