केंद्र सरकार सीमावर्ती गांवों के विकास को नई रफ्तार देने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज शुक्रवार को असम के कछार जिले के नथानपुर गांव से ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम 2.0’ (VVP-2.0) का औपचारिक शुभारंभ करेंगे. यह गांव भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित है और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल 2025 को ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II’ को केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में मंजूरी दी थी. वित्तीय वर्ष 2028-29 तक इस योजना पर कुल 6,839 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय भूमि सीमाओं से सटे रणनीतिक गांवों का व्यापक और समग्र विकास करना है.
सीमावर्ती गांवों को मिलेगा नया आधार
VVP-2.0 के तहत अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश), लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश), मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के उन ब्लॉकों के गांवों को शामिल किया जाएगा जो अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित हैं. पहले चरण में उत्तरी सीमा से लगे गांवों पर फोकस था, जबकि दूसरे चरण में भारत-बांग्लादेश समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है.
सरकार का मानना है कि सीमा से सटे गांव केवल सुरक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक और सामाजिक स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होते हैं. ऐसे गांवों को सड़क, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और आजीविका से जोड़कर पलायन रोकना और स्थानीय भागीदारी बढ़ाना इस योजना का प्रमुख लक्ष्य है.
नथानपुर क्यों है खास?
कछार जिले की काटीगोराह तहसील में स्थित नथानपुर गांव अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण प्रशासनिक और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से अहम है. बांग्लादेश सीमा के नजदीक होने के कारण यहां सीमा सुरक्षा बल की सक्रिय मौजूदगी रहती है. नियमित गश्त और निगरानी के साथ स्थानीय समन्वय के जरिए सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है.
अब इसी गांव से VVP-2.0 की लॉन्चिंग कर केंद्र सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सीमावर्ती विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा साथ-साथ चलेंगे. योजना का उद्देश्य इन गांवों को स्ट्रैटेजिक विलेज के रूप में विकसित करना है, ताकि स्थानीय आबादी विकास की मुख्यधारा से जुड़ते हुए सुरक्षा तंत्र का भी मजबूत आधार बने.
समझें VVP-1 की पृष्ठभूमि
पहले चरण में 15 फरवरी 2023 को ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-I’ को मंजूरी दी गई थी. इसके तहत अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में स्थित 662 सीमावर्ती गांवों को चिन्हित किया गया था. इस चरण के लिए 4,800 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के 455, हिमाचल प्रदेश के 75, सिक्किम के 46, उत्तराखंड के 51 और लद्दाख के 35 गांवों को शामिल किया गया. इन क्षेत्रों में सड़क, दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और आजीविका सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया. ‘वन विलेज-वन प्रोडक्ट’ और कौशल विकास को भी बढ़ावा दिया गया.
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