ईरानी क्रांति की सालगिरह पर भारत ने ईरान की जनता को दी शुभकामनाएं

ईरान की इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ के मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया के जरिए बधाई संदेश साझा किया है. उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची और वहां की जनता के प्रति अपनी सद्भावना जताई है.

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एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीर (Photo: X/@DrSJaishankar) एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ सोशल मीडिया पर शेयर की तस्वीर (Photo: X/@DrSJaishankar)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान की इस्लामी क्रांति की वर्षगांठ के मौके पर ईरान की सरकार और वहां के नागरिकों को बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची को विशेष रूप से शुभकामनाएं भेजीं. 

जयशंकर ने अपने संदेश में ईरान के लोगों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया. यह संदेश ईरान की क्रांति की ऐतिहासिक वर्षगांठ के उपलक्ष्य में जारी किया गया है. 

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एस जयशंकर ने पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें वे ईरान के विदेश मंत्री अरागची के साथ नजर आ रहे हैं.

भारत और ईरान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, और विदेश मंत्री का यह कदम दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद और मित्रता को दर्शाता है.

ईरानी विदेश मंत्री के नाम विशेष संदेश

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने आधिकारिक संदेश में सीधे तौर पर ईरान के विदेश मंत्री को संबोधित किया. उन्होंने क्रांति की वर्षगांठ को एक बड़ा मौका बताते हुए ईरान की सरकार को शुभकामनाएं दीं. यह कूटनीतिक शिष्टाचार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को जाहिर करता है.

कैसे हैं भारत-ईरान के बीच रिश्ते?

भारत ने शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइज़ेशन और BRICS जैसे खास ग्रुप्स में ईरान की मेंबरशिप दिलाने में भी अहम रोल निभाया है. कल्चरल रिश्तों को गहरा करने के लिए, भारत ने नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत नौ क्लासिकल भाषाओं में से एक के तौर पर फ़ारसी (पर्शियन) को भी शामिल किया है.

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यह भी पढ़ें: ईरान तनाव के बीच US ने उतारा मिसाइलों के लिए मोबाइल लॉन्चर, कतर एयरबेस पर ये है तैयारी

ईरान ने मुश्किल मौकों पर हमेशा सपोर्ट किया हैय 1994 में ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑन ह्यूमन राइट्स (UNCHR) में भारत की बुराई करने वाले एक प्रस्ताव को रोकने में मदद की थी. इस प्रस्ताव को ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कंट्रीज़ (OIC) आगे बढ़ा रहा था, जिसे असरदार पश्चिमी देशों का सपोर्ट था. अगर यह पास हो जाता, तो यह प्रस्ताव भारत के खिलाफ़ इकोनॉमिक बैन लगाने के लिए UN सिक्योरिटी काउंसिल के पास जाता.

हालांकि, ईरान की मदद को नज़रअंदाज़ नहीं किया गया. साल 2023 में, भारत उन 30 देशों में शामिल था, जिन्होंने ईरान में ह्यूमन राइट्स की स्थिति पर यूनाइटेड नेशंस के प्रस्ताव के खिलाफ़ वोट किया था.

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