जहां शूट हुआ DDLJ का क्लाइमैक्स ट्रेन सीन, 32 साल बाद वहां पहुंचे अनुपम खेर, सरकार से की खास अपील

बॉलीवुड एक्टर अनुपर खेर हमेशा ही कुछ न कुछ वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर करते रहते हैं. अब हाल ही में एक्टर 32 साल बाद उसी स्टेशन पर पहुंचे,जहां DDLJ का क्लाइमैक्स शूट हुआ था.

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अनुपम खेर की सरकार से मांग (Photo: x/@AnupamPKher) अनुपम खेर की सरकार से मांग (Photo: x/@AnupamPKher)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:40 PM IST

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो वक्त के साथ पुरानी नहीं, बल्कि और भी हसीन हो जाती हैं. 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' (DDLJ) उन्हीं में से एक है. हाल ही में इस फिल्म के दिग्गज एक्टर अनुपम खेर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो शेयर करते ही एक्टर ने महाराष्ट्र सरकार से बड़ी मांग भी कर डाली.

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अनुपम खेर 32 साल के लंबे अंतराल के बाद महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित आप्टा रेलवे स्टेशन पहुंचे. यह वही ऐतिहासिक स्टेशन है, जहां फिल्म का वह मशहूर क्लाइमैक्स शूट हुआ था, जिसमें शाहरुख खान (राज) चलती ट्रेन से हाथ बढ़ाकर काजोल (सिमरन) को खींच लेते हैं. 

अनुपम खेर ने शेयर किया वीडियो
अनुपम खेर ने अपनी इस यात्रा का अनुभव शेयर करते हुए लिखा कि तीन दशकों के बाद उसी जमीन पर कदम रखना उनके लिए किसी जादू से कम नहीं था. उन्होंने बताया कि जब वे आप्टा स्टेशन पर खड़े थे, तो उन्हें बिल्कुल भी महसूस नहीं हुआ कि फिल्म की शूटिंग को इतना लंबा समय बीत चुका है. उनके लिए मानो वक्त ठहर सा गया था. उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि जब 1995 में वे इस सीन की शूटिंग कर रहे थे, तब यूनिट के किसी भी सदस्य ने यह कल्पना नहीं की थी कि यह सीन भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और यादगार पलों में शुमार हो जाएगा.

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एक्टर ने आगे लिखा, 'उस वक्त शूटिंग करते हुए कभी सोचा भी नहीं था कि शाह रुख खान और काजोल का वह दृश्य भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार पलों में शामिल हो जाएगा. लेकिन शायद जिंदगी की खूबसूरती भी यही है… आपको उस पल की महानता का एहसास बहुत बाद में होता है.'

राज्य सरकार से की मांग
अनुपर खेर ने महाराष्ट्र सरकार से मांग करते हुए लिखा, 'मेरी दिल से इच्छा है कि महाराष्ट्र सरकार इस जगह को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे. दुनिया भर में फिल्मों की ऐसी लोकेशन्स लोगों के लिए यादों और भावनाओं का हिस्सा बन जाती हैं. हमारे यहां भी सिनेमा की इस विरासत को उसी सम्मान के साथ सहेजना चाहिए. जादू सिर्फ फिल्मों में नहीं होता… कुछ जगहों में भी बस जाता है. यश चोपड़ा जी की गर्मजोशी, सादगी, उदारता, रिश्तों को बनाये रखने के एहसास और उनकी पंजाबी झप्पियों को बहुत बहुत मिस किया.'

बता दें कि साल 1995 में आदित्य चोपड़ा के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म आज भी उतनी ही नई और प्रासंगिक लगती है. तीन दशक बीत जाने के बाद भी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' का क्रेज हर पीढ़ी के दर्शकों के सिर चढ़कर बोलता है.

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