अमेरिकी सेना ने बीते शनिवार वेनेजुएला पर हमला करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद से हड़कंप मचा हुआ है. देश अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना कर रहे हैं. इधर वॉशिंगटन का आरोप है कि वेनेजुएलाई लीडर की शह पर उनके यहां नशे की खेप पहुंचाई जा रही थी, और इसे ही रोकने के लिए उन्हें एक्शन लेना पड़ा. हालांकि डेटा के मुताबिक, वेनेजुएला नहीं, बल्कि कई और देश अमेरिका तक प्राइमरी ड्रग सप्लायर रहे.
पिछले साल के आखिरी-आखिरी महीनों में यूएस फोर्स वेनेजुएला की समुद्री सीमा पर हमला करते हुए लगातार बोट्स को डुबा रही थी. अमेरिका का कहना है कि ऐसी ही बोट्स की मदद से उनके यहां ड्रग ट्रैफिकिंग होती रही. यही आरोप लगाते हुए अब वेनेजुएला के लीडर निकोलस मादुरो को अरेस्ट कर लिया गया. अब वे न्यूयॉर्क के डिटेंशन सेंटर में हैं और उनके देश में राजनीतिक अस्थिरता है.
अमेरिका पर ड्रग्स का खतरा कितना गहरा है, इसका अंदाजा आंकड़े खुद दे देते हैं. ये देश पहले से ही नशे की समस्या के लिए कुख्यात रहा, लेकिन अब हालात भयावह हो चुके हैं. पिछले कुछ सालों से सालाना करीब एक लाख मौतें ड्रग ओवरडोज से हो रही है. इनमें सबसे बड़ी वजह सिंथेटिक ड्रग्स हैं. यह कोई आरोप नहीं, बल्कि खुद यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की चेतावनी है. हालात इतने गंभीर हैं कि अब नशे से होने वाली मौतें सड़क हादसों से भी ज्यादा हो चुकी हैं.
लेकिन जिस वेनेजुएला पर इतना गंभीर आरोप लगाते हुए एक्सट्रीम एक्शन ले लिया गया, हैरान करने वाली बात ये है कि अब तक उस देश से नशे की कोई खेप सार्वजनिक नहीं हो सकी. यहां तक कि जिस ड्रग ओवरडोज से युवा खत्म हो रहे हैं, उससे तक वेनेजुएला का सीधा लिंक नहीं दिखता. यूनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम के मुताबिक, फेंटानिल मेक्सिको से आता है. यही वो अवैध ड्रग है, जिससे सबसे ज्यादा मौत हो रही है.
19 सितंबर को ट्रंप प्रशासन ने समुद्र में पहली बोट को मार गिराया. इसके अगले ही दिन ट्रंप ने कहा कि हर बोट फेंटानिल से भरी हुई है और हर बोट को गिराना लगभग पच्चीस हजार जानें बचाने जैसा है. तब से बिना किसी सबूत के बोट्स गिराई जाने लगीं और आखिरकार मादुरो को गिरफ्तार कर लिया गया.
अब बात करते हैं कोकीन की, तो इसमें भी वेनेजुएला नहीं, बल्कि मेक्सिको, पनामा और कोलंबिया आगे हैं. UNODC के मुताबिक, नशे की ज्यादातर खेप समुद्री रास्तों से आती है, जबकि कुछ जमीन से होते हुए पहुंचती है. वहीं वेनेजुएला से अमेरिका तक ड्रग तस्करी का सबसे प्रचलित रूट हवाई है. यहां जांच इतनी कड़ी होती है कि नशा पहुंच पाना काफी मुश्किल होता है.
असल में वेनेजुएला कोलंबिया जैसे देशों की तरह ड्रग्स का बड़ा उत्पादक देश नहीं. कोकीन का उत्पादन कोलंबिया, पेरू और बोलिविया में होता है. लेकिन वेनेजुएला की भूमिका ट्रांजिट की मानी जाती है. ड्रग्स यहां बनते नहीं, बल्कि यहां से होकर अमेरिका और यूरोप की ओर जाते हैं. आरोप लगते रहे हैं कि कुछ सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों की मिलीभगत से ड्रग्स की खेप आगे भेजी जाती रही. हालांकि ये सिर्फ आरोप हैं, वहीं जिन देशों की भूमिका इसमें साबित हो चुकी, उनपर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही.
वेनेजुएला में तेल का बड़ा भंडार है, जिसपर अमेरिका की नजरें काफी समय से रहीं. अब, जबकि मादुरो को अरेस्ट किया जा चुका और देश में आर्थिक बदहाली है, ऐसे में अमेरिका के पास मौका है कि वो यहां अपनी पसंद की सरकार ले जाए. ट्रंप ने इस इरादे पर खास लीपापोती भी नहीं की. उन्होंने सीधे कह दिया कि जब तक वेनेजुएला में स्थिरता नहीं आ जाती, अमेरिकी फोर्स वहां बनी रहेगी. लीडर की गिरफ्तारी के बाद से नशे की चर्चा पूरी तरह से बंद है, न ही कोई छापामारी हुई, जिसमें नशे की तस्करी का भंडाफोड़ हो सके.
कोलंबिया और मेक्सिको ड्रग सप्लायर माने जाते हैं, इसके बावजूद वे वेनेजुएला जैसे देशों की तरह सीधे अमेरिकी सैन्य एक्शन के निशाने पर नहीं आते. इसकी बड़ी वजह है उनकी सरकारों का अमेरिका के साथ सहयोग. कोलंबिया लंबे समय से अमेरिका का साझेदार रहा है. प्लान कोलंबिया के तहत अमेरिका ने वहां की सरकार और सेना को अरबों डॉलर की मदद दी ताकि ड्रग कार्टेल और गुरिल्ला संगठनों से लड़ा जा सके. यानी ड्रग्स के बावजूद कोलंबिया को एक दुश्मन नहीं बल्कि सहयोगी की तरह देखा गया.
मेक्सिको का मामला और भी संवेदनशील है क्योंकि वह अमेरिका का पड़ोसी है और उसका ट्रेड पार्टनर भी. दोनों देशों की अर्थव्यवस्था गहराई से जुड़ी हुई है. अमेरिका जानता है कि मेक्सिको में सीधा सैन्य एक्शन वहां अस्थिरता फैलाएगा जिसका असर सीधे अमेरिकी सीमा पर पड़ेगा. लाखों शरणार्थी हिंसा और अराजकता से भागकर अमेरिका की तरफ आ सकते हैं. इसलिए मेक्सिको के साथ वो संतुलन बनाकर रहता आया.
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