O Romeo Review: शाहिद-तृप्ति पर 'मोहब्बत की बददुआ' ने दिखाया खूब असर, जानदार है ये वायलेंट लव स्टोरी

बॉलीवुड स्टार शाहिद कपूर की मचअवेटेड गैंगस्टर रोमांस फिल्म ओ’ रोमियो आज यानी 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. शाहिद कपूर के अलावा इसमें तृप्ति डिमरी, नाना पाटेकर भी लीड में हैं. जानिए कैसी है ये फिल्म.

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कैसी है फिल्म 'ओ रोमियो'? (Photo: ITGD) कैसी है फिल्म 'ओ रोमियो'? (Photo: ITGD)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 13 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST
फिल्म:ओ रोमियो
3.5/5
  • कलाकार : शाहिद कपूर, तृप्ति डिमरी, नाना पाटेकर और अविनाश तिवारी
  • निर्देशक :विशाल भारद्वाज

मसाले हर बार वही होते हैं- बड़ी इलायची, जायफल, दालचीनी वगैरह वगैरह. लेकिन इस्तेमाल करने वाले हाथों के साथ जैसे इनका जायका बदलता जाता है. खून-खच्चर भरा एक्शन ड्रामा, बेहतरीन गाने और लव स्टोरीज इन दिनों बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर मसाले हैं. लेकिन विशाल भारद्वाज जैसे आला दर्जे के सिनेमाई शेफ के हाथों में आकर ये मसाले एक अलग जायका देने लगेंगे इस उम्मीद में ‘ओ रोमियो’ चखने का फैसला किया गया. नतीजा ये निकला कि विशाल की ये डिश काफी जायकेदार है. 

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फ़िल्ममेकिंग के बेहतरीन जायके से भरा फर्स्ट हाफ
शाहिद कपूर को करियर का सबसे धमाकेदार इंट्रो मिलने के साथ ही ‘ओ रोमियो’ शुरू हो जाती है. शाहिद उस्तरे से हत्याएं करने वाले खूंखार गैंगस्टर उस्तरा के रोल में हैं. उनके उस्तरे में इतनी धार है कि वो शरीर से काट के आत्मा को अलग कर देता है. अपनी मर्जी से कदम थिरकाने वाले इस गैंगस्टर को सिर्फ एक ही मास्टर अपनी धुन पर नचा सकता है- खान साहब (नाना पाटेकर). खान साहब आईबी के कॉप हैं और उस्तरा की धार को क्राइम निपटाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. 

उस्तरा की लाइफ में अनसुने राग उस दिन बजने लगते हैं जब एंट्री होती है अफशां (तृप्ति डिमरी) की. अफशां सुपारी देने आई है, उस्तरा के साथी रहे खूंखार गैंगस्टर जलाल (अविनाश तिवारी) और उसके तीन साथियों की. अफशां की सुपारी के पीछे मकसद है बदला. कैसा बदला, किस बात का बदला, ये सब आप फ़िल्म में ही देखें तो ज़ायका बना रहेगा. 

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विशाल की उम्दा फ़िल्ममेकिंग पर 90s के गानों की गार्निश के साथ ‘ओ रोमियो’ का फर्स्ट हाफ काफी पैक है. कहानी को डेवलप होने, टेंशन को सीन्स में घुलने और इश्क के लफड़ा-ए-अंजाम को सेटल होने का पूरा वक्त मिलता है. जहां पेस फ़ास्ट होनी चाहिए, फ़ास्ट है. जहां स्वाद लेने के लिए थोड़ा ठहराव मिलना चाहिए, वहां ठहराव है. 

सभी एक्टर्स का काम जानदार लगता है. इंटरवल से ठीक पहले कहानी के मेन विलेन जलाल यानी अविनाश तिवारी की तगड़ी एंट्री हुई है. और कहते हैं कि विलेन की एंट्री से ही पिच्चर शुरू होती है. अब देखना है आगे क्या होता है. यहां देखें 'ओ रोमियो' का ट्रेलर:

क्रांतिकारी सेकंड हाफ में शाहिद का जलवा
‘ओ रोमियो’ का सेकंड हाफ एक तगड़े ट्विस्ट के साथ शुरू होता है. फर्स्ट हाफ में ही फिल्म का ये ब्लू-प्रिंट सेट था कि कहानी अफशां के बदले की है. लेकिन उसके इश्क में पड़ चुका उस्तरा सेकंड हाफ में जिस रंग में है, उसे उतारने के लिए शाहिद की दमदार एक्टिंग की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है. 

फर्स्ट हाफ अगर कहानी का दिल था, तो ताकत है सेकंड हाफ. यहां तक आते-आते कहानी सेट हो चुकी है और अब मामला एक्शन का है. मगर इस हिस्से में कुछ किरदारों के दमदार इंटरेक्शन हैं. कुछ तगड़े ट्विस्ट हैं और कहानी का निचोड़ है. सेकंड हाफ में तृप्ति डिमरी ने दमदार परफॉर्मेंस से बताया है कि विशाल जैसे डायरेक्टर ने उनपर भरोसा क्यों जताया है. सच है कि तृप्ति ‘ओ रोमियो’ में इतनी खूबसूरत लग रही हैं कि हर कोई उनके लिए दुनिया से जंग लड़ बैठे. मगर उनके किरदार की राइटिंग और उनकी परफॉर्मेंस आपको ये याद दिलाती रहती है कि लड़ाई अफशां की ही है, वो खुद ही लड़ रही है. 

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नाना पाटेकर जितनी बार स्क्रीन पर आते हैं, हर बार एक दिलचस्प मोमेंट ऑडियंस की जेबों में डाल जाते हैं. नेगेटिव रोल में नजर आ रहे सिंगर-एक्टर राहुल देशपांडे का किरदार और उनका काम दोनों आपको याद रहेंगे. चूंकि सेकंड हाफ में एक्शन पोर्शन ही ज्यादा है, इसलिए कुछ लोगों का ध्यान यहां थोड़ा टूट भी सकता है. मगर विशाल ने अपनी फिल्मों में एक्शन को जीतने कमाल के साथ यूज किया है उसपर अलग से बात हो सकती है. ‘ओ रोमियो’ में भी उन्होंने एक्शन को एक खूबसूरत पोएट्री बना दिया है. 

क्लाइमेक्स में स्पेन की चॉइस थोड़ी सी कन्फ्यूज करने वाली लगी क्योंकि अबतक कहानी मुम्बई की सेटिंग में बहुत ग्रिप के साथ चल रही थी. पर शायद स्केल के लिए विशाल ने ये चॉइस की. वैसे स्पेन ने क्लाइमेक्स फाइट को एक नया कलेवर तो दिया है. पर वो सबको पसंद आएगा या नहीं, इसमें शक है. 

कुल मिलाकर विशाल भारद्वाज की ‘ओ रोमियो’ एक वायलेंट लव स्टोरी है, जिसका इमोशन काफी असरदार है. शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी समेत पूरी कास्ट की परफॉर्मेंस फिल्म की जान है और म्यूजिक इसका हाई-पॉइंट है. जो थोड़ी-मोड़ी कमियां हैं वो नोटिस भले हो जाएं मगर फ़िल्म का एक्सपीरिएंस नहीं खराब करतीं.

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