ब्रह्मपुर विधानसभा सीट: यहां 30 साल से नहीं जीत पाई कांग्रेस, पारंपरिक सीट पर करना चाहेगी वापसी

ये विधानसभा सीट सामान्य श्रेणी में आती है और 1951 में ही अस्तित्व में आ गई थी. शुरुआती दो दशक में इस विधानसभा में कांग्रेस का ही दबदबा रहा, बीच में एक चुनाव में कांग्रेस को झटका लगा लेकिन फिर वापसी भी की.

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क्या कांग्रेस के खाते में आएगी जीत? क्या कांग्रेस के खाते में आएगी जीत?

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:59 PM IST
  • बिहार में बढ़ी चुनावी हलचल
  • तीन चरणों में होंगे चुनाव

बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो गई है, अब दस नवंबर को नतीजों का इंतजार है. बिहार की ब्रह्मपुर विधानसभा सीट पर इस बार 28 अक्टूबर को वोट डाले गए, यहां कुल 54.37 फीसदी मतदान हुआ.

ब्रह्मपुर विधानसभा सीट पर अभी राष्ट्रीय जनता दल का कब्जा है. लेकिन भारतीय जनता पार्टी भी यहां अपना दम दिखाती रही है, ऐसे में इस बार जब लड़ाई आर-पार की है तो चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद है.

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कौन है उम्मीदवार?
•    शंभू नाथ यादव – राजद
•    हुलास पांडे – लोजपा
•    जयराज चौधरी – विकासशील पार्टी
•    जटाधारी – बहुजन समाज पार्टी

मतदान की तिथि – पहला चरण, 28 अक्टूबर

क्या कहता है सीट का राजनीतिक इतिहास?
ये विधानसभा सीट सामान्य श्रेणी में आती है और 1951 में ही अस्तित्व में आ गई थी. शुरुआती दो दशक में इस विधानसभा में कांग्रेस का ही दबदबा रहा, बीच में एक चुनाव में कांग्रेस को झटका लगा लेकिन फिर वापसी भी की. यहां 1990 में कांग्रेस को आखिरी जीत नसीब हुई. 1990 के बाद से ये सीट एनडीए और राजद के पास ही रही है. पिछले चुनाव में राजद ने भाजपा को मात दी थी. 

क्या कहता है यहां का समीकरण?
इस क्षेत्र पर भूमिहार, यादव और ब्राह्मण वोटरों का दबदबा है. लेकिन अति पिछड़ा वर्ग के वोटरों की भी बड़ी संख्या है. ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच इसी समीकरण को साधने की चुनौती रहती है, जिसका फायदा कई बार राजद को मिला है. इस विधानसभा क्षेत्र में करीब तीन लाख वोटर हैं, जिनमें से 1.55 लाख वोटर पुरुष हैं. 

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2015 में क्या रहे थे नतीजे?
पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर राष्ट्रीय जनता दल को जीत हासिल हुई थी. राजद के शंभूनाथ यादव को करीब 95 हजार वोट मिले थे, जबकि भाजपा के विवेक ठाकुर 63 हजार वोटरों पर ही सिमट गए थे. पिछले चुनाव में राजद और जदयू का एक साथ होना भाजपा के लिए घाटे का विषय रहा. लेकिन इस बार समीकरण उलट गए हैं.

स्थानीय विधायक के बारे में
राष्ट्रीय जनता दल के नेता शंभूनाथ यादव इस सीट पर पहली बार चुनाव जीते हैं. राजनीति में आने से पहले 1983 से लेकर 2009 तक वो बिहार पुलिस में बतौर कॉन्स्टेबल काम कर चुके हैं. जिसके बाद उन्होंने राजनीति का रुख किया और राजद का हिस्सा बने. स्थानीय विधायक का नाम गेहूं की कालाबाजारी में आ चुका है, लेकिन शंभू नाथ यादव ने इसे सिर्फ राजनीतिक मामला बताया था. 


    
 

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