तमिलनाडु की राजनीति में TVK को कांग्रेस के समर्थन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने कांग्रेस के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी के कोषाध्यक्ष डी.आर. बालू ने इसे खुला विश्वासघात करार दिया. उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी द्वारा जारी बयान ने उनके छिपे हुए चरित्र को उजागर कर दिया है.
डी.आर. बालू ने याद दिलाया कि जब भी कांग्रेस किसी कठिन परिस्थिति में रही, DMK हमेशा एक करीबी दोस्त की तरह उसके साथ खड़ी रही. इसके लिए पार्टी ने भारी कीमत भी चुकाई, लेकिन उसे खुशी-खुशी स्वीकार किया. कांग्रेस नेतृत्व के साथ पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ गहरी दोस्ती रही है.
वहीं राहुल गांधी के साथ भी व्यक्तिगत रूप से करीबी संबंध रहे. बालू के मुताबिक, राहुल गांधी अक्सर कहते थे, "एकमात्र राजनीतिक नेता जिसे मैं भाई कहता हूं, वो स्टालिन हैं." उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कांग्रेस द्वारा गठबंधन तोड़ने की बात सुनी, तो उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई. कांग्रेस पूरी तरह दूसरी तरफ चली गई है. उसने पांच विधायकों को भी खतरे में डाल दिया है.
इन विधायकों ने धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के तहत बहुमत वाली सीटों पर चुनाव जीता था. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने इस फैसले को नीतिगत आवरण में पेश कर रही है, मानो उसने कोई बड़ा राजनीतिक या कूटनीतिक कदम उठाया हो. यह दरअसल अवसरवादिता को बढ़ावा देने की कोशिश है. DMK सरकार को समर्थन देने वालों के लिए विश्वासघात है.
बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह भाजपा कई राज्यों में सत्ता तक पहुंचने के लिए टेढ़े-मेढ़े रास्ते अपनाती रही है, कांग्रेस ने तमिलनाडु में भी वैसा ही किया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को जिसे चाहे, उसे समर्थन देने का अधिकार है, लेकिन वोट देने वाले लोगों के प्रति ईमानदार रहना ही सच्ची राजनीतिक नैतिकता है.
डी. आर. बालू ने पुराने सियासी पलों को याद करते हुए कहा कि जब कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर घोषित करने में हिचकिचा रही थी, तब DMK नेता एम.के. स्टालिन ने उन्हें आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था. DMK गठबंधन ने दो चुनावों में राहुल गांधी का समर्थन किया और शानदार जीत हासिल करते हुए देश में सबसे ज्यादा सांसद संसद में भेजे.
उन्होंने कहा कि DMK एक ऐसा आंदोलन है, जो संसद के अंदर और बाहर, सिद्धांतों और भावनाओं दोनों स्तरों पर अपने सहयोगियों के साथ खड़ा रहा है. बालू ने कहा, "हार हमारे लिए कोई नई बात नहीं है. विश्वासघात भी हमारे लिए कोई नई बात नहीं है. लेकिन हम यह भी जानते हैं कि ये चीजें हमेशा के लिए नहीं होतीं. वक्त ही बताएगा.'' इस बयान से नई बहस छिड़ गई है.
aajtak.in