उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से ही सियासी गोटिंया सेट की जाने लगी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पश्चिम यूपी के बाद पूर्वांचल में अपनी 'सोशल इंजीनियरिंग' को मजबूत करने के लिए समाजवादी पार्टी की महिला सभा की कमान बलिया की रहने वाली सीमा राजभर उर्फ भावना को सौंपी गई है.2027 के चुनाव से पहले सीमा राजभर की नियुक्त को काफी अहम माना जा रहा है.
अखिलेश यादव ने सीमा राजभर के जरिए राजभर वोटों को साधने का दांव माना जा रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थ गहरे हैं. सीमा राजभर के जरिए सपा ने पहली चोट ओम प्रकाश राजभर की दी है, लेकिन इस भी ज्यादा बड़े जख्म देने की प्लानिंग अखिलेश कर रखी है.
समाजवादी पार्टी समय का इंतजार कर रही है और 2027 के चुनाव से पहले ओम प्रकाश राजभर को तगड़ा झटका देने की रणनीति है. माना जा रहा है कि 2027 अक्टूबर में अखिलेश यादव सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर को सियासी तौर पर गहरा झटका दे सकते हैं, जिसकी स्क्रिप्ट तक लिखी जा चुकी है.
राजभर से अखिलेश करेंगे हिसाब बराबर
उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़े थे. राजभर और अखिलेश यादव की जोड़ी पूर्वांचल के कई जिलों में हिट रही थी, खासकर आजमगढ़, गाजीपुर, मऊ, आंबेडकर नगर और जौनपुर जिले की विधानसभा सीटों पर. बीजेपी इन जिलों में सपा से पीछे रह गई थी. इसके बाद राजभर ने सपा से अलग राह पकड़ ली.
विधानसभा चुनाव के बाद ओम प्रकाश राजभर ने सपा से गठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ हाथ मिला लिया और योगी सरकार में मंत्री बन गए. इसके बाद से अखिलेश यादव ने राजभर से हिसाब बराबर करने की प्लानिंग की, ये उसी तरह से है, जिस तरह 2019 के बाद मायावती के गठबंधन तोड़ने के बाद बसपा को झटका दिया था. अखिलेश ने बसपा के तमाम विधायकों को अपने साथ मिलाकर चोट दी थी, अब उसी फॉर्मूले पर राजभर को चोट देने का प्लान बनाया है.
राजभर को सपा देगी सिय़ासी गहरी चोट
अखिलेश यादव ने अभी ओम प्रकाश राजभर की पार्टी से आईं सीमा राजभर को पार्टी की महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है. इस फैसले का ऐलान खुद जूही सिंह ने किया. सीमा राजभर सिर्फ ओपी राजभर की पार्टी सुभासपा से ही ताल्लुक नहीं रहा बल्कि राजभर के गृह जनपल बलिया से आती हैं. सुभासपा के बलिया की महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं.
2022 विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने मंत्री राजभर और उनके बेटे अरविंद राजभर पर महिलाओं के शोषण और पार्टी में परिवारवाद का आरोप लगाकर सपा का दामन थाम लिया था. इसके सपा ने उन्हें छात्र सभा का राष्ट्रीय सचिव बनाया था और अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सीमा को सीधे महिला सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर बड़ा दांव चला. अब सपा अक्टूबर में राजभर को गहरी चोट देने की भी प्लानिंग कर रखी है.
राजभर के विधायक क्या सपा में होंगे शामिल
2022 में सुभासपा के छह विधायक सपा के समर्थन से जीतकर आए थे, जिनमें से तीन विधायक सपा के बैकग्राउंड वाले हैं. इसके अलावा एक विधायक अब्बास अंसारी हैं, जो मुख्तार अंसारी के बेटे हैं. अंसारी परिवार का सपा के साथ रिश्ते मजबूत है, जिसके चलते अब्बास अंसारी सियासी पाला बदल सकते हैं. इसके अलावा जगदीश नारायण राय हैं, जो जौनपुर के जफराबाद से विधायक हैं.
जगदीश नारायण बसपा से लेकर सपा तक में रहे हैं. 2022 में सपा के कोटे से ही सुभासपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और विधायक बनने में सफल रहे. सुभासपा के एक दलित विधायक हैं, जो राजभर के खिलाफ बागी तेवर अपना रखा है. 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में भी सुभासपा के तीन विधायकों की क्रॉस वोटिंग की बात सामने आई थी, जिसमें जगदीश नारायण राय भी शामिल थे.
माना जा रहा है कि अखिलेश 2027 के चुनाव से पहले सुभासपा के कई विधायकों को अपने साथ मिला सकते हैं, जिसकी स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है. अखिलेश यादव कई बार कह चुके हैं कि जिस चाह लूंगा राजभर अपनी पार्टी में अकेले विधायक बचेंगे. इससे साफ जाहिर है कि अखिलेश यादव ने पहले ही प्लान कर रखा है, लेकिन अपने पत्ते अभी नहीं खोल रहे हैं.
राजभर वोटों में सेंधमारी का सपा प्लान
अखिलेश यादव सिर्फ राजभर की पार्टी के नेताओं को ही अपने साथ मिलाकर चोट नहीं देना चाहते हैं बल्कि उनकी पार्टी के सियासी आधार राजभर समाज को भी अपने साथ जोड़ने की है. 2001 की सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट के अनुसार राजभरों की आबादी करीब 2.40 फीसदी है. राजभर समाज पूर्वांचल की अंबेडकर, आजमगढ, मऊ, देवरिया, श्रावस्ती, बहराइच, संतकबीर नगर, बस्ती, गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, चंदौली आदि जिले की तीन दर्जन सीटों पर उनका प्रभावी असर है.
राजभर समाज के वोटों के बदौलत ही ओम प्रकाश राजभर सत्ता की मलाई खाने में जुटे हैं, लेकिन अब सपा उनके इसी मजबूत दांव पर चोट करने की तैयारी में है. 2024 में सपा ने राजभर समाज से आने वाले रामशंकर राजभर को सलेमपुर से लोकसभा सांसद बनाने में सफल रहे. रामशंकर इन दिनों राजभर बहुल इलाके में घूम घूमकर सपा के पक्ष में माहौल बनाने और ओम प्रकाश राजभर को कोसने का काम कर रहे हैं. इसके अलावा अब सीमा राजभर भी ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ आक्रमक रुख अपना रखा है. इस तरह राजभर वोटों को साधने का सपा दांव माना जा रहा है?
कुबूल अहमद