कोहरे में गई एक जान, डरावने हैं आंकड़े… जनवरी में क्यों जानलेवा बन जाती हैं दिल्ली-NCR की सड़कें?

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2020 में खुले मैनहोल और सीवर में गिरने से 140 हादसे हुए और 142 लोगों की मौत हुई. 2021 में 143 हादसों में 134 लोगों की जान गई. 2022 सबसे खतरनाक साल रहा, जब 207 हादसों में 207 मौतें दर्ज की गईं. 2023 में हादसों की संख्या कम हुई, लेकिन मौतें अब भी ज्यादा रहीं.

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घने कोहरे के बीच क्यों होते हैं एक्सीडेंट (Photo: Representational) घने कोहरे के बीच क्यों होते हैं एक्सीडेंट (Photo: Representational)

पल्लवी पाठक

  • नई दिल्ली ,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:45 PM IST

19 जनवरी की सुबह नोएडा के सेक्टर 150 में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई. घने कोहरे के बीच उनकी कार नियंत्रण से बाहर हो गई और पानी से भरे गड्ढे में गिर गई. पुलिस के अनुसार, कम दृश्यता और तेज़ रफ्तार इस हादसे की वजह हो सकती है. 

कोहरे की वजह से सड़क हादसे पूरे देश में बड़ी समस्या बने हुए हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, 2022 में भारत में कोहरे के कारण 34,266 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इनमें 14,583 लोगों की मौत हो गई और 30,796 लोग घायल हुए. 2020 में 26,541 हादसों में 12,084 लोगों की जान गई थी. 2021 में हादसे बढ़कर 28,934 हो गए और 13,372 लोगों की मौत हुई. आंकड़े साफ बताते हैं कि हर साल कोहरे से होने वाले हादसे और मौतें बढ़ रही हैं.

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दिल्ली में जनवरी का महीना कोहरे के लिए सबसे खराब माना जाता है. भारतीय मौसम विभाग के पिछले 30 साल के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में दिल्ली में औसतन 26 दिन हल्का कोहरा, 18 दिन मध्यम कोहरा, 11 दिन घना कोहरा और आठ दिन बहुत घना कोहरा रहता है. दिसंबर में भी कोहरे की स्थिति गंभीर रहती है, जबकि नवंबर और फरवरी में हालात थोड़े बेहतर होते हैं. कुल मिलाकर, सर्दियों के मौसम में दिल्ली की आधी से ज्यादा रातें और सुबहें कोहरे में डूबी रहती हैं.

कम दृश्यता के साथ-साथ खुले मैनहोल और सीवर भी लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2020 में खुले मैनहोल और सीवर में गिरने से 140 हादसे हुए और 142 लोगों की मौत हुई. 2021 में 143 हादसों में 134 लोगों की जान गई. 2022 सबसे खतरनाक साल रहा, जब 207 हादसों में 207 मौतें दर्ज की गईं. 2023 में हादसों की संख्या कम हुई, लेकिन मौतें अब भी ज्यादा रहीं.

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ये सभी आंकड़े बताते हैं कि जनवरी में कोहरा, खराब सड़कें, तेज़ रफ्तार और खुले मैनहोल मिलकर दिल्ली-एनसीआर की सड़कों को बेहद खतरनाक बना देते हैं. थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है.

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