सिनेमाघरों में इस हफ्ते हॉरर फिल्मों की महफिल सजी है. जहां बॉलीवुड की तरफ से अक्षय कुमार 'भूत बंगला' लेकर आए हैं, जो हंसाने के साथ-साथ थोड़ा डराने का वादा करती है. वहीं हॉलीवुड अपनी सबसे पॉपुलर हॉरर मूवी फ्रेंचायजी 'द ममी' को रीबूट करके नए सिरे से लेकर आया है. पिछले लगभग 90 सालों से 'द ममी' मूवी सीरीज हमें मिस्र के एक ऐसे इतिहास से रूबरू करा रही है, जो अभी भी रहस्य सा बना हुआ है.
इन फिल्मों में हम ताबूतों में बंद ममी के डरावने रूप देखते हैं. साल 1999 में आई 'द ममी' फिल्म आज भी आइकॉनिक मानी जाती है. मगर डायरेक्टर ली क्रोनिन की फिल्म 'द ममी' सिर्फ उस रहस्य पर नहीं टिकी है. इसे काफी अलग ट्रीटमेंट दिया गया है, जो देखने में काफी डरावना और खूंखार है. तो कैसी है ये 'द ममी' फ्रेंचायजी की नई फिल्म? आइए, आपको बताते हैं.
क्या है ली क्रोनिन की 'द ममी' की कहानी?
फिल्म मिस्र की राजधानी कायरो से शुरू होती है, जहां एक जर्नलिस्ट चार्ली कैनन काम करता है. एक दिन उसकी 8 साल की बेटी केटी (नताली ग्रेस) को कोई औरत किडनैप करके ले जाती है, जो काला जादू जानती है. पुलिस उसे ढूंढने की पूरी कोशिश करती है, मगर कामयाब नहीं हो पाती. देखते ही देखते 8 साल का समय बीत जाता है. कैनन परिवार कायरो से मैक्सिको शिफ्ट हो जाता है, जहां केटी की मां लारिसा अपनी तीसरी बेटी को जन्म देती है.
चार्ली और उसकी फैमिली अपनी बेटी के खोने के दर्द से उबर ही रही होती है कि तभी उन्हें कायरो शहर से एक कॉल आती है. वो उन्हें उनकी खोई हुई बेटी के बारे में बताते हैं, जो उन्हें एक 3000 साल पुराने बंद ताबूत में मिली. 8 साल से गायब रही केटी पूरी तरह बदल चुकी है. डॉक्टर्स के मुताबिक, उसकी दिमागी हालत सही नहीं रही. केटी अपने परिवार के साथ मैक्सिको चली जाती है, और तभी बुरी चीजों की शुरुआत हो जाती है. जो केटी दिमागी रूप से कमजोर लग रही थी, वो असलियत में कुछ और ही है जो देखते वक्त आप अपनी आंखें बंद कर सकते हैं.
हॉरर के साथ-साथ है खूब सारा खून-खराबा
डायरेक्टर ली क्रोनिन ने अपनी फिल्म को काफी खून-खराबे से भरा बनाया है. कहानी शुरु से अपनी पकड़ बनाने लगती है. अपने स्पेशल इफेक्ट्स और बैकग्राउंड स्कोर के चलते, हॉरर और थ्रिल एलिमेंट काफी जोरदार असर करते हैं. मगर फिल्म का स्क्रीनप्ले काफी गड़बड़ सा महसूस होने लगता है. ली क्रोनिन अपनी फिल्म का असली मुद्दा सेटअप करने में काफी देर लगा देते हैं. लायला की मां केटी को क्यों किडनैप करके ले जाती है, ये बात समझने और समझाने में काफी समय लग जाता है.
यहां देखें फिल्म का ट्रेलर:
फर्स्ट हाल्फ पूरा कहानी के सेटअप में निकल जाता है. क्लाइमैक्स आते-आते चीजें काफी बिखरी हुईं नजर आती हैं. हालांकि, अंत में ये अपनी कहानी को बढ़िया नोट पर खत्म जरूर करती है जिससे आप थिएटर से निकलते वक्त संतुष्ट महसूस करते हैं. फिल्म में एक्टर्स का काम भी अच्छा है. एक्ट्रेस नताली ग्रेस ने अपने लुक और एक्टिंग से काफी डराया है. वो जब भी स्क्रीन पर आई हैं, यही सोच में डालती हैं कि अब वो क्या नया काम करेंगी.
ली क्रोनिन की फिल्म में कई सारे ऐसे सीन्स हैं, जिसे देखते वक्त आप अपनी नजरें फेर लेंगे. अगर आपका दिल कमजोर है और खून-खराबा जैसी चीजें नहीं देख सकता है, तो आप इस फिल्म को ना ही देखें तो बेहतर है. ये फिल्म सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए बनी है, जो हॉरर और जॉम्बी टाइप फिल्में देखना पसंद करते हैं. डायरेक्टर ली क्रोनिन हॉरर टाइप फिल्में बनाने में माहिर माने जाते हैं. उनकी ये नई फिल्म भी आपको निराश नहीं करेगी.
पर्व जैन