तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले एक नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है. तमिलगा वेट्टई कझगम यानी TVK के MLA श्रीनिवास सेतुपति ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाईकोर्ट ने उन्हें सदन में वोट देने और कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोक दिया है.
यह पूरा मामला विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें TVK उम्मीदवार श्रीनिवास सेतुपति ने DMK नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन को सिर्फ एक वोट से हराया था. अब उसी चुनाव नतीजे को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है. मद्रास हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच ने मंगलवार को यह अंतरिम आदेश जारी किया.
जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी और जस्टिस एन. सेंथिल कुमार की बेंच ने सेतुपति को विधानसभा की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोक दिया, जिसमें बुधवार को प्रस्तावित फ्लोर टेस्ट भी शामिल है. यह आदेश DMK के पूर्व मंत्री और चुनाव में पराजित उम्मीदवार के.आर. पेरियाकरुप्पन की याचिका पर दिया गया.
पेरियाकरुप्पन ने अदालत में दावा किया कि शिवगंगा जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 185 के लिए भेजा गया एक पोस्टल बैलेट वेल्लोर जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 50 में पहुंच गया था. संबंधित अधिकारियों ने उस पोस्टल बैलेट को रिटर्निंग अधिकारी तक भेजने के बजाय सीधे खारिज कर दिया.
पेरियाकरुप्पन ने कोर्ट से मांग की थी कि इस गड़बड़ी की पूरी जांच होने तक श्रीनिवास सेतुपति को विधायक के तौर पर कार्य करने से रोका जाए. चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि नियमों के मुताबिक, यदि पोस्टल बैलेट से जुड़ी शिकायत मतगणना शुरू होने के बाद आती है, तो उस पर कार्रवाई की नहीं होती.
आयोग ने यह भी कहा कि कोई भी पोस्टल बैलेट दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में ट्रांसफर नहीं हुआ था. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पेरियाकरुप्पन की शिकायत के समर्थन में पर्याप्त आधार मौजूद हैं. इसके बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए श्रीनिवास को विधायक के तौर पर सदन की कार्यवाही में भाग लेने से रोक दिया.
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला सेतुपति की चुनावी जीत को रद्द करने के लिए नहीं है, बल्कि मामले की पूरी सुनवाई होने तक की अंतरिम व्यवस्था है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पोस्टल बैलेट से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं. वीडियो फुटेज भी संरक्षित रखा जाए.
इस मामले की मुख्य सुनवाई 20 मई को होनी तय है. लेकिन उससे पहले फ्लोर टेस्ट को लेकर यह आदेश तमिलनाडु की राजनीति में हलचल बढ़ाने वाला साबित हुआ. हाईकोर्ट के आदेश के तुरंत बाद TVK विधायक श्रीनिवास सेतुपति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
वरिष्ठ वकील डॉ. ए.एम. सिंघवी ने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश के सामने उठाया. CJI ने मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी है. ऐसे में अब फ्लोर टेस्ट से पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अहम सुनवाई होने की संभावना है.
अनीषा माथुर