फिल्ममेकर अनिक दत्ता की मौत पर सस्पेंस, छत से गिरकर हुआ निधन, जांच में जुटी पुलिस

डायरेक्टर अनिक दत्ता बुधवार दोपहर अचानक अपने घर की छत से गिर गए. उन्हें क्रिटिकल कंडीशन में ढाकुरिया के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.

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अनिक दत्ता का हुआ निधन (Photo: Screengrab) अनिक दत्ता का हुआ निधन (Photo: Screengrab)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:56 PM IST

बंगाली सिनेमा के दिग्गज और बेबाक फिल्ममेकर अनिक दत्ता का बुधवार को रहस्यमयी हालात में निधन हो गया. दोपहर के वक्त वह अचानक अपने घर की छत से नीचे गिर गए, जिसके बाद उन्हें बेहद नाजुक हालत में ढाकुरिया के एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.

'भूतेर भभिषेक' जैसी कल्ट फिल्म बनाने वाले इस डायरेक्टर की मौत ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है. हालांकि, यह हादसा था या कुछ और, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है और उनकी मौत की असल वजह अभी भी एक बड़ी मिस्ट्री बनी हुई है.

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विज्ञापनों से की करियर की शुरुआत
एक डायरेक्टर के तौर पर अनिक दत्ता का हुनर हमेशा ही फिल्म गलियारों में चर्चा का विषय रहा. उन्हें ऐसी फिल्में पर्दे पर उतारना पसंद था, जो लीक से बिल्कुल हटकर हों और दर्शकों को कुछ नया सोचने पर मजबूर करें. अनिक जितने अपनी फिल्मों के लिए जाने जाते थे, उतने ही अपने बेबाक स्वभाव के लिए भी सुर्खियों में रहते थे. उनकी सीधी और सच्ची बातें कई बार बड़े विवादों की वजह भी बनीं. मुख्यधारा के सिनेमा में कदम रखने से पहले, अनिक दत्ता एड फिल्में (विज्ञापनों) और डॉक्यूमेंट्री बनाने का काम करते थे, जिसने उनके भीतर के फिल्ममेकर को निखारने का काम किया.

'भूतेर भभिषेक' से डेब्यू 
अनिक दत्ता ने साल 2012 में फिल्म 'भूतेर भभिषेक' से बतौर डायरेक्टर अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी. यह फिल्म रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस और दर्शकों के दिलों पर छा गई. डरावने माहौल के पीछे छिपे समाज और समय के तीखे व्यंग्य ने बंगाली सिनेमा को एक नई भाषा दी, जिसने अनिक को सबसे स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) डायरेक्टर्स की कतार में ला खड़ा किया. इसके बाद उन्होंने शीर्षेंदु मुखर्जी के मशहूर नॉवेल 'आषाढ़ी प्रदीप' पर फिल्म बनाई. साल 2017 में 'मेघनादबध रहस्य' और 2019 में 'वरुणबाबू की दोस्त' जैसी बेहतरीन फिल्में देने के बाद, साल 2025 में उनकी फिल्म 'जट कांड कोलकाता' रिलीज हुई थी.

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साल 2022 में अनिक दत्ता उस समय जबरदस्त सुर्खियों में आए, जब उन्होंने महान फिल्ममेकर सत्यजीत रे की बायोपिक 'अपराजित' बनाई. इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों ने सिर-आंखों पर बिठाया और इसे अनिक के करियर की सबसे शानदार फिल्मों में गिना गया. उनकी फिल्मों में हमेशा मध्यमवर्गीय बंगाली समाज की सोच, उनके आपसी तनाव और हल्के-फुल्के ह्यूमर की झलक साफ देखने को मिलती थी. अपने पूरे करियर में कुल आठ फिल्में डायरेक्ट करने वाले अनिक दत्ता का एक बड़ा सपना था कि वह मशहूर जासूसी किरदार 'फेलुदा' पर फिल्म बनाएं, लेकिन अफसोस कि उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया.

 

टल गई 'अपराजितो 2'
बुधवार दोपहर जैसे ही अनिक दत्ता के इस भयानक एक्सीडेंट की खबर फैली, बंगाली एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई. हादसे की खबर मिलते ही मशहूर डायरेक्टर श्रीजीत मुखर्जी और एक्टर जीतू कमल तुरंत अस्पताल पहुंचे. बताया जा रहा है कि अनिक पिछले कुछ समय से बीमार भी चल रहे थे और इसके लिए अस्पताल में एडमिट भी रहे थे. वह अपनी सुपरहिट फिल्म का अगला पार्ट यानी 'अपराजितो 2' बनाने की प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन स्क्रिप्ट और कैमरों के सजने से पहले ही डायरेक्टर इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए.

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सीएम ने किया पोस्ट
वहीं पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने भी ट्वीट कर शोक जताया है. सीएम ने लिखा, 'मशहूर फिल्मकार अनिक दत्ता के असमय निधन से गहरा दुख हुआ. बंगाली सिनेमा में उनका योगदान अमूल्य है. उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएँ. मुझे विश्वास है कि कोलकाता पुलिस इस मामले की जांच करेगी और उनकी अचानक हुई मृत्यु के पीछे के रहस्यमय कारणों का पता लगाएगी.

हादसे पर गहराया सस्पेंस, पुलिस जांच में जुटी
अनिक दत्ता की मौत के बाद अब गरियाहाट थाने की पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है. वह किन परिस्थितियों में और कैसे छत से नीचे गिरे, इस पर से अभी तक रहस्य का पर्दा नहीं हटा है. इस हादसे को लेकर फिलहाल उनके परिवार या पुलिस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या डिटेल सामने नहीं आई है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटनास्थल और हालातों की बारीकी से जांच की जा रही है. डायरेक्टर की मौत को लेकर सोशल मीडिया और गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन जांच अधिकारी किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरी जांच कर लेना चाहते हैं.
 

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