दिल्ली को कचरा और धूल मुक्त बनाने के लिए MCD को 500 करोड़ की सहायता, रेखा सरकार का मास्टरप्लान

दिल्ली सरकार ने राजधानी की सफाई व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत करने के लिए नगर निगम को 500 करोड़ रुपये की सहायता देने का फैसला किया है. इसके साथ हर साल 300 करोड़ रुपये की स्थायी मदद भी दी जाएगी.

Advertisement
दिल्ली में सफाई व्यवस्था सुधारने को मिली आर्थिक राहत (File Photo: ITG) दिल्ली में सफाई व्यवस्था सुधारने को मिली आर्थिक राहत (File Photo: ITG)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 30 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

दिल्ली की सफाई व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है. राजधानी को कचरा-मुक्त और धूल-मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत दिल्ली सरकार ने नगर निगम (MCD) को 500 करोड़ रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता देने की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही हर साल 300 करोड़ रुपये की स्थायी मदद देने का भी वादा किया गया है.

Advertisement

इस फैसले को दिल्ली सचिवालय में हुई एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग में अंतिम रूप दिया गया, जहां सरकार ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में सफाई व्यवस्था को टिकाऊ और प्रभावी बनाना प्राथमिकता है.

बीते कुछ सालों से MCD गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही थी. बजट की कमी के चलते कचरा उठाने वाली एजेंसियों का भुगतान समय पर नहीं हो पाता था. कई इलाकों में सफाई सेवाएं बाधित हो रही थीं. कूड़े के ढेर, बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा था. अब इस 500 करोड़ रुपये के फंड का बड़ा हिस्सा कचरा उठाने और परिवहन करने वाली कंपनियों के पुराने बकाया भुगतान में खर्च किया जाएगा, ताकि सफाई सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रह सकें. सरकार का कहना है कि अब कचरा प्रबंधन सेवाओं में रुकावट नहीं आएगी और शहर के हर हिस्से में नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी.

Advertisement

कचरा प्रबंधन में बड़ा सुधार, गीला-सूखा कचरा होगा अलग

नई योजना के तहत घर-घर कचरा संग्रहण और कचरे के पृथक्करण को प्राथमिकता दी जाएगी. गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग प्रोसेस करने की व्यवस्था मजबूत होगी. कचरे के वैज्ञानिक निपटान पर जोर दिया जाएगा. लैंडफिल साइट्स पर कचरे के बोझ को कम करने के लिए नई प्रोसेसिंग तकनीकें अपनाई जाएंगी. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले सालों में दिल्ली के कचरे के पहाड़ पूरी तरह खत्म किए जाएं, जिनमें गाजीपुर, भलस्वा और ओखला जैसे बड़े लैंडफिल साइट्स शामिल हैं.

धूल प्रदूषण पर प्रहार, सड़कों की मरम्मत को मिलेगी रफ्तार

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण की एक बड़ी वजह सड़कों की धूल और गड्ढे हैं. नई योजना के तहत सड़कों के गड्ढे भरे जाएंगे. पैचवर्क और छोटी मरम्मत को प्राथमिकता दी जाएगी. कच्ची सड़कों और खुले इलाकों में धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे. सरकार का मानना है कि यदि सड़कों की स्थिति सुधरेगी, तो PM10 और PM2.5 प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आ सकती है.

यह भी पढ़ें: 'भारी कीमत चुका रहे हैं, आवाज उठाइए...' दिल्ली के प्रदूषण पर राहुल गांधी की जनता से अपील

हर विधानसभा में लगेंगी ग्रीन वेस्ट मशीनें

ग्रीन वेस्ट यानी पेड़ों की पत्तियां, टहनियां और बगीचों का कचरा अब बड़ी समस्या बनता जा रहा है. इसे निपटाने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में आधुनिक ग्रीन वेस्ट प्रोसेसिंग मशीनें लगाई जाएंगी. पत्तियों और जैविक कचरे को कम्पोस्ट और खाद में बदला जाएगा. खुले में जलाने की घटनाओं को रोका जाएगा, जिससे धुएं और प्रदूषण में कमी आएगी.

Advertisement

कचरे से बनेगी बिजली, वेस्ट-टू-एनर्जी पर जोर

दिल्ली सरकार ने वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं को भी इस योजना में शामिल किया है. नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाए जाएंगे. पुराने प्लांट्स को अपग्रेड और आधुनिक किया जाएगा. कचरे से बिजली और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का दावा है कि इससे न सिर्फ कचरे की मात्रा घटेगी, बल्कि ऊर्जा उत्पादन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

फंड के दुरुपयोग पर सख्ती, हर खर्च का हिसाब अनिवार्य

सरकार ने साफ कर दिया है कि यह फंड बिना जवाबदेही के नहीं दिया जाएगा. MCD को हर खर्च का उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होगा. पैसा केवल स्वीकृत और तय कार्यों पर ही खर्च किया जाएगा. परियोजनाओं की नियमित निगरानी और ऑडिट किया जाएगा. इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर रुपये का सही उपयोग हो और भ्रष्टाचार पर रोक लगे.

दिल्लीवासियों को क्या फायदा होगा?

इस योजना से कचरे के ढेर कम होंगे. सड़कों पर धूल और गड्ढे घटेंगे. हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा. शहर ज्यादा साफ, सुरक्षित और रहने योग्य बनेगा. डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों का खतरा घटेगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement