टीवी स्क्रीन पर अपनी एक्टिंग से ऑडियंस का दिल जीतने वाली K-ड्रामा स्टार जियोंग गा-यून की कहानी आज हर उस शख्स के लिए मिसाल है, जो मुश्किल वक्त में टूटने के बजाय लड़ना पसंद करता है. तलाक के बाद जब आर्थिक संकट आया और अकेले बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी कंधे पर आई, तो जियोंग गा-यून ने हार मानने के बजाय एक ऐसा रास्ता चुना जिसकी कल्पना शायद उनके चाहने वालों ने कभी नहीं की थी.
दरअसल एक्ट्रेस अपने शहर की एक ऐसी प्रोफ्रेशनल टैक्सी कंपनी की पहली महिला ड्राइवर बन गई हैं, जहां पिछले छह दशकों से सिर्फ पुरुषों का ही बोलबाला था.
टैक्सी ड्राइवर बनने का किया फैसला
जियोंग गा-यून की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब टीवी के काम मिलने कम हो गए और निजी जिंदगी में भी उथल-पुथल मच गई. पति से तलाक के बाद अपनी बच्ची का भविष्य संवारने और घर चलाने के लिए उन्हें पैसों की सख्त जरूरत थी. उन्होंने हाथ पर हाथ रखकर बैठने के बजाय काम की तलाश शुरू की. लेकिन उनके लिए यह बदलाव इतना आसान नहीं था. सेलिब्रेटी होने के बावजूद उन्हें टैक्सी चलाने का आइडिया आया, क्योंकि उनके पिता भी कभी इसी प्रोफेशन में थे. उनके मन में इस काम को लेकर कोई झिझक नहीं थी.
अब टैक्सी चलाने का फैसला करना एक बात थी और नौकरी पाना दूसरी. जियोंग गा-यून ने जब अलग-अलग टैक्सी कंपनियों में फोन करना शुरू किया, तो उन्हें कड़े विरोध और पुरानी सोच का सामना करना पड़ा. कई कंपनियों ने तो यह कहकर फोन काट दिया कि 'हम महिलाओं को ड्राइवर नहीं रखते' या 'हमें पार्ट-टाइम काम करने वाले नहीं चाहिए.' यह सुनकर कोई भी हिम्मत हार सकता था, लेकिन जियोंग गा-यून डटी रहीं. यह बिल्कुल उन पुरानी बॉलीवुड फिल्मों जैसा ही है, जिनमें हीरोइन को सिर्फ नौकरी पाने के लिए पूरे सिस्टम से लड़ना पड़ता है.
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें 1965 से चल रही एक पुरानी कंपनी में मौका मिला. इस कंपनी के 60 साल के इतिहास में वह पहली महिला ड्राइवर बनीं. जियोंग गा-यून के लिए इंटरव्यू का एक्सपीरिसंय भी काफी नया था. कंपनी ने उन्हें सैलरी के बारे में समझाया, जिसमें कोई भारी-भरकम डेली कोटा नहीं था बल्कि एक सुरक्षित सैलरी और बेहतर काम पर इंसेंटिव का वादा था.
वह इस नई शुरुआत से बेहद खुश हैं. अब आज वह न केवल अपना घर चला रही हैं, बल्कि एशियाई रूढ़िवादी समाज को आईना भी दिखा रही हैं जो मानते हैं कि कुछ काम सिर्फ पुरुषों के लिए बने हैं.
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