'द केरल स्टोरी 2' की बढ़ीं मुश्किलें, सर्टिफिकेशन पर उठे सवाल, फिल्म की रिलीज पर रोक की मांग

'द केरल स्टोरी 2' फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलने के बाद केरल राज्य में बवाल शुरू हो गया है. हाई कोर्ट में फिल्म के खिलाफ याचिका दायर की गई है, जिसमें ये साफ लिखा गया है कि केरल की छवि को फिल्म में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है.

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'द केरल स्टोरी 2' पर विवाद (Photo: IMDb) 'द केरल स्टोरी 2' पर विवाद (Photo: IMDb)

शिबिमोल

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:12 AM IST

फिल्ममेकर विपुल अमृतलाल शाह और डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह अपनी फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' को लेकर फिर विवादों से घिर चुके हैं. इसकी कहानी और फिल्म में केरल राज्य की दिखाई गई छवि पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे झूठा प्रोपगेंडा फैलाने वाली फिल्म कहा. अब मूवी के खिलाफ केरल हाई कोर्ट में अपील हुई है. 

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'द केरल स्टोरी 2' पर शुरू हुआ विवाद

'द केरल स्टोरी' अपने पहले पार्ट की ही तरह लव-जिहाद और धर्म परिवर्तन जैसे कुछ गंभीर मुद्दों को दर्शकों के सामने पेश करती है. इसमें कुछ हिंदू लड़कियां केरल राज्य से दिखाई जाती हैं, जिनके साथ मुसलमान लड़के शादी करके उनका धर्म बदल देते हैं. 'द केरल स्टोरी 2' के ट्रेलर में भी यही दिखाया जाता है. हालांकि इस बार कहानी सिर्फ केरल की ही नहीं, बल्कि राजस्थान और मध्य प्रदेश से भी दिखाई जाएगी. 

गुरुवार के दिन फिल्म को सेंसर बोर्ड से U/A सर्टिफिकेट भी मिला, जिसपर फिल्म के डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह ने अपना रिएक्शन दिया था. उनका कहना था कि इस फिल्म को सभी परिवार अपनी बहन बेटियों के साथ जरूर देखें. लेकिन अब फिल्म की रिलीज को लेकर मुसीबतें बढ़ने वाली हैं. 

बढ़ी 'द केरल स्टोरी 2' की मुश्किलें

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केरल हाई कोर्ट में श्रीदेव नमबोधरी नाम के एक शख्स ने फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' के खिलाफ याचिका दायर की है. उनका कहना है कि फिल्म का टीजर देखकर उनका दिल बहुत दुखी हो गया और उनकी अंतरात्मा को झटका लगा, क्योंकि ये केरल राज्य को बहुत बुरे तरीके से दिखाती है. 

याचिकाकर्ता ने आगे ये भी कहा, 'टीजर में तीन लड़कियों की कहानी दिखाई गई है, जो केरल, मध्य प्रदेश और राजस्थान से है. ये लड़कियां आतंकवादियों के जाल में फंस जाती हैं, जो प्यार का हथियार इस्तेमाल करके अविवाहित लड़कियों का धर्म बदलवाते हैं और देश की जनसंख्या बदलने की कोशिश करते हैं. टीजर में ये किरदार कैमरे की तरफ देखकर कई ऐसी बातें कहते हैं, जो पूरे देश में कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकती हैं और झगड़े पैदा कर सकती हैं. मुझे बहुत तकलीफ इस बात से है कि फिल्म का नाम द केरल स्टोरी है, जिससे लगता है कि ये सारी कहानियां, चाहे सच हों या बनावटी, सिर्फ केरल में ही हो रही हैं.'

याचिकाकर्ता की क्या है मांग?

याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने ये पेश किया, 'टीजर में तो दूसरे राज्यों की कहानियां भी दिखाई गई हैं, फिर भी इसे केरल की कहानी कहा जा रहा है. ऐसा लगता है जैसे ये सब बुराई केरल से ही शुरू हुई और फिर बाकी जगहों पर फैली. ऐसा दिखाने से पूरे केरल के लोगों को बदनाम किया जा सकता है, समाज में शांति भंग हो सकती है, और अलग-अलग धर्मों या इलाकों के बीच नफरत और झगड़े बढ़ सकते हैं.'

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श्रीदेव नमबोधरी की हाई कोर्ट से मांग है कि फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' की रिलीज पर रोक लगा दी जाए, जो 27 फरवरी 2026 को होने वाली है. या फिर कोर्ट केंद्र सरकार को आदेश दे कि वो याचिकाकर्ता की रिवीजन याचिका पर जल्दी फैसला करे, और तब तक फिल्म की रिलीज रोक दी जाए. केरल हाई कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन और फिल्म के प्रोड्यूसर को नोटिस जारी कर दिया है. केस की अगली सुनवाई 24 फरवरी को होगी.

नेताओं ने भी जताई नाराजगी

'द केरल स्टोरी 2' पर सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े नेताओं ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है. कांग्रेस के नेता शशि थरूर और CPI प्रमुख पी संदोष कुमार ने फिल्म पर नफरत फैलाने की बात कही है. CPI प्रमुख ने कहा, 'ये लोग हमारी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. केरल एक अलग तरह का राज्य है, जो पूरे भारत और दुनिया में भाईचारे और अमन के लिए जाना जाता है. यहां लगभग 52% हिंदू हैं, करीब 20% मुसलमान हैं. केरल में कोई सांप्रदायिक झगड़ा नहीं होता. ये कोई फिल्म नहीं है, बल्कि संघ परिवार की केरल के खिलाफ बदनामी फैलाने वाली प्रोपगेंडा है.'

वहीं शशि थरूर ने कहा, 'पहली फिल्म 'द केरल स्टोरी' नफरत फैलाने वाली फिल्म थी. उसमें कोई सच्चाई नहीं थी. वो कह रहे थे कि हजारों लोग जबरन धर्म बदलवा रहे हैं, लेकिन ये सच नहीं है. मुझे लगता है कई सालों में बस 30 के आसपास ऐसे मामले हुए होंगे. हमारा देश बहुत बड़ा है. अगर यहां-वहां एक-दो घटना हो जाए, तो उससे पूरा बड़ा मुद्दा नहीं बनाना चाहिए और उसका इस्तेमाल प्रोपगेंडा के लिए नहीं करना चाहिए. ऐसी बातें कहकर लोगों के मन में नफरत फैलाने का क्या फायदा, वो भी जब बातें गलत ही हों? बचपन में हम अमर अकबर एंथोनी जैसी फिल्में देखते थे, जिन्हें एंटरटेनमेंट टैक्स में छूट मिलती थी.'

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