दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने तीन बड़े और कड़े फैसले लिए हैं. इन फैसलों का असर वाहन चालकों से लेकर किसानों और ऑटो सेक्टर तक पर पड़ेगा. सरकार का उद्देश्य क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करना और पर्यावरण को सुरक्षित बनाना है. सबसे पहले CAQM ने No PUC, No Fuel नियम को NCR में लागू करने का निर्णय लिया है. यह नियम 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा.
इसके तहत बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र यानी PUC प्रमाण पत्र वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा. पहले यह नियम सिर्फ दिल्ली में लागू था, लेकिन अब इसे पूरे NCR में लागू किया जाएगा. पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों से वाहनों की जांच की जाएगी और नंबर स्कैन होते ही PUC की स्थिति सामने आ जाएगी.
दूसरा बड़ा फैसला पराली जलाने की समस्या को लेकर है. CAQM ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को 2026 तक पराली जलाने की घटनाएं पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य दिया है. इसके लिए हर गांव के खेतों की मैपिंग की जाएगी और 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा. हॉटस्पॉट गांवों में 50 किसानों पर निगरानी रखी जाएगी.
No PUC, No Fuel नियम लागू करने की तैयारी
पराली प्रबंधन की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए वेब आधारित डैशबोर्ड बनाया जाएगा. जिला और ब्लॉक स्तर पर पराली प्रोटेक्शन फोर्स तैनात होगी जो पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर निगरानी करेगी. रात के समय पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी और सैटेलाइट से निगरानी कर पराली जलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी. दोषियों पर रेड एंट्री और पर्यावरण जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं.
इसके अलावा किसानों को जागरूक करने के लिए बड़े स्तर पर IEC अभियान चलाया जाएगा. पुराने और खराब CRM मशीनों की समीक्षा कर अगस्त 2026 तक नई मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी. छोटे और सीमांत किसानों को मुफ्त CRM मशीनें दी जाएंगी और कस्टम हायरिंग सेंटर भी बनाए जाएंगे.
CAQM का तीसरा बड़ा फैसला परिवहन क्षेत्र से जुड़ा है. आयोग ने एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की नीति को और सख्त किया है. इसके तहत अब सिर्फ इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ही रजिस्टर किए जाएंगे. 2027 से दिल्ली में नए CNG और डीजल ऑटो के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने का प्रस्ताव है.
2027 से CNG और डीजल ऑटो पर लग सकती है रोक
इसके अनुसार 2027 से दिल्ली में और 2028 से हाई वॉल्यूम डीजल जिलों में सिर्फ L5 इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर ही रजिस्टर्ड होंगे. इससे ऑटो और मालवाहक वाहनों के सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. CAQM का कहना है कि इन तीन बड़े फैसलों से दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में ठोस सुधार आएगा और वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी.
सुशांत मेहरा