ये ऐसा है जैसे आपने सालों पहले, अपनी टीनेज में जादू का कोई अद्भुत खेल देखा हो, जिसका असर आपके दिमाग में अब भी ताजा हो. उम्र में दो दशक जुड़ने के बाद आप समझ चुके हों कि वो जादू एक ट्रिक था, मगर आप जानना चाहते हों कि वो ट्रिक क्या थी जिसने इतने सालों से आपको अपने शिकंजे में कसे रखा. दुनिया का सबसे बड़ा स्टेज परफॉर्मर, किंग ऑफ पॉप कहे जाने वाले माइकल जैक्सन वही जादूगर थे. और उनकी बायोपिक, माइकल उनके जादू के पीछे की ट्रिक दिखाने वाली फिल्म है.
माइकल का जादू
स्टील फैक्ट्री में दिन भर घिसने वाला एक बाप, अपने पांच बेटों को एक म्यूजिक बैंड बनाने में जुटा है. इनमें सबसे छोटा माइकल, 8 साल का है और इस बैंड का लीड सिंगर है. बचपन से ही उसकी आवाज सुरों की ऊंचाई को ऐसे छूती है जैसे वो किसी दिव्य शक्ति से अकस्मात कनेक्ट हो गया हो. जब सुर लग जाते हैं तो उसका शरीर उसके काबू में नहीं रहता— पैर अपने आप मचलने लगते हैं, शरीर में हरकत आ जाती है, आंखें जैसे कुछ ऐसा देखने लगती हैं जो आम नजरों के सामने न आता हो. पर उसके पिता जोसेफ को लगता है कि स्टेज पर परफॉर्म करते हुए नजर सामने, अपने दर्शकों से मिलाना जरूरी है.
वो माइकल को आंखें सामने रखने के लिए टोकता है, पैर स्थिर रखने के लिए डांटता है. और 8 साल का ये बच्चा जब थकने के बाद प्रैक्टिस करने से इनकार करता है, तो जोसेफ उसे बेल्ट से पीटता है. मार खाकर बाथरूम के एक कोने में सिमटकर रोते माइकल की आंख से लुढ़कती आंसू की बूंद, स्टेज पर उसके जादू के पीछे की पहली ट्रिक है.
माइकल की कहानी इन दो चीजों के बीच आगे बढ़ती है. लाइफ के अलग-अलग स्टेज पर जोसेफ उस पिंजड़े की तरह नजर आता है, जिसके चंगुल से माइकल उड़ निकलना चाहता है. 10 साल की उम्र में जब जोसेफ के बेटों के बैंड, जैक्सन 5 को धमाकेदार पॉपुलैरिटी मिलती है. म्यूजिक कंपनी की एजेंट, गाने रिकॉर्ड करने वाले साउंड रिकॉर्डिस्ट और आम पब्लिक ने इस कामयाबी का ताज माइकल के सिर पर सजा दिया है. लेकिन जोसेफ अपने बेटों और माइकल को पैसे छापने की मशीन में बदलने से बाज नहीं आने वाला.
माइकल अपने पिता के डर में जी रहा, खोया-खोया रहने वाला दब्बू बच्चा है. उसकी मां उसे कहती है कि उसे अपनी उम्र के कुछ दोस्त बनाने चाहिए, उनके साथ खेलना-कूदना चाहिए. माइकल का जवाब खट्ट से आपके दिल में आकर लगेगा और सन्न छोड़ देगा— बाकी बच्चे मेरे साथ खेलने की बजाय, ऑटोग्राफ लेने लगते हैं, तस्वीरें खिंचाने लगते हैं. यंग माइकल जैक्सन बने जैक्सन क्रू वाल्डी की आंखें, बचपन के उस खालीपन को बहुत असरदार तरीके से आपतक पहुंचाती हैं.
बचपन की कमी को ये बच्चा अपने पेट्स दोस्तों से पूरा करता है. एक चूहा, अजगर, जिराफ़ और चिम्पैंज़ी आपको माइकल की जिंदगी में आते दिखते हैं. माइकल बड़ा होता है तो जाफ़र जैक्सन (माइकल जैक्सन के रियल भतीजे) इस किरदार में नजर आते हैं. जफर इतने ज्यादा माइकल जैसे दिखते हैं कि आप उन्हें अलग एक्टर समझ ही नहीं पाते. ऐसा लगता है मानो माइकल ही अपनी बायोपिक में एक्टिंग कर रहे हैं.
इधर आप माइकल की जिंदगी में बेशुमार दौलत आते देखते हैं. जैक्सन परिवार का पूरा एस्टेट इसी से तैयार हुआ है. माइकल के सोलो एल्बम, म्यूजिक चार्ट्स में टॉप पर हैं. मगर जोसेफ अभी भी माइकल की अलग पहचान को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं है. मगर उस दब्बू माइकल में एक दिन हिम्मत आती है, उसका बॉडीगार्ड बिल उसे सपोर्ट करता है. माइकल जॉन ब्रैंका को मैनेजर रखता है, अपने पिता को अपने मैनेजर के रोल से बर्खास्त करता है. पर क्या इससे माइकल को अपने पिता से आजादी मिल जाएगी?
