The Raja Saab Review: तंत्र-मंत्र के चक्कर में भेजा फ्राई करती है प्रभास की 'राजा साब', मूड होगा खराब

एक्टर प्रभास की नई फिल्म 'द राजा साब' का हाल भी कुछ ऐसा ही है. ये हॉरर कॉमेडी फिल्म आपके सब्र का इम्तिहान लेती है. इसमें संजय दत्त, जरीना वहाब, निधि अग्रवाल संग कई सितारों ने काम किया है. पढ़िए डायरेक्टर मारुति की फिल्म का रिव्यू.

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कैसी है प्रभास की फिल्म 'द राजा साब'? (Photo: Screengrab) कैसी है प्रभास की फिल्म 'द राजा साब'? (Photo: Screengrab)

पल्लवी

  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:51 PM IST
फिल्म:द राजा साब
0.5/5
  • कलाकार : प्रभास, संजय दत्त, जरीना वहाब
  • निर्देशक :मारुति

वो दिन कहां गए जब प्रभास बाहुबली हुआ करते थे? अब न उनकी एक्टिंग में दम बचा है और न ही उनकी फिल्मों में. न जाने क्यों प्रभास लगातार ऐसी फिल्में चुन और कर रहे हैं, जो देखने में इतनी खराब हैं कि आपका मूड ही ऑफ कर दें. एक्टर की नई फिल्म 'द राजा साब' का हाल भी कुछ ऐसा ही है. ये हॉरर कॉमेडी फिल्म आपके सब्र का इम्तिहान लेती है.

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क्या है पिक्चर की कहानी?

कहानी सिम्पल है, राजा साब उर्फ राजू अपनी दादी गंगमा उर्फ गंगा देवी (जरीना वहाब) के साथ गांव में रहता है. गंगमा को भूलने की बीमारी है, मगर एक इंसान जिसे वो कभी नहीं भूली वो है उसका पति कनकराजू (संजय दत्त). सालों पहले कनकराजू, उसे छोड़कर चला गया था. ऐसे में अब गंगमा चाहती है कि उसका पोता राजू अपने दादाजी को ढूंढकर वापस लाए. एक चीज जो दोनों ही नहीं जानते, वो ये है कि कनकराजू कोई आम शख्स नहीं बल्कि एक तंत्र-मंत्र में रमा एक मायावी शक्तियों वाला आदमी है.

अपने दादाजी की तलाश करते हुए राजू की मुलाकात उसकी जिंदगी के प्यार से होती है. कुछ हल्के-फुल्के पल बिताने के लिए उसकी जिंदगी बड़ा मोड़ लेती है और वो अपने दादा की जंगल में छिपी हवेली में जा पहुंचता है. इस हवेली के अंदर वो आ तो गया है, लेकिन इससे बाहर निकालने का कोई रास्ता नहीं है. मुश्किलें तब ज्यादा बढ़ जाती हैं, जब उसे समझ आता है कि हवेली मायावी शक्तियों से लैस है और उसकी दादी की जान को खतरा है.

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कैसी है प्रभास की फिल्म?

इस पिक्चर की कहानी कुछ हद तक पेपर पर अच्छी लगती है. डायरेक्टर मारुति ने इसे खुद लिखा है. क्या सोचकर ये समझना थोड़ा मुश्किल है. कहानी के कुछ हिस्से दिलचस्प हैं. लेकिन इसका स्क्रीनप्ले एकदम खराब है. फिल्म की एडिटिंग को बेहतर ढंग से किया जाना चाहिए था. इसके कुछ सीन्स तो यूं ही कहीं से भी आ जाते हैं. उनके आगे-पीछे कोई सिर-पैर नहीं है. फिल्म के शुरू होने से लेकर अंत तक आप उसमें सेंस ढूंढते हैं. बीच-बीच में कुछ जोक्स आपको हंसाते हैं, लेकिन आगे चलकर वो भी बंद हो जाता है. अब आप बस इंतजार कर रहे हैं कि ये फिल्म खत्म हो और आप थिएटर से बाहर निकलें. ये मूवी इतनी बोरिंग है कि इसके आगे में इंस्टा रील्स ज्यादा मजेदार लग रही थीं.

प्रभास अपने काम से आपक खास इम्प्रेस नहीं करते. इस फिल्म में उनकी परफॉरमेंस दूसरी फिल्मों जैसी ही है. प्यार में पागल आशिक, दादी का ख्याल रखने वाला पोता, भूत-प्रेत से न डरने वाला हीरो, हर रूप में उनका काम एक ऐसा ही लगता है. संजय दत्त ने इस फिल्म में अहम रोल निभाया है और उन्हें देखकर सही में मजा आता है. जरीना वहाब का काम भी ठीक है. इसके अलावा मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल, ऋद्धि कुमार जैसी हसीनाएं इस फिल्म में हैं. लेकिन उन्हें ऐसा कोई खास किरदार नहीं दिया गया, जिसपर बात हो. 'द राजा साब' का VFX डरावना कम और फनी ज्यादा है. इस मूवी को देखने से अच्छा है ठंड के दिन चल रहे हैं, इनमें घर पर सोया जाए.

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