अमिताभ बच्चन साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, अपने करीबी दोस्त और इंदिरा गांधी के बेटे राजीव गांधी के समर्थन में कांग्रेस पार्टी से जुड़ गए. राजीव गांधी के कहने पर उन्होंने इलाहाबाद सीट से चुनाव लड़ा और भारी बहुमत से जीत हासिल की. लेकिन उनका राजनीतिक करियर ज्यादा लंबा नहीं चला, क्योंकि बोफोर्स घोटाले में उनका नाम आने के बाद उन्होंने 1987 में इस्तीफा दे दिया.
अमिताभ को नहीं छोड़नी चाहिए थी राजनीति!
हाल ही में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और सीनियर पत्रकार राजीव शुक्ला ने अमिताभ बच्चन के राजनीतिक सफर पर बात की. उन्होंने कहा कि अगर अमिताभ ने राजनीति बीच में नहीं छोड़ी होती, तो वो इसमें भी बड़ा नाम बन सकते थे.
राजीव शुक्ला ने ANI से बातचीत में कहा- जैसे किसी भी नेता पर हमले होते हैं, वैसे ही उन पर भी हुए. वीपी सिंह ने खास तौर पर उन्हें निशाना बनाया था. बोफोर्स केस के बाद वो बहुत परेशान और दुखी हो गए थे. उस समय मैंने उनके समर्थन में कई लेख लिखे और उनसे अक्सर मिलता भी था.
उन्होंने आगे कहा कि अगर अमिताभ राजनीति में बने रहते, तो वो एक मजबूत नेता साबित होते. उस समय वो ‘मैं आजाद हूं’, ‘शहंशाह’ और ‘तूफान’ जैसी फिल्मों की शूटिंग भी कर रहे थे. ये उनके लिए काफी तनाव भरा दौर था, इसलिए उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला किया. लेकिन मुझे आज भी लगता है कि अगर वो इस्तीफा न देते और वीपी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ते, तो वो फिर भी जीत जाते.
जया ने लगाई मिनिस्टर्स की डांट
राजीव शुक्ला ने जया बच्चन के बारे में भी बात की और कहा कि वो बहुत सख्त और अनुशासित नेता हैं. समाजवादी पार्टी से जुड़ी जया बच्चन राज्यसभा की सदस्य हैं. उन्होंने कहा- अगर उन्हें लगे कि कोई जरा भी अनुशासन तोड़ रहा है, तो वो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करतीं. वो सामने वाले के मुंह पर साफ बात कह देती हैं. संसद में भी वो कई बार मंत्रियों या चेयरमैन को डांट चुकी हैं. अगर उन्हें कुछ गलत लगता है, तो वो बेखौफ होकर बोलती हैं.
राजीव शुक्ला ने बताया कि जया बच्चन संसद की कार्यवाही में नियमित रूप से शामिल होती हैं और फिल्मी सितारों में उनकी उपस्थिति सबसे बेहतर मानी जाती है. उन्होंने कहा- रेखा जी हर सेशन में सिर्फ एक बार ही संसद आती थीं. वहीं जया प्रदा पूरी तरह राजनीति में उतर चुकी हैं, बस उन्हें अभी ज्यादा मौके नहीं मिले हैं. वो मेहनत कर रही हैं. रेखा राजनीति में नहीं थीं, उनका कार्यकाल खत्म होते ही बात भी खत्म हो गई.
राजीव शुक्ला ने आगे कहा- रेखा और सचिन तेंदुलकर ने सांसद बनने के बाद सरकारी घर तक नहीं लिया, जबकि लता मंगेशकर ने तो संसद सदस्य को मिलने वाली कोई भी सुविधा नहीं ली. न उन्होंने MPLADS का पैसा लिया और न ही सरकारी घर या टिकट स्वीकार किया था.
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