तमिलनाडु में होने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस ने बड़ी बैठक की. इसमें टॉप लीडरशिप ने कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती को फटकार लगाई. ये फटकार उनके बयानों को लेकर लगी, जिनकी वजह से तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के बीच तनाव पैदा हो रहा है. मीटिंग में कांग्रेस के कुछ सांसदों और विधायकों ने टॉप लीडरशिप को साफ संदेश दिया कि गठबंधन से पहले डीएमके से पॉवर शेयरिंग को लेकर बात कर लेनी चाहिए. ये मीटिंग करीब 4.30 घंटे चली.
शनिवार को मीटिंग के बाद पार्टी ने कहा कि उसके नेतृत्व ने सभी चिंताओं पर ध्यान दिया है और सही वक्त पर फैसला लेगा.
कांग्रेस ने राज्य के नेताओं को अनुशासन बनाए रखने और चुनाव रणनीति से संबंधित मामलों पर सोशल मीडिया सहित किसी भी तरह के बयान देने से परहेज करने की चेतावनी भी दी.
ये बैठक इंदिरा भवन मुख्यालय में हुई थी. इसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की. पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी, एआईसीसी महासचिव संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल, तमिलनाडु के एआईसीसी प्रभारी गिरीश चोडनकर, राज्य कांग्रेस प्रमुख के सेल्वापेरुन्थागई भी इसमें शामिल हुए थे.
X पर एक पोस्ट में, खड़गे ने कहा, 'हमने तमिलनाडु के अपने नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. हमें विश्वास है कि तमिलनाडु के लोग आरएसएस-भाजपा की कट्टरता, सांप्रदायिकता, संघ-विरोधी और भेदभावपूर्ण राजनीति के बजाय समानता, सामाजिक न्याय, सशक्तिकरण और सुशासन को चुनेंगे.'
बैठक के बाद वेणुगोपाल ने पत्रकारों को बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने तमिलनाडु के नेताओं के साथ सामूहिक बैठक की और साथ ही व्यक्तिगत रूप से भी उनसे मुलाकात की.
वेणुगोपाल ने कहा, 'नेतृत्व ने सभी नेताओं की बात धैर्यपूर्वक सुनी. नेताओं को अपने विचार खुलकर व्यक्त करने का पूरा मौका दिया गया.'
वेणुगोपाल ने कहा कि बैठक में सर्वसम्मति से खड़गे और गांधी को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है.
उन्होंने आगे कहा कि हाईकमान ने सभी नेताओं को अनुशासन बनाए रखने और इन मामलों पर सोशल मीडिया सहित किसी भी तरह के बयान देने से परहेज करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है.
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि नेताओं को अटकलों से बचने और पार्टी के फैसलों के अनुरूप एक स्वर में बोलने की सलाह दी गई है.
चुनाव से पहले डीएमके के साथ पॉवर शेयरिंग समझौते की मांग करने वाले राज्य नेताओं के बारे में पूछे जाने पर, वेणुगोपाल ने कहा कि नेतृत्व ने नेताओं की चिंताओं को सुना है और सभी बातों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा.
सत्ता में हिस्सेदारी पर हो रही रस्साकशी
यह बैठक पार्टी की तमिलनाडु इकाई की तरफ से इस मांग के बीच हो रही है कि अगर डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन इस साल मार्च-अप्रैल तक होने वाले विधानसभा चुनाव जीतता है तो उसे सत्ता में हिस्सेदारी दी जाए.
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने हाल ही में कहा था कि 'सत्ता में हिस्सेदारी' पर चर्चा का वक्त आ गया है.
तमिलनाडु के लिए कांग्रेस पार्टी के प्रभारी गिरीश चोडंकर ने कहा था कि अगर कोई राजनीतिक दल यह कहे कि उसे सत्ता नहीं चाहिए, तो हमें खुद को एनजीओ का नाम दे देना चाहिए.
DMK का रुख साफ- स्टालिन पॉवर शेयरिंग के खिलाफ
हालांकि, गठबंधन सरकार की संभावना को खारिज करते हुए, डीएमके के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के मंत्री आई पेरियासामी ने इस सप्ताह जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन सहयोगियों के साथ सत्ता साझा करने के खिलाफ अपने रुख पर अडिग हैं.
एक्टर विजय से भी कांग्रेस को आस?
कांग्रेस की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी अभिनेता से राजनेता बने विजय की नवगठित टीवीके पार्टी के साथ गठबंधन पर भी विचार कर सकती है, लेकिन राज्य इकाई के नेताओं ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है.
1967 से लेकर अब तक, डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ने ही अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने के बावजूद अपनी-अपनी सरकारें बनाई हैं.
स्वतंत्रता के बाद, जब 1952 में तत्कालीन संयुक्त मद्रास राज्य में पहला आम चुनाव हुआ, तो कांग्रेस पूर्ण बहुमत हासिल करने में विफल रही. प्रथम विधानसभा के कार्यकाल (1952-57) के दौरान यह एकमात्र ऐसा समय था जब कॉमनवील पार्टी के मणिकवेलु नाइकर सहित गैर-कांग्रेसी नेताओं को कांग्रेस के नेतृत्व वाले राज्य मंत्रिमंडल में जगह मिली.
2006 में, डीएमके के पास भी पूर्ण बहुमत नहीं था, फिर भी उसने कांग्रेस सहित अपने सहयोगियों के समर्थन से और सहयोगियों के साथ सत्ता साझा किए बिना पूरे पांच वर्षों (2006-11) तक सरकार चलाई. राज्य कांग्रेस नेताओं ने डीएमके के 2006-11 के कार्यकाल के दौरान भी यही 'हमारे साथ सत्ता साझा करें' की मांग रखी थी, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने शुक्रवार को तमिलनाडु में सत्ता में हिस्सेदारी की पार्टी की मांग का बचाव करते हुए कहा कि हर राजनीतिक दल शासन में भूमिका निभाने की आकांक्षा रखता है.
राहुल गौतम