साथ रहने वाली लड़कियों को एक ही टाइम पर आते हैं पीरियड्स! क्या है इसके पीछे का साइंस

अक्सर कहा जाता है कि साथ रहने वाली लड़कियों के पीरियड्स एक ही समय पर आने लगते हैं. इसे पीरियड सिंकिंग या मैक्क्लिंटॉक इफेक्ट (McClintock Effect) कहा जाता है. लेकिन क्या वाकई फेरोमोन्स इसके पीछे का कारण हैं या यह महज एक इत्तेफाक है? इस बारे में जानेंगे.

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लड़कियों का कॉमन रूटीन हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है. (Photo: AI Generated) लड़कियों का कॉमन रूटीन हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है. (Photo: AI Generated)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:56 PM IST

पीरियड्स वुमंस बॉडी की एक नेचुरल बॉडी क्लीनिंग प्रोसेस है जो लगभग हर 28-30 दिन में आती है. हर महिला की पीरियड डेट्स अलग-अलग होते हैं लेकिन पीजी, हॉस्टल, फ्लैट या एक ही घर में साथ रहने वाली महिलाओं के बीच एक बात बड़ी फेमस है, 'मेरे पीरियड्स आ गए हैं तो अब तुम्हारे भी आने वाले होंगे'. इसे साइंस की भाषा में मैक्क्लिंटॉक प्रभाव (McClintock Effect) या मेंस्ट्रुअल सिंक्रोनी कहा जाता है. दरअसल, सालों से यह माना जाता रहा है कि साथ रहने वाली महिलाओं के शरीर से निकलने वाले फेरोमोन्स (एक प्रकार का केमिकल) एक-दूसरे के पीरियड साइकल को प्रभावित करते हैं. लेकिन क्या यह वाकई में सच है या फिर सिर्फ एक इत्तेफाक? मॉडर्न रिसर्च और डॉक्टर इस बारे में क्या कहते हैं, यह जान लीजिए.

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क्या है मैक्क्लिंटॉक प्रभाव?

Cleveland clinic के मुताबिक, पीरियड्स एक के साथ होने की थ्योरी सबसे पहले 1971 में मनोवैज्ञानिक मार्था मैक्क्लिंटॉक ने दी थी. 1971 में मार्था ने कॉलेज की 135 स्टूडेंट्स पर स्टडी की थी और दावा किया था कि जो लड़कियां रूममेट या करीबी फ्रेंड्स थीं, समय के साथ उनके पीरियड्स की डेट एक‑दूसरे के करीब आने लगी थी. यानी कि जो महिलाएं करीब रहती हैं, उनके ओव्यूलेशन का समय धीरे-धीरे एक समान होने लगता है. 

उनके मुताबिक, पसीने के जरिए निकलने वाले फेरोमोन्स हवा के जरिए दूसरी महिला के हार्मोनल सिस्टम को ट्रिगर करते हैं जिससे ओव्यूलेशन और पीरियड की टाइमिंग बदलकर 'सिंक' होने लगती है.

क्या कहती हैं डॉक्टर?

गुड़गांव के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में ऑब्स्टेट्रिक्स और गायनोकोलॉजी डिपार्टमेंट की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नुपुर गुप्ता के मुताबिक, 'हॉस्टल, पीजी या घर में साथ रहने वाली लड़कियों या महिलाओं के पीरियड्स साइकिल एक ही हों, यह बात वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं हुई है. यह पूरी तरह से एक इत्तेफाक है. 

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हर महिला के पीरियड साइकिल का समय अलग-अलग होता है इसलिए समय के साथ डेट्स मैच होना या उनका ओवरलैप होना स्वाभाविक है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बॉडी या पीरियड्स एक-दूसरे के साथ 'सिंक' हो रहे हैं.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और पीरियड-ट्रैकिंग ऐप 'क्लू' की स्टडी में लगभग 360 गर्ल्स या महिलाएं (जो साथ रहते थीं) के डेटा का एनालिसिस किया गया. पाया गया कि अधिकांश महिलाओं के पीरियड्स साथ में आने की बजाय, उनके पीरियड्स साइकल में और गैप आता गया. रिसर्चर्स का कहना है कि पीरियड सिंकिंग का कोई पुख्ता वैज्ञानिक आधार नहीं मिला है.

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश्ड 2006 की स्टडी में 186 चीनी लड़कियां जो साथ में रहती थीं, उन पर रिसर्च की गई. जिसमें सामने आया कि जो सिंक दिखता है, वह अधिकतर मैथेमैटिकल कोइंसिडेंस और साइकल का नैचुरल वैरिएशन समझा जा सकता है.

लाइफस्टाइल है असली कारण

डॉ. नुपुर का कहना है, पीरियड डेट्स एक-दूसरे के करीब आने के पीछे का कारण फेरोमोन्स नहीं लाइफस्टाइल से जुड़ी चीजें अधिक जिम्मेदार हो सकती है. एक साथ या पास रहने वाली महिलाएं अक्सर समान स्ट्रेस को महसूस करती हैं. उनके खान-पान की आदतें और फिजिकल एक्टिविटी भी लगभग समान ही रहती हैं. 

उनका यही कॉमन रूटीन हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है. रिसर्च बताती है कि अगर 2 दोस्त एक जैसी डाइट और वर्कआउट फॉलो कर रही हैं तो उनके हार्मोन्स पर समान प्रभाव पड़ना मुमकिन है. यही वजह है कि कभी-कभी पीरियड्स की तारीखें पास आ जाती हैं, जिसे लोग 'सिंकिंग' मान लेते हैं.

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि हर महिला का पीरियड साइकिल अलग होता है. किसी का 21 दिन का तो किसी का 35 दिन का. जब दो या तीन महिलाएं अलग-अलग साइकिल लेंथ के साथ समय बिताती हैं तो महीने में कभी न कभी उनके पीरियड्स की तारीखें ओवरलैप होना तय है. इसे 'सिंक' होना नहीं, बल्कि 'कोइंसिडेंस' यानी इत्तेफाक कहना ज्यादा सही होगा.

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