प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ईंधन संकट के मद्देनजर ऊर्जा बचत और मितव्ययता की अपील का असर अब मध्यप्रदेश की शासन व्यवस्था में साफ दिखने लगा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 14 मई को नई दिल्ली प्रवास के दौरान अपने भारी-भरकम कारकेड (काफिले) को छोड़कर शिवाजी स्टेडियम से दिल्ली एरोसिटी तक मेट्रो ट्रेन में सफर किया.
मेट्रो के सफर के दौरान मुख्यमंत्री एक आम नागरिक की तरह सह-यात्रियों के बीच पहुंचे. इस दौरान जनता के साथ उनके आत्मीय संवाद की कुछ खास झलकियां देखने को मिलीं.
दरअसल, कुछ महिला यात्रियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि वे मध्यप्रदेश घूम चुकी हैं और वह बहुत खूबसूरत है. CM यादव ने मुस्कुराते हुए उन्हें धन्यवाद दिया. कुछ यात्रियों ने प्रदेश की जनहितकारी योजनाओं की जानकारी ली और उनकी सराहना की. मुख्यमंत्री ने इस यात्रा के जरिए 'ग्रीन मोबिलिटी' और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने का प्रेरणादायी संदेश दिया.
MP सरकार की 'बचत गाइडलाइन'
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की अपील केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि देशहित में एक अनिवार्य कदम है. ईंधन की खपत कम करने से देश के लिए डॉलर बचेगा और विदेशों पर हमारी निर्भरता कम होगी. सरकार अब वर्चुअल कैबिनेट बैठकों, मंत्रियों और निगम मंडल के पदाधिकारियों को कम संसाधनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इस अपील को लेकर राज्य में एक औपचारिक गाइडलाइन बनाई गई है, जिसका पालन अनिवार्य किया जा रहा है. देखें VIDEO:-
कारकेड में कटौती और नो-रैली नीति
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अपने काफिले में वाहनों की संख्या को सीमित कर चुके हैं. अब उनकी घोषणा के अनुसार, मुख्यमंत्री के दौरों के दौरान अब वाहन रैलियां नहीं निकाली जाएंगी. सभी मंत्रियों से भी अपील की गई है कि वे सफर के दौरान कम से कम गाड़ियों का इस्तेमाल करें और यथासंभव पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें.
अनुशासन से बनेगा 'विकसित भारत'
CM मोहन यादव का मानना है कि यदि देश को मजबूत स्थिति में लाना है, तो जीवन पद्धति में अनुशासन लाना होगा. उनका यह मेट्रो सफर केवल एक फोटो-अप नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' की दिशा में जनभागीदारी को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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