दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में एयर पॉल्यूशन और यमुना नदी की गंदगी को लेकर कहा कि ये समस्याएं अचानक पैदा नहीं हुई हैं, बल्कि सालों की उपेक्षा और शॉर्ट-टर्म पॉलिसी के परिणाम हैं.
रेखा गुप्ता ने पिछली सरकारों के कामकाज पर कटाक्ष करते हुए बताया कि आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण नियंत्रण में परमानेंट समाधान के बजाय केवल टेम्पररी उपायों और पब्लिसिटी पर फोकस किया. उन्होंने कहा कि GRAP, ऑड-ईवन, आर्टिफिशियल बारिश और एंटी-स्मॉग गन जैसे कदम केवल तुरंत के राहत देने के लिए थे, जबकि फंडामेंटल रिफॉर्म्स की जरूरत थी.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पॉल्यूशन को केवल हवा की सफाई तक सीमित नहीं समझा जा सकता, बल्कि धूल, हवा और पानी तीनों के पॉल्यूशन पर सामूहिक रूप से काम करना आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि वाहन उत्सर्जन, सड़क की धूल और कचरा मैनेजमेंट में कमी दिल्ली में पॉल्यूशन के प्रमुख कारण हैं. इस संदर्भ में, उनकी सरकार ने दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह से स्वच्छ और इलेक्ट्रिक बसों से करने की दिशा में काम तेज कर दिया है. फिलहाल राजधानी में लगभग 3,600 बसें चल रही हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा बसें उनकी सरकार के कार्यकाल में जोड़ी गई हैं. 2026 तक यह संख्या 7,700 और 2028 तक 11,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य है.
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कचरा मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी सुधारों पर उन्होंने कहा कि रोजाना उत्पन्न 11,000 मीट्रिक टन कचरे को पहले सही तरीके से प्रोसेस नहीं किया जाता था, जिससे लैंडफिल साइट्स पर कचरे के पहाड़ बन गए थे. अब ओखला और भलस्वा लैंडफिल 2026 तक साफ कर दिए जाएंगे, जबकि गाजीपुर साइट पर थोड़ा अधिक समय लगेगा.
यमुना नदी की सफाई को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि नदी में कूड़ा-करकट, बिना ट्रीटमेंट का सीवेज और पशुओं का गोबर गिरता रहा है. सरकार ने 37 पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड किया है और प्रमुख नालों की डी-सिल्टिंग का काम शुरू किया है. गोबर निस्तारण के लिए बायोगैस प्लांट भी लगाए जा रहे हैं.
रेखा गुप्ता ने विश्वास जताया कि पॉलिसी, कमिटमेंट और जनता के पार्टिसिपेशन से दिल्ली में बेहतर हवा और स्वच्छ यमुना का सपना जल्द पूरा होगा, हालांकि इसके लिए समय लगेगा. उनका कहना है कि यह एक लगातार और समर्पित प्रयासों का विषय है.
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