BP Medicine Side Effects On kidney: अक्सर घरों में, मोहल्लों में और आजकल सोशल मीडिया पर एक बात बहुत आम सुनने को मिलती है कि रोज़ ब्लड प्रेशर की दवा लोगे तो किडनी खराब हो जाएगी. यह बात सुनकर कई लोग डर जाते हैं. कोई दवा लेना टाल देता है, तो कोई चुपचाप खुद ही दवा बंद कर देता है.
खासकर तब, जब रिपोर्ट में किडनी से जुड़ा कोई नंबर थोड़ा भी ऊपर-नीचे दिख जाए. लेकिन क्या सच में ब्लड प्रेशर की दवाएं किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं? या फिर यह सिर्फ एक ऐसा मिथ है, जो अनजाने में हमारी सेहत को और ज्यादा खतरे में डाल रहा है?
मुंबई सेंट्रल के वॉकहार्ट हॉस्पिटल में कंसल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. परिन सांगोई ने इस कॉमन बिलीफ को साफ शब्दों में गलत बताया है. उनका कहना है कि ब्लड प्रेशर की दवाएं किडनी को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि बिना इलाज का हाई ब्लड प्रेशर ही किडनी खराब होने की सबसे बड़ी वजहों में से एक है.
डॉ. सांगोई बताते हैं कि जब लंबे समय तक ब्लड प्रेशर बढ़ा रहता है, तो यह किडनी की बेहद नाज़ुक ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है. धीरे-धीरे किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कम होने लगती है,सबसे खतरनाक बात यह है कि यह नुकसान चुपचाप होता है. कई सालों तक कोई लक्षण नहीं दिखते और मरीज को पता ही नहीं चलता कि किडनी अंदर ही अंदर कमजोर हो रही है.
डॉ. सांगोई के मुताबिक, कई मामलों में जब तक हाई ब्लड प्रेशर की पहचान होती है, तब तक किडनी को नुकसान शुरू हो चुका होता है. जब इलाज शुरू होता है और नियमित जांचें होती हैं, तब यह पुराना नुकसान रिपोर्ट्स में सामने आता है.
यहीं से गलतफहमी जन्म लेती है कि दवा लेने से किडनी खराब हुई, जबकि असल में नुकसान पहले से ही हो चुका होता है.वो भी बिना इलाज के हाई बीपी की वजह से.
कई लोग सोचते हैं कि अब तो बीपी ठीक है, दवा क्यों खाएं? मगर डॉ. सांगोई साफ कहते हैं कि नॉर्मल रीडिंग इस बात का संकेत है कि इलाज काम कर रहा है. हाई ब्लड प्रेशर ज्यादातर मामलों में एक लाइफटाइम कंडीशन होती है. दवा अचानक बंद करने से बीपी फिर से तेजी से बढ़ सकता है, वो भी बिना किसी चेतावनी के.
इससे दिल, दिमाग और किडनी पर अचानक दबाव पड़ता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी डैमेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
डॉ. सांगोई इसे सबसे आम और सबसे गंभीर गलती मानते हैं. सोशल मीडिया की सलाह, दोस्तों की बातें या अभी तो ठीक लग रहा है. जैसे कारणों से दवा बंद करना बहुत नुकसानदायक हो सकता है, इससे ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल हो जाता है और अंगों को होने वाला नुकसान तेज़ी से बढ़ता है.दवा की मात्रा बदलनी हो या बंद करनी हो, यह फैसला सिर्फ डॉक्टर की निगरानी में होना चाहिए.
सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल और तनाव कम करना, ये सभी ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में बहुत मदद करते हैं. कुछ मामलों में इनसे दवा की डोज कम हो सकती है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह दवा पूरी तरह बंद करना सही नहीं है. हर शरीर अलग होता है और इलाज भी उसी हिसाब से तय किया जाना चाहिए.
ब्लड प्रेशर की दवाएं आपके अंगों की रक्षा करती हैं, उन्हें नुकसान नहीं पहुंचातीं. ये दवाएं आज का नहीं, बल्कि आने वाले सालों का खतरा कम करती हैं. डॉ. सांगोई के अनुसार, इलाज से जुड़े फैसले डर या अफवाहों पर नहीं, बल्कि मेडिकल सलाह पर होने चाहिए. अगर आप या आपके घर में कोई हाई ब्लड प्रेशर की दवा ले रहा है, तो उसे लेकर डरने की नहीं, समझदारी से चलने की जरूरत है. सही समय पर लिया गया इलाज ही दिल, दिमाग और किडनी को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है.
आजतक हेल्थ डेस्क