केजरीवाल की मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना पर RTI खुलासा - आंकड़े गायब, लाभार्थियों की संख्या में गिरावट

दिल्ली की पूर्व केजरीवाल सरकार की मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना पर RTI से खुलासा हुआ है कि यात्रियों की संख्या घटी है और कई अहम आंकड़े सरकार के पास मौजूद नहीं हैं. कोरोना काल के बाद पहले यात्रियों की संख्या घटी और फिर बाद में भी ये जारी रहा.

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 RTI में घटती संख्या और अधूरा डेटा सामने आया है (Photo: PTI) RTI में घटती संख्या और अधूरा डेटा सामने आया है (Photo: PTI)

अशोक उपाध्याय

  • नोएडा, उत्तर प्रदेश,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:12 PM IST

दिल्ली सरकार की एक बड़ी योजना है जिसमें बुजुर्गों को मुफ्त में तीर्थ यात्रा कराई जाती है. इस योजना को आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने बड़े जोर-शोर से शुरू किया था. लेकिन इंडिया टुडे ने RTI यानी सूचना के अधिकार के जरिए जो जानकारी मांगी, उससे कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. यात्रियों की संख्या पहले बढ़ी, फिर घटती रही. और सबसे बड़ी बात है कि सरकार के पास कई जरूरी आंकड़े ही नहीं हैं. आइए पूरा मामला समझते हैं.

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2018 में तब के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' शुरू की. इस योजना में दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में से हर एक से 1,100 बुजुर्ग नागरिकों को मुफ्त तीर्थ यात्रा कराई जाती है. 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग अपने पति या पत्नी के साथ जा सकते हैं. 70 साल से ऊपर वाले एक सहायक भी साथ ले जा सकते हैं. पूरा खर्च सरकार उठाती है. शुरुआत में पांच तीर्थ स्थान थे, बाद में रामेश्वरम, शिर्डी, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या समेत एक दर्जन से ज्यादा जगहें जोड़ी गईं.

RTI में क्या सामने आया?

इंडिया टुडे ने दिल्ली पर्यटन और परिवहन विकास निगम यानी डीटीटीडीसी से RTI के जरिए जानकारी मांगी. जो आंकड़े मिले वो इस तरह हैं:

2019-20 में 35,759 लोगों ने यात्रा की. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है. 2020-21 में कोरोना की वजह से शून्य यात्री गए. 2021-22 में 15,988 लोग गए. 2022-23 में थोड़ी बढ़त हुई और 18,980 लोग गए. 2023-24 में फिर गिरावट आई और सिर्फ 16,200 लोग गए.

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यानी कोरोना के बाद जितनी वापसी होनी चाहिए थी, वो नहीं हुई. बल्कि संख्या पहले के मुकाबले काफी कम रही और आखिरी साल में और भी घट गई.

सबसे बड़ी कमी क्या सामने आई?

RTI के जवाब में दो बड़ी बातें सामने आईं जो सवाल खड़े करती हैं. पहली बात यह कि सरकार के पास यह जानकारी ही नहीं है कि किस धर्म के कितने लोगों ने यात्रा की और उन पर कितना पैसा खर्च हुआ. जब यह एक सरकारी कल्याण योजना है तो यह बुनियादी जानकारी न होना एक बड़ा सवाल है.

दूसरी और सबसे अहम बात यह है कि 10 मार्च 2026 को मिले RTI जवाब में 2024-25 और 2025-26 का कोई डेटा नहीं है. यह वही समय है जब फरवरी 2025 में रेखा गुप्ता की अगुवाई में नई BJP सरकार सत्ता में आई. तो इस नई सरकार के आने के बाद योजना चल रही है या नहीं, कितने लोग गए, कितना पैसा खर्च हुआ इसका कोई जवाब नहीं मिला.

कौन-सी जगहें सबसे ज्यादा पसंद की गईं?

अब तक कुल मिलाकर सबसे ज्यादा लोग रामेश्वरम गए. रामेश्वरम जाने वालों की संख्या 27,409 है. दूसरे नंबर पर द्वारकाधीश रहा जहां 26,388 लोग गए. जगन्नाथ पुरी में 7,819 और तिरुपति में 6,763 लोग गए. 

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अब योजना का क्या हाल है?

यही सबसे बड़ा सवाल है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है. RTI के जवाब से साफ है कि AAP सरकार के आखिरी सालों में ही यह योजना कमजोर पड़ने लगी थी. और नई सरकार के आने के बाद क्या हुआ, इसका कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है. बिना ताजा आंकड़ों के यह कहना मुश्किल है कि यह योजना अभी चल रही है, बंद हो गई है या बदल दी गई है.

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