तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के आंकड़े राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं. एक्सिस माय इंडिया के अनुमानों के अनुसार, अभिनेता विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) इस बार सबसे बड़ा उलटफेर कर सकती है, जिसे 98 से 120 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है.
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ DMK को 92 से 110 सीटों के साथ कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है, जबकि राज्य की दूसरी प्रमुख शक्ति रही AIADMK महज 22 से 32 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है. विजय की पार्टी का यह प्रदर्शन न केवल द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक समीकरणों को हिला रहा है, बल्कि उन्हें सत्ता की चाबी सौंपने की स्थिति में भी खड़ा कर रहा है.
इन आंकड़ों ने राज्य में त्रिशंकु विधानसभा की आशंका पैदा कर दी है, क्योंकि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) मिलता नहीं दिख रहा है. जहां एक तरफ TVK और DMK के बीच कांटे की टक्कर है, वहीं AIADMK के कमजोर प्रदर्शन ने मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय बना दिया है. यदि ये अनुमान नतीजों में बदलते हैं, तो तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए नए राजनीतिक गठबंधनों का दौर शुरू हो सकता है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि 'किंगमेकर' की भूमिका निभाने वाले दल किस तरफ झुकते हैं या राज्य में सत्ता का नया केंद्र कौन बनता है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 एग्जिट पोल के आंकड़े यहां चेक करें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार आजादी के बाद का सबसे अधिक 84% से ज्यादा रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया. 23 अप्रैल को एक ही चरण में हुई वोटिंग के दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं में भारी उत्साह दिखा.
अगर पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2021 की बात करें, तो 10 साल के लंबे अंतराल के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK गठबंधन ने शानदार वापसी की थी. उस समय कुल 234 सीटों में से द्रमुक गठबंधन ने 159 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जिसमें अकेले द्रमुक को 133 सीटें मिली थीं.
यह भी पढ़ें: Kerala Exit Poll 2026: केरल का किंग कौन, लेफ्ट की होगी हैट्रिक या कांग्रेस मारेगी बाजी, थोड़ी देर में एग्जिट पोल
वहीं, अन्नाद्रमुक (AIADMK) गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा और वह केवल 75 सीटों पर सिमट गया था. पिछले चुनाव में द्रमुक को लगभग 45% वोट शेयर मिला था, जबकि अन्नाद्रमुक को करीब 39% वोट प्राप्त हुए थे. 2021 के उन परिणामों ने तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि के बाद के युग में स्टालिन को एक निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित कर दिया था.
पिछले 50 सालों में तमिलनाडु की राजनीति पर दो क्षेत्रीय द्रविड़ दलों द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का दबदबा रहा है.
aajtak.in