केरल विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) को बड़ा झटका लगा है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अगुवाई वाली 21 मंत्रियों की टीम में से 13 मंत्री चुनाव हार गए, जिससे सत्ता में रही सरकार को बड़ा नुकसान हुआ है. हालांकि खुद मुख्यमंत्री के साथ कुछ ही मंत्री जीत बचा पाए, जिनमें के राजन, जी आर अनिल, के एन बालगोपाल, पी प्रसाद और साजी चेरियन शामिल हैं. बाकी कई बड़े चेहरे इस चुनाव में हार गए.
सबसे चर्चित हार स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज की रही, जिन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार एबिन वार्की ने करीब 19 हजार वोटों से हरा दिया. वहीं देवस्वम मंत्री वी एन वासवन भी अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में हार गए.
शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी को तिरुवनंतपुरम की नेमोम सीट पर बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर से कड़ी टक्कर मिली, लेकिन अंत में उन्हें करीब 3500 वोटों से हार का सामना करना पड़ा.
2001 से लगातार जीतने वाले हारे
परिवहन मंत्री के बी गणेश कुमार, जो 2001 से लगातार जीतते आ रहे थे, इस बार पहली बार चुनाव हार गए. इसी तरह उद्योग मंत्री पी राजीव, स्थानीय स्वशासन मंत्री एम बी राजेश और उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु जैसे कई बड़े नाम भी हार की लिस्ट में शामिल रहे.
खेल मंत्री वी अब्दुरहीमान को भी भारी अंतर से हार झेलनी पड़ी. कुल मिलाकर, इस बार केरल में एलडीएफ के लिए नतीजे काफी निराशाजनक रहे और विपक्षी यूडीएफ को इसका साफ फायदा मिला.
राज्य में 9 अप्रैल को हुए एक चरण के मतदान में 78.27 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था. केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं. केरल की 16वीं विधानसभा के लिए वोटिंग हुई. सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 71 सीटों की आवश्यकता होती है.
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