इस कहानी के बीच आप माइकल को नाक की सर्जरी कराते देखते हैं. उसका एक्सीडेंट देखते हैं जिसमें उसके बाल जल जाते हैं, वो मरते-मरते बचता है. मगर जोसेफ को यही चिंता है कि माइकल फिर परफॉर्म कर पाएगा या नहीं. यही फिल्म का मेन कनफ्लिक्ट है. क्लाइमैक्स में माइकल इसी से उबरता है. इस बीच आप माइकल को उसके सबसे ज्यादा पॉपुलर गानों पर परफॉर्म करते देखते हैं— बिली जीन, थ्रिलर, बीट इट. आप माइकल को पहली बार मून-वॉक करते देखते हैं, जिसकी परफेक्ट नकल किए बिना आज भी किसी को डांसर नहीं माना जाता. यहां देखें माइकल का ट्रेलर:
कहां कमजोर पड़ती है माइकल?
माइकल में सबसे बेहतरीन मोमेंट्स माइकल की परफॉरमेंस के हैं. आप फिर से वो जादू जीते हैं, जिसमें एक पूरी पीढ़ी जवान हुई है. माइकल के कॉन्सर्ट में लड़कियां बेहोश होकर गिर रही हैं, लोग ऑटोग्राफ के लिए पागल हुए जा रहे हैं. दूसरी तरफ वो मोमेंट हैं जहां माइकल की आत्मा का अकेलापन, उसके बंधे हुए पंख आपको हिट करते हैं. मगर फिर भी फिल्म में कुछ मिसिंग लगता है. चूंकि माइकल बहुत कम बातचीत करता दिखता है इसलिए उसकी सोच स्क्रीन पर खुलकर नहीं सामने आ पाती.
फिल्म में माइकल आपको अपने करीबियों की नजर से तो दिखता है. मगर आपको माइकल की नजर से दुनिया नहीं दिखती. जोसेफ की हरकतों पर आपको माइकल से सिंपथी खूब होगी, लेकिन एक व्यक्ति के तौर पर वो आप में कुछ इंस्पायर नहीं करता. उससे रिलेट करना थोड़ा मुश्किल है, सेलिब्रेट करना बहुत आसान. शायद इसी वजह से माइकल में ड्रामा के कुछ पोर्शन थोड़े खिंचे लगते हैं, जबकि फिल्म का रनटाइम केवल 2 घंटे 10 मिनट है. मगर ये दिक्कतें आपको माइकल का जादू फ़ील करने से नहीं रोकतीं.
वैसे सोशल मीडिया पर माइकल की एक शिकायत खूब चल रही है कि ये माइकल जैक्सन के विवादों को नहीं छूती. मगर माइकल की कहानी 1966 से 1988 के बीच सेट है और तब तक वो ऐसे किसी विवाद में थे भी नहीं. माइकल खत्म होती है तो स्क्रीन पर लिखा आता है कि 'उसकी कहानी अभी जारी है'. ये सीक्वल के हिंट जैसा है. माइकल के विवादों का फैसला कोर्ट कर चुका है और अब वो दुनिया में भी नहीं हैं.
माइकल जैक्सन के म्यूजिक और डांस ने इस धरती की एक बहुत बड़ी जनसंख्या पर बहुत असर छोड़ा है. और बायोपिक्स का पहला मकसद उस व्यक्ति को सेलिब्रेट करना होता है, जिसकी कहानी दिखाई जा रही है. माइकल जैक्सन के रियल भतीजे जाफ़र जैक्सन ने उन्हें स्क्रीन पर जिंदा कर दिया है. माइकल के मैनेजर रहे जॉन ब्रैंका फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर्स में से एक हैं. जैक्सन फैमिली के कई लोगों का नाम फिल्म के प्रोड्यूसर्स की लिस्ट में है.
कभी एक पॉपुलर कॉमेडियन ने बहुत काम की लाइन कही थी- किसी का जादू नहीं खराब करना चाहिए. स्पष्ट है कि ये माइकल के उस जादू को सेलिब्रेट करने वाली फिल्म है जो आजतक लोगों के जेहन में जिंदा है. अब दुनिया इतनी समझदार तो हो ही चुकी है कि जादू को कोई दिव्य खेल समझने की बजाय, उसे ट्रिक्स का खेल समझने लगी है. फिर भी लोग जादू के खेल से सम्मोहित होते हैं. इसलिए नहीं कि वो भोले या नासमझ हैं, बल्कि इसलिए कि ये उन्हें उनकी रियलिटी से मुक्त होने के कुछ मिनट देता है. इंग्लिश में इसे एसकेपिज़्म कहते हैं, हिंदी में पलायनवाद.
फिल्में और एंटरटेनमेंट आपको यही बेचते हैं. माइकल जैक्सन से बड़ा एंटरटेनर अभी तक तो और कोई नहीं हुआ. स्क्रीनप्ले की कुछ कमियों के बावजूद, माइकल उस एंटरटेनर की कहानी को, उसके ट्रेडमार्क जादू के साथ स्क्रीन पर उतारने में पूरी तरह कामयाब है. और टिकट खरीदने की चॉइस तो हमेशा आपके हाथ में ही होती है!
सुबोध मिश्रा