मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों पर विस्तृत जानकारी दी. पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग की टीम राज्य में मौजूद है, जहां उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों से मुलाकात की और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की. सीईसी ने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की बहुत गहराई से पैठ है, यहां मतदान प्रतिशत लगातार बहुत ऊंचा रहता है. राज्य के कुल मतदाता फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और उरुग्वे के बराबर हैं. साथ ही उन्होंने एसआईआर के पीछे के उद्देश्य के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आयोग का मुख्य उद्देश्य एक शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना है ताकि कोई भी पात्र मतदाता न छूटे.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने संबोधन में बंगाल की महान विभूतियों को याद किया. उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और राष्ट्रीय गान रवींद्रनाथ टैगोर (बोस) की देन है.
कानून-व्यवस्था से तय होंगे इलेक्शन के चरण
उन्होंने अपील की कि बंगाल का चुनाव उत्सव उसका गौरव है और इसे हिंसा व दबाव से मुक्त होना चाहिए. उन्होंने भरोसा जताया कि इस बार प्री-पोल और पोस्ट-पोल हिंसा नहीं होगी. आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव कितने चरणों में होंगे, ये राज्य की कानून-व्यवस्था की तैयारी पर निर्भर करेगा.
वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए खास सुविधा
उन्होंने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए इस बार कई विशेष इंतजाम किए गए हैं. वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए मतदान आसान बनाया जाएगा. सभी बूथों पर पीने का पानी, रोशनी और बिजली की व्यवस्था होगी.
ईवीएम (EVM) पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो होगी और किसी भी बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे. घर-घर जाकर वोटर स्लिप बांटी जाएगी और हर दो घंटे में वोटिंग प्रतिशत की जानकारी दी जाएगी. इसके अलावा, महिलाओं द्वारा संचालित विशेष मतदान केंद्र भी बनाए जाएंगे, ताकि महिला भागीदारी बढ़े.
अधिकारियों को चेतावनी
ज्ञानेश कुमार ने सरकारी अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि कोई भी अधिकारी किसी राजनीतिक दल या नेता के लिए काम नहीं करेगा. सभी एजेंसियों को कानून का शासन सुनिश्चित करने और पूरी निष्पक्षता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया है.
साथ ही मतदाता सूची में तार्किक विसंगतियों (LD) को लेकर उन्होंने कहा कि बंगाल में कई अनसुलझे मामले थे, जिसके लिए माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए थे.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार न्यायिक अधिकारी 60 लाख मतदाताओं की पात्रता पर फैसला ले रहे हैं, जिसकी अंतिम सूची 28 फरवरी को आ चुकी है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि राज्य सरकार ने आयोग को आश्वासन दिया है कि चुनाव पूरी तरह से हिंसा और किसी भी तरह के डर से मुक्त होंगे.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राजनीतिक आरोपों का जवाब नहीं देता है, उसका पूरा ध्यान केवल निष्पक्ष चुनाव पर है. यदि किसी नागरिक का नाम अभी भी सूची में नहीं है तो वो फॉर्म 6 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
आयोग का मानना है कि एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रही है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होगी.
अनुपम मिश्रा