Movie Review: सबके लिए नहीं है 'बार-बार देखो'

डायरेक्टर नित्या मेहरा की 'बार-बार देखो' डेब्यू फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 'लाइफ ऑफ अ पाई' और 'द रिलक्टेंट फण्डामेंटलिस्ट' जैसी फिल्मों में असिस्टेन्ट डायरेक्टर के रूप में काम किया है, क्या यह फिल्म नित्या के लिए बेहतरीन डेब्यू कहलाएगी? आइए जानते हैं इस फिल्म की समीक्षा में.

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कटरीना कैफ और सिद्धार्थ मल्होत्रा कटरीना कैफ और सिद्धार्थ मल्होत्रा

पूजा बजाज / आर जे आलोक

  • मुंबई,
  • 09 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 11:21 PM IST

फिल्म का नाम: 'बार-बार देखो'
डायरेक्टर: नित्या मेहरा
स्टार कास्ट: सिद्धार्थ मल्होत्रा, कटरीना कैफ, राम कपूर, सारिका, सयानी गुप्ता
अवधि: 2 घंटा 21 मिनट
सर्टिफिकेट: U/A
रेटिंग: 1.5 स्टार

डायरेक्टर नित्या मेहरा की डेब्यू फिल्म है, इससे पहले उन्होंने 'लाइफ ऑफ अ पाई' और 'द रिलक्टेंट फण्डामेंटलिस्ट' जैसी फिल्मों में असिस्टेन्ट डायरेक्टर के रूप में काम किया है, क्या यह फिल्म नित्या के लिए बेहतरीन डेब्यू कहलाएगी? आइए जानते हैं इस फिल्म की समीक्षा में:

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कहानी
यह कहानी दिल्ली के रहने वाले मैथ प्रोफेसर जय वर्मा (सिद्धार्थ मल्होत्रा) की है जो अपनी बचपन की दोस्त दिया कपूर के साथ रिलेशन में है और दोनों की शादी होने वाली होती है उसी पल जय को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से भी ऑफर आता है लेकिन दिया के पिता (राम कपूर) नहीं चाहते की जय विदेश जाए. जय को शादी के नाम से चिढ़ होती है, यहीं से कहानी आगे बढ़ती है और अचानक जय को अपने भविष्य में भी जाने का मौका मिलता है. जहां उसको रिलेशनशिप के असली मायने की समझ आती है. भविष्य में दिया से मिलकर जय को जिंदगी जीने का एक अलग नजरिया देखने को मिलता है. काफी ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं, जय अपने आज, कल और भवि‍ष्य को जीता है और आखिरकार फिल्म की इस कहानी को एक अंजाम मिलता है जिसका पता आप फिल्म देखकर ही लगा सकते हैं.

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स्क्रिप्ट
फिल्म की स्क्रिप्ट को एक अलग अंदाज में दर्शाने की कोशिश की गई है, फर्स्ट हाफ की कहानी दिलचस्प लगती है लेकिन इंटरवल के बाद काफी ड्रैग होने लगती है. अन्विता दत्त के लिखे हुए कुछ डायलॉग्स अच्छे हैं, लेकिन पूरी फिल्म में अच्छे लोकेशंस और इक्का दुक्का गानों के अलावा कुछ भी ऐसा नहीं है जिसके लिए आप थिएटर तक आएं और पैसे लगाकर ये फिल्म देखें. हालांकि रवि के चंद्रन की सिनेमेटोग्राफी भी कमाल की है.

अभिनय
फिल्म में कई सारी उम्र के किरदार को निभाते हुए सिद्धार्थ मल्होत्रा ने सहज अभिनय किया है, की मौजूदगी भी फिल्म में एक नया फ्लेवर भरती है. वहीं राम कपूर का किरदार काफी लाउड लगता है, बाकी सह कलाकारों का काम अच्छा है.

कमजोर कड़ी
फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है, 'आज, कल और आने वाले कल' वाला कंसेप्ट अच्छा था, लेकिन स्क्रिनप्ले बेहद कमजोर है, खास तौर से इंटरवल के बाद फिल्म उबाऊ लगने लगती है.

संगीत
काला चश्मा गाने को छोड़कर बाकी संगीत औसत है.

क्यों देखें
अगर सिद्धार्थ मल्होत्रा या के पक्के फैन हैं, तो ही ये फिल्म देखें.

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