बॉलीवुड एक्टर राजीव खंडेलवाल अपनी बेबाकी और चुनिंदा काम के लिए जाने जाते हैं. हाल ही में उन्होंने एक ऐसे प्रोजेक्ट के बारे में खुलकर बात की, जो दिग्गज डायरेक्टर संजय लीला भंसाली का था. लेकिन एक्टर ने डायरेक्टर के सामने एक शर्त रख दी, जिसके बाद क्या हुआ. जानिए
एक्टर राजीव खंडेलवाल ने हाल ही में संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन में बने लंबे समय से रुके हुए प्रोजेक्ट 'चिनाब गांधी' में अपने रोल के बारे में बात की. एक्टर ने बताया कि यह प्रोजेक्ट कैसे बना, लेकिन आखिर में बन नहीं पाया.
राजीव खंडेलवाल ने क्या कहा?
50 साल के एक्टर ने बताया कि उन्हें आमतौर पर कमर्शियल सिनेमा पसंद नहीं आता, लेकिन 'चिनाब गांधी' अपनी जबरदस्त स्क्रिप्ट और भंसाली के रोल की वजह से एक खास एक्सेप्शन थी. पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में, एक्टर ने कहा, 'मुझे एक कमर्शियल डायरेक्टर ने साइन किया था. मैं उनके साथ दो फिल्मों की डील में था, लेकिन वह फिल्म कभी चली नहीं. वही अकेली कमर्शियल फिल्म थी जो मैंने साइन की थी. यह कमर्शियल लग रही थी क्योंकि इसे एक कमर्शियल फिल्ममेकर डायरेक्ट कर रहा था, लेकिन स्क्रिप्ट उन कुछ अच्छी स्क्रिप्ट में से एक थी जो मैंने पढ़ी हैं. लेकिन वह फिल्म कभी बनी नहीं. मैं 'चिनाब गांधी' की बात कर रहा हूं. मैंने स्क्रिप्ट की वजह से फिल्म साइन की थी.'
भंसाली के साथ काम करने के मौके के बावजूद, खंडेलवाल ने साफ किया कि स्क्रिप्ट ही उनका मेन मकसद थी. उन्होंने कमिट करने से पहले शर्तें रखीं, और अगर स्क्रिप्ट से कनेक्ट नहीं हुआ तो पीछे हटने का अधिकार अपने पास रखा.
एक्टर ने क्या शर्त रखी?
एक्टर ने आगे अपनी शर्त बताते हुए कहा, 'उस समय, मैंने भंसाली से यह भी कहा कि आप मेरा टेस्ट करें, और आप मुझे बताएं कि आप मुझे चाहते हैं. उसके बाद आप मुझे स्क्रिप्ट मांगने की आजादी दें और मुझे ना कहने की भी आजादी दें. आप जो चाहें करें – स्क्रीन टेस्ट और लुक टेस्ट, लेकिन एक दिन आप कहेंगे, 'राजीव, मुझे तुम चाहिए'. उसके बाद मैं स्क्रिप्ट पढ़ूंगा, और मुझे हां या ना कहने का भी अधिकार होगा.'
'उन्होंने इसकी रिस्पेक्ट की, और वह मुझसे 15-20 दिनों तक मिलते रहे. उसके बाद मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी, और मैं हिल गया था. मैंने अपनी जिंदगी में ऐसी स्क्रिप्ट कभी नहीं पढ़ी थी. मैं इसे करने के लिए मान गया. सेट अप की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि स्क्रिप्ट ऐसी थी.'
चिनाब गांधी के बारे में
खबर है कि चिनाब गांधी को खान अब्दुल गफ्फार खान, जिन्हें फ्रंटियर गांधी के नाम से भी जाना जाता है, पर फोकस करते हुए एक बायोग्राफिकल ड्रामा के तौर पर प्लान किया गया था. फिल्म के यूनिक सब्जेक्ट और भंसाली के प्रोजेक्ट को डायरेक्ट करने की वजह से इसका बहुत इंतजार था. हालांकि, यह प्रोजेक्ट आखिरकार बंद कर दिया गया.
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