रणबीर कपूर की रामायण के टीजर पर दोनों तरह के रिस्पॉन्स खूब आ रहे हैं. किसी को रामायण का स्केल और रणबीर के राम पसंद आ रहे हैं, तो कोई इसके VFX और ग्राफिक्स वाली स्टोरीटेलिंग से खफा है. मगर एक बात तय है कि नमित मल्होत्रा की रामायण, इंडिया का सबसे बड़ा फिल्म प्रोजेक्ट है. लेकिन अब डायरेक्टर नितेश तिवारी ने रामायण के बारे में कई ऐसी बातें बताई हैं जो फिल्म के लिए भरोसा जगाने वाली हैं.
नितेश ने कई ऐसे सवालों के जवाब दिए हैं, जो रामायण का टीजर देखकर फिल्म पर डाउट करने वाली जनता के दिमाग में हैं. उन्होंने कहानी के ट्रीटमेंट, और VFX से भरी फिल्म में इमोशन्स को बैलेंस करने पर बात की. पहली बार इतना बड़ा प्रोजेक्ट संभाल रहे नितेश ने बताया कि रामायण के लिए उन्होंने शूट पर जाने से पहले इतनी तैयारी की जिससे बाद का काम आसान हो गया.
रामायण को फिल्म बनाने में कितनी क्रिएटिविटी ली?
रामायण जैसे प्रोजेक्ट से जनता को सबसे बड़ा डर यही होता है कि उनकी भावनाओं और आस्था के साथ खेल न हो जाए. हॉलीवुड पोर्टल कोलाइडर के साथ बातचीत में नितेश ने बताया कि उन्होंने रामायण में कहां क्रिएटिविटी ली और कहां नहीं. नितेश ने कहा कि भारत में रामायण के 300 वर्जन हैं. एक क्रिएटर के रोल में आपको पता होता है कि आप क्या कर सकते हैं क्या नहीं. इसमें गलती का कोई चांस नहीं है.
'हमने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि जहां हम कोई क्रिएटिव चेंज नहीं कर सकते, वहां हमने कोशिश भी नहीं की. और जहां भी हमें लगा कि यहां क्रिएटिव बदलाव के लिए थोड़ी जगह है, वहीं हमने कोशिश की है. ये बैलेंस हमने बनाकर रखा है. रामायण में मेरी खुद बहुत आस्था रही है. मेरा पैरामीटर यही रहा है कि अगर कहीं पर कोई क्रिएटिव चॉइस मेरी अपनी आस्था को आहत नहीं कर रही, तो मुझे विश्वास है कि जनता भी उसे दिल खोलकर स्वीकार करेगी' नितेश ने कहा.
स्पेक्टेकल और इमोशन्स का बैलेंस
नितेश ने कहा कि इमोशन्स शुरुआत से ही उनकी इस कहानी का सेंटर रहे हैं. रामायण हमेशा से संबंधों और लोगों में वैल्यूज की, नैतिकता की, सिद्धांतों की कहानी है. विजुअल स्पेक्टेकल यानी शानदार सीन्स का काम इसे और खूबसूरत, प्रेजेंटेबल बनाना है. ताकि लोग एक नई रोशनी में वही कहानी देख सकें जो उन्हें पहले से पता है.
'इसीलिए हम इतनी लार्ज स्केल विजुअल प्रेजेंटेशन में लेकर आ रहे हैं ताकि लोग अयोध्या और लंका को उस तरह देख सकें जैसे उन्होंने पहले नहीं देखा है. इन शानदार विजुअल्स के साथ हम उन्हें वही कहानी दिखाने वाले हैं जिसके इमोशन्स उन्हें इतने लंबे समय से एंगेज करते आए हैं. मैंने अपने जीवन में यही सीखा है कि अगर किरदार और कहानी के इमोशन सही जगह हैं, तो बाकी सब चीजें अपनी-अपनी जगह खुद सेट हो जाती हैं' ये बात कहते हुए नितेश का कॉन्फिडेंस, उनकी फिल्म के प्रति जनता का विश्वास बढ़ाएगा.
कितने रियल सेट और कितनी ब्लू स्क्रीन?
रामायण एक हाई VFX प्रोजेक्ट है, ये शुरू से तय था. मगर आदिपुरुष जैसे अनुभव के बाद जनता को VFX बेस्ड फिल्म में, रामायण जैसी कहानी के आने से टेंशन भी होती है. इस टेंशन को दूर करते हुए नितेश ने कहा कि उन्होंने सेट पर जाने से पहले बहुत लंबी और डिटेल्ड तैयारी की थी.
ग्रीन स्क्रीन पर शूट करते वक्त भी चाहे एक्टर्स हों या टेक्नीशियन, या असिस्टेंट डायरेक्टर्स की टीम... सबको पता था कि वो क्या शूट करने जा रहे हैं. सिनेमैटोग्राफी टीम को पता था कि वो शॉट कैसे फ्रेम करने वाले हैं क्योंकि सारे सीन्स का प्री-विजुअलाइजेशन पहले से तैयार था.
'हम पूरी तरह रेडी होकर शूट में उतरे थे जिससे बहुत फायदा हुआ. स्टोरीबोर्ड से लेकर कैमरा यूसेज तक सब पहले ही क्लियर होने से बहुत फायदा हुआ था' नितेश ने बताया.
उन्होंने खुद भी रामायण पर काम करते हुए बहुत कुछ सीखा. नितेश ने कहा, 'मैं बता नहीं सकता कि मुझ पर कितनी कृपा रही है. मुझे समझ आया कि VFX डायरेक्टर्स को कैसे नए पंख दे रहा है, नई ऊंचाई दे रहा है. नमित (प्रोड्यूसर) ने मुझे कहा था कि आप किसी भी चीज की चिंता न करें, आपको बस ये सोचना है कि आप कहानी कैसे कहना चाहते हैं. तकनीक ने डायरेक्टर्स को यही आजादी दी है, उन्हें बस सही से सोचना है और सब पॉसिबल हो जाता है'.
रामायण पर नितेश तिवारी ने इस इंटरव्यू में जो कुछ कहा उससे एक बात स्पष्ट होती है कि उनकी और उनकी टीम का दिल इस प्रोजेक्ट में एकदम सही जगह पर है. भारी VFX वाली फिल्मों में ये अक्सर होता है कि फाइनल फिल्म आने तक काम चलता ही रहता है और असली क्वालिटी बड़े पर्दे पर ही पता लगती है. अब देखना है कि टीजर के बाद, रामायण से नया प्रोमो क्या आएगा और जनता से उसे कैसा रिस्पॉन्स मिलेगा.
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