'बेकार एक्टर हो', स्मृति ईरानी के टैलेंट पर उठे थे सवाल, मिली कम फीस, बोलीं- मेल एक्टर्स...

स्मृति ईरानी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआती आलोचनाओं, तुलसी विरानी के किरदार, और राजनीति में सफर को शेयर किया. एक्ट्रेस ने बताया कि बावजूद इसके कि तुलसी विरानी का किरदार आइकॉनिक है, उन्हें लोग तब 'बेकार एक्टर' कहते थे. वो इसके लिए ट्रोल हो चुकी हैं.

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स्मृति ईरानी को मिले ताने (Photo: PTI) स्मृति ईरानी को मिले ताने (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

एक्ट्रेस-पॉलिटिशियन स्मृति ईरानी इन दिनों 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' 2 से टीवी की दुनिया पर फिर से राज कर रही हैं. उन्होंने हाल ही में अपने करियर की शुरुआती मुश्किलों और आलोचनाओं को शेयर किया. स्मृति ने बताया कि एक बार उन्हें “खराब एक्टर” कहा गया था.

कैसी थी स्मृति की जर्नी?

स्मृति ने बताया कि “25 साल पहले मुझे पार्ट-टाइम पॉलिटिशियन और फुल-टाइम एक्टर कहा जाता था.” सोहा अली खान के पॉडकास्ट ऑल अबाउट हर में उन्होंने एक्टिंग और पॉलिटिक्स के सफर पर खुलकर बातें कीं. एक्ट्रेस ने पुरानी यादें ताजा करते हुए बताया कि एक समय उन्होंने अपने पापा से सवाल किया था, “मैं जिंदगीभर किसी की पत्नी बनकर ही रह जाऊं? 17 साल आपकी बेटी रही. आखिर कब अपनी जिंदगी अपने लिए जी पाऊंगी?”

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उन्होंने बताया कि उनकी पहली नौकरी दिल्ली की जनपथ सड़क पर 200 रुपये रोज की थी. उस वक्त उन्होंने पिता से कर्ज भी लिया था. पापा ने कहा था, “तुम्हें एक साल देता हूं, अगर पैसे नहीं लौटा पाईं तो शादी उसी से करनी होगी जिससे मैं कहूं.”

बकवास एक्टर कहलाईं स्मृति?

स्मृति ने अपने मशहूर किरदार तुलसी विरानी को भी याद किया. आज भले ही ये किरदार आइकॉनिक है, और इससे जुड़े हर सीन्स के लिए उन्हें तारीफें मिलती हैं. वो सीन्स खूब वायरल भी होते हैं. लेकिन एक वक्त था जब स्मृति को उन्हीं सीन्स के लिए बकवास एक्टर कहा जाता था. उन्होंने कहा, “हर जगह लोग मुझे कहते थे कि तुम खराब एक्टर हो… और मेल एक्टर को मुझसे ज्यादा पैसे मिलते थे.” जब सोहा ने पूछा कि आज की तुलसी 25 साल पहले वाली तुलसी से क्या कहेगी तो स्मृति बोलीं, “ज्यादा पैसे मांगना.”

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स्मृति ने पॉलिटिक्स पर भी बात की और कहा कि, “2004 में मैंने पहली बार चुनाव लड़ा. मेरी उम्र 27 साल थी. न पॉलिटिक्स में कोई पढ़ाई हुई थी, न कोई अनुभव था.”

स्मृति ने एक किस्सा भी सुनाया कि एक गुस्सैल एडिटर ने फोन किया और डांटते हुए कहा, “क्या हो गया तुम्हें? बाहर आओ.” वो बोलीं कि इज्जत हमेशा सबसे ऊपर है, आप किसी को पसंद करो या ना करो.

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