दिल्ली के बंगला नंबर 6, फ्लैग स्टाफ रोड को लेकर चल रहा विवाद BJP और AAP के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक खींचतान बन गया है. सारी बहस इस प्रॉपर्टी को दिल्ली के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास के रूप में नामित करने को लेकर है जबकि इसके लिए कोई आधिकारिक आदेश नहीं है. अतीत में, दिल्ली के कई मुख्यमंत्री अलग-अलग आवासों में रह चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि 6, फ्लैग स्टाफ रोड इस भूमिका के लिए पहले से तय नहीं था.
कहां से शुरू हुआ विवाद?
विवाद तब शुरू हुआ जब लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने साइट के रेनोवेशन का काम शुरू किया, जिसमें आस-पास के सरकारी क्वार्टरों को भी शामिल करने की योजना थी. इसके बाद आरोप लगे कि केजरीवाल के आवास पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च किया गया है. साथ ही रेनोवेशन प्रक्रिया में नियामक उल्लंघन के आरोप भी लगे.
शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में केजरीवाल के जेल जाने के बाद इस मुद्दे ने और तूल पकड़ा. पिछले साल सितंबर में जमानत पर रिहा हुए केजरीवाल ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और आतिशी को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया. इस बदलाव ने 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित आवास के लिए आवंटन की एक नई बहस शुरू कर दी.
4 अक्टूबर को केजरीवाल ने खाली कर दिया था घर
अरविंद केजरीवाल ने 4 अक्टूबर, 2024 को घर खाली कर दिया और दूसरी जगह पर शिफ्ट हो गए लेकिन पीडब्ल्यूडी को चाबियां सौंपने को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई. कथित तौर पर, चाबियां पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों तक कभी पहुंचीं ही नहीं और आतिशी ने पीडब्ल्यूडी से औपचारिक आवंटन के बिना ही चाबियां हासिल कर लीं, जिससे प्रक्रिया संबंधित आपत्तियां पैदा हुईं.
11 अक्टूबर को आतिशी को अलॉट हुआ बंगला
पीडब्ल्यूडी ने आतिशी के शिफ्ट होने से पहले गहन इन्वेंट्री जांच की जरूरत पर जोर दिया. लिहाजा उन्होंने 9 अक्टूबर को इन्वेंट्री जांच के लिए आवास को सील कर दिया और आतिशी घर में शिफ्ट नहीं हो पाईं. जरूरी इन्वेंट्री प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद, 11 अक्टूबर, 2024 को आवास आधिकारिक तौर पर आतिशी को आवंटित कर दिया गया.
फिर चर्चा में आया मुद्दा
दिल्ली की सीएम आतिशी से 6, फ्लैग स्टाफ रोड बंगला वापस लेने के पत्र ने ताजा विवाद को जन्म दिया और नियमों व प्रक्रियाओं की तरफ भी लोगों का ध्यान खींचा है. आतिशी ने 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित बंगले का औपचारिक आवंटन होने के बावजूद उसका पजेशन नहीं लिया. इस मुद्दे को लोक निर्माण विभाग (PWD) ने उठाया और पुष्टि की कि आतिशी ने कभी भी घर का पजेशन नहीं लिया था, जिसका मतलब है कि वो कभी भी वहां शिफ्ट नहीं हुई थीं और कई अनुरोधों और पत्राचारों का भी जवाब नहीं दिया गया.
क्या कहते हैं नियम?
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट के 21 फरवरी, 2022 के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि कोई आवंटी 'आवासीयता प्रमाणपत्र' हासिल करने के पांच वर्किंग डे के भीतर आवंटित घर का पजेशन नहीं लेता है तो आवंटन खुद ही रद्द हो जाता है. इसके अलावा, नियम यह कहते हैं कि अगर आवंटी किसी अन्य सरकारी आवास में रह रहा है तो उसे नए घर का पजेशन लेने के 15 दिनों के भीतर उस आवास को खाली करना होगा. आतिशी के मामले में, उन्हें AB17, मथुरा रोड पर एक और बंगला आवंटित किया गया है.
आतिशी ने लगाया आरोप
आतिशी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी ने तीन महीने में दो बार मुझसे मेरा आवास छीना है. अगर जरूरत पड़ी तो मैं दिल्ली वालों के घर में जाकर रहूंगी लेकिन दिल्ली वालों के काम नहीं रुकेंगे. उन्होंने कहा, 'बीजेपी ने तीन महीने में दूसरी बार मेरा आवास मुझसे छीन लिया. बीजेपी को लगता है कि घर छीनने से, हमारे साथ गाली-गलौच करने से, हमारे परिवार के साथ निचले स्तर की बातें करने से वो दिल्ली वालों के लिए काम रोक देंगे. मैं दिल्ली वालों को बताना चाहती हूं कि घर छीनने से काम रुकेंगे नहीं. जरूरत पड़ी तो दिल्लीवालों के घर में जाकर रहूंगी और दोगुने जज्बे से काम करूंगी.'
उन्होंने कहा, 'बीजेपी वालों ने आज मुझे सीएम आवास से बाहर निकाला है, आज मैं ये प्रण ले रही हूं कि दिल्ली की हर महिला को 2100 रुपये दिलवा कर रहूंगी, हर पुजारी-हर ग्रंथी को 1800 रुपये की सम्मान राशि दिलवा कर रहूंगी. AAP का हर नेता अपने सिर पर कफन बांधकर निकला है, दिल्लीवालों को लिए काम करने निकला है.'
पीडब्ल्यूडी ने दी सफाई
आतिशी के आरोपों पर पीडब्ल्यूडी के सूत्रों ने कहा, 'उन्हें बाहर नहीं निकाला गया है. वे कभी वहां शिफ्ट ही नहीं हुई थीं. उन्हें 17 एबी मथुरा रोड पर सरकारी आवास पहले से ही आवंटित है और उन्हें फिर से दो अन्य बंगलों का ऑफर दिया गया है.'
सूत्रों के अनुसार यह घर उनसे दो कारणों से वापस लिया गया है. पहला, उन्हें एक हफ्ते के भीतर घर का पजेशन लेना था और उन्होंने 3 महीने में भी ऐसा नहीं किया, जो नियमों के खिलाफ है. दूसरा, 6 फ्लैग स्टाफ रोड सीबीआई/ईडी की जांच के दायरे में है और अब सीएजी ने इसके निर्माण में भ्रष्टाचार की पुष्टि की है.
जब आतिशी को घर आवंटित किया गया था, तो एक शर्त यह थी कि चूंकि 6 फ्लैग स्टाफ आवास की सीबीआई/ईडी द्वारा जांच की जा रही है, इसलिए उन्हें उनके साथ सहयोग करना होगा. पीडब्ल्यूडी का आरोप है कि आतिशी ने जानबूझकर घर का पजेशन नहीं लिया ताकि घर बंद रहे और जांच एजेंसियां रुकी रहें.
कुमार कुणाल