यश की फिल्मों में गाने बनाकर छाए, 2 बार की सुसाइड की कोशिश, स्ट्रगल याद कर इमोशनल हुआ कंपोजर

साउथ और बॉलीवुड फिल्मों में अपना दमदार म्यूजिक देने वाले कंपोजर रवि बसरूर ने अपने स्ट्रगल के दिनों को याद किया है. उनका कहना है कि वो बचपन में ही 2 बार सुसाइड करने की कोशिश कर चुके हैं. मगर तभी उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिससे अब उनकी जिंदगी पूरी बदल गई.

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यश की फिल्म के कंपोजर रवि बसरूर यश की फिल्म के कंपोजर रवि बसरूर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:11 AM IST

आपने यश की 'केजीएफ' तो जरूर देखी होगी. उस फिल्म में जो दमदार गाने बनाए गए हैं, उसे आज भी सुना जाता है. उन गानों को रवि बसरूर ने बनाया है. यश के अलावा प्रभास की 'सलार' और ना जाने कितनी अनगिनत साउथ फिल्मों में उन्होंने गाने कंपोज किए. रवि बसरूर सिर्फ साउथ ही नहीं, बॉलीवुड में भी बड़े मशहूर हैं. 

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यश की फिल्मों में रवि बसरूर के गाने

रोहित शेट्टी की फिल्म 'सिंघम अगेन' में रवि ने टाइटल ट्रैक बनाया था जो काफी जोरदार था. रवि ने अब यश की फिल्म 'टॉक्सिक' के गाने भी बनाए हैं, जिसका इंतजार इस समय बेसब्री से किया जा रहा है. बीते दिनों फिल्म का दमदार टीजर सामने आया था, जिसमें उनके बैकग्राउंड स्कोर ने तहलका मचाया. 

रवि बसरूर आज की डेट में तेलुगू, कन्नड़ सिनेमा के टॉप म्यूजिक कंपोजर में से एक हैं. लेकिन उन्हें ये मुकाम हासिल करने में बड़ी मेहनत करनी पड़ी. हाल ही में रवि तेलुगू फिल्म 'कल्ट' के टीजर लॉन्च इवेंट में पहुंचे थे. वहां उन्होंने फिल्म में गाने से लेकर अपनी स्ट्रगल स्टोरी फैंस के साथ शेयर की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर हर जगह वायरल है. 

स्ट्रगल याद कर इमोशनल हुए रवि बसरूर

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रवि को एक्टर-डायरेक्टर विश्वक सेन ने एक रोलेक्स घड़ी गिफ्ट देकर सरप्राइज किया, जिसके बाद वो थोड़े इमोशनल हुए. उन्होंने गिफ्ट लेने के बाद कहा, 'मेरे पास म्यूजिक बनाने का 25 साल का एक्सपीरियंस है. मैंने हमेशा अच्छे लोगों को अच्छा म्यूजिक देने की कोशिश की है. आज इस सम्मान से उन्होंने मेरी आत्मा की तारीफ की है. उन्होंने मेरे म्यूजिक के प्रति मेरी लगन की कदर की है. ये सिर्फ एक घड़ी नहीं है, ये कंपोजर्स के लिए एक इज्जत और सराहना है.'

रवि बसरूर ने आगे अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करके कहा, '18 साल की उम्र तक मैंने दो बार सुसाइड करने की कोशिश की थी. मुझे ये जिंदगी बिल्कुल नहीं चाहिए थी. लेकिन दोनों बार मैं बच गया. जिस आदमी ने मुझे दूसरी बार बचाया, उसने मेरा म्यूजिक सुना, मेरे लिए एक कीबोर्ड खरीदा और मुझे 35,000 रुपये दिए.उसी दिन मैंने अपना नाम बदलकर रवि रख लिया, क्योंकि वो आदमी का नाम रवि था, जिसने मेरी जान बचाई. उस आदमी के बाद अब विश्वक सेन हैं, जिन्होंने मुझे, मेरी पूरी जर्नी और मेरी आत्मा को पहचाना. मैं जिंदगी भर उनका आभारी रहूंगा.'

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