पालक्कड़ सीटः वाम के गढ़ को दरकाने की कोशिश कर रहे कांग्रेस-बीजेपी

पालक्कड़ लोकसभा सीट वामपंथी दलों का गढ़ है, हालांकि कांग्रेस और बीजेपी यहां अपनी जड़े मजबूत करने की लगातार कोशिश में हैं. इस सीट पर अब तक नौ बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा कैंडिडेट जीत चुके हैं. दो बार भाकपा और चार बार कांग्रेस कैंडिडेट जीते हैं.

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कम्युनिस्टों का गढ़ है पालक्कड़ सीट (फोटो: पीटीआई) कम्युनिस्टों का गढ़ है पालक्कड़ सीट (फोटो: पीटीआई)

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

पालक्कड़ शहर केरल की राजधानी त्रिवेंद्रम से करीब 350 किलोमीटर दूर सालेम-कन्याकुमारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर है.  पालक्कड़ लोकसभा क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं-कोंगड़, मन्नरक्कड़, मलमपुड़ा, पालघाट, ओत्तपलम, शोरानुर और पत्तम्बी. यह संसदीय सीट वामपंथी दलों का गढ़ है, हालांकि कांग्रेस और बीजेपी यहां अपनी जड़े मजबूत करने की लगातार कोशिश में हैं.

साल 1957 में यहां पहली बार हुए चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा के पी.के. कुनहान जीते थे. इस सीट पर अब तक नौ बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा कैंडिडेट जीत चुके हैं. दो बार भाकपा और चार बार कांग्रेस कैंडिडेट जीते हैं.

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साल 2014 में माकपा कैंडिडेट एमबी राजेश 1,05,300 वोटों से जीते थे. उन्हें कुल 4,12,897 वोट मिले थे. सोशलिस्ट जनता (डेमोक्रेटिक) पार्टी के एमपी वीरंेद्र कुमार को 3,07,597 वोट मिले. बीजेपी की शोभा सुरेंद्रन को 1,36,541 वोट मिले. नोटा (छव्ज्।) बटन 11,291 लोगों ने दबाया. साल 2009 के चुनाव में भी एमबी राजेश जीते थे. उन्हें तब 3,38,070 वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के सतीशन पछेनी को 3,36,250 वोट मिले थे. आम आदमी पार्टी के बी. पद्मनाभन को 4,933 वोट मिले थे. शिवसेना के एस. राजेश को 2,654 वोट और बहुजन समाज पार्टी के हरी अरुमबिल को 2009 वोट मिले थे.

खेती है आमदनी का मुख्य स्रोत

पालक्कड़ मध्य केरल का एक जिला है जिसका मुख्यालय पालक्कड़ शहर है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक इस जिले की जनसंख्या 28,09,934 थी, जिसमें से 13,59,478 पुरुष और 14,50,456 महिलाएं हैं. इस जिले का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 1067 महिलाओं का है. जिले में 66.76 फीसदी हिंदू और 28.93 फीसदी मुस्लिम हैं. जिले की साक्षरता दर 89 फीसदी है. जिले के लोगों में आमदनी का मुख्य स्रोत खेती ही है. पालक्कड़ संसदीय क्षेत्र में साल 2014 के चुनाव में कुल 12,08,758 मतदाता थे, जिनमें से 5,87,379 पुरुष और 6,21,379 महिलाएं थीं.

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क्षेत्र की राजनीति में दिलचस्प मोड़ यह है कि अब शरद यादव की लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) वामपंथी खेमे यानी एलडीएफ में शामिल हो गई है. राज्य के प्रभावशाली अखबार मातृभूमि डेली के चेयरमैन और राज्यसभा के पूर्व सांसद एमपी वीरेंद्र कुमार एलजेडी बनने से पहले जेडी (यू) के प्रमुख थे. उनके नेतृत्व में जेडी(यू) का एक धड़ा राज्य में अब भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ में है. लेकिन एमपी वीरेंद्र कुमार अब राज्यसभा में चले गए हैं. एलजेडी के साथ से माकपा को वडाकारा, वायनाड और कोझिकोड जैसे कई संसदीय सीटों पर फायदा होगा. 2014 में इन तीनों सीटों पर कांग्रेस जीती थी.  माकपा समझौते के तहत एलजेडी को वडाकारा या वायनाड सीट दे सकती है.

बीजेपी के लिए प्राथमिकता

स्थानीय मीडिया के अनुसार, बीजेपी ने हाल में एक राष्ट्रीय एजेंसी से सर्वे कराया है, जिसके मुताबिक कासरगोड़ और पालक्कड़ सीट को पार्टी ने अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है. कांग्रेस भी वामपंथियों के इस गढ़ के लिए किसी मजबूत कैंडिडेट की तलाश में है. हालांकि पार्टी को यह आभास है कि इस सीट पर लड़ाई उसके लिए बहुत मुश्किल होगी.

युवा सांसद का संसद में अच्छा रहा प्रदर्शन

47 साल के युवा सांसद एमबी राजेश पिछले दो बार से सांसद हैं. उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी है. उन्होंने इकोनाॅमिक्स में एमए और एलएलबी किया है. वे पेशे से वकील रहे हैं. संसद में उनकी उपस्थिति करीब 83 फीसदी रही है. उन्होंने 565 सवाल पूछे हैं और 214 बार बहस और अन्य विधायी कार्यों में हिस्सा लिया है. पिछले पांच साल में सांसद एमबी राजेश को सांसद निधि के तहत कुल 19.51 करोड़ रुपये मिले जिसमें से उन्होंने 17.69 करोड़ रुपये खर्च किए.

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