तमिलनाडु: विजय की एंट्री से किसे नफा और किसे नुकसान, बीजेपी गठबंधन के लिए क्यों बेताब?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज हो सकता है. इस दौरान 5 राज्यों के चुनाव कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा भी संभव है. तमिलनाडु की राजनीति अब तक एआईएडीएमके और डीएमके के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है, लेकिन इस बार सुपरस्टार थलापति विजय की एंट्री ने राजनीति को नया मोड़ दे दिया है.

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सुपर स्टार थलापति विजय की सियासी एंट्री से द्रविड़ राजनीति कुछ लचीली हुई है. (File photo) सुपर स्टार थलापति विजय की सियासी एंट्री से द्रविड़ राजनीति कुछ लचीली हुई है. (File photo)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 3:01 PM IST

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए रविवार को तारीखों का ऐलान हो सकता है. निर्वाचन आयोग ने चार बजे प्रेस कॉफ्रेंस बुलाया है, जिसमें पांच राज्यों का औपचारिक रूप से घोषणा हो सकती है. तमिलनाडु की राजनीति अभी तक एआईएडीएमके और डीएमके के बीच ही सिमटी रही है, लेकिन इस बार अभिनेता से नेता बने सुपर स्टार थलापति विजय की सियासी एंट्री से द्रविड़ राजनीति कुछ लचीली हुई है.

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राज्य के मतदाताओं के सामने दो से अधिक विकल्प होने के कारण इस बार लीक से हट कर मतदान हो सकता है. सत्ताधारी डीएमके ने कांग्रेस सहित आठ दलों के साथ गठबंधन करके सत्ता में बने रहने मजबूत दांव चला है, जबकि मुख्य विपक्षी दल AIADMK अंदरूनी संकटों से जूझ रहा है. ऐसे में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की सक्रियता ने तमिलनाडु की द्विध्रुवीय राजनीति अब त्रिकोणीय मुकाबले पर लाकर खड़ा कर दिया है. 

तमिलनाडु की राजनीति में विजय की एंट्री 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़ा गेम चेंजर मानी जा रही है. विजय की सियासत ने युवाओं का वोटिंग पैटर्न बदल सकता है. ऐसे में विजय की राजनीति मुख्य रूप से स्थापित द्रविड़ दलों (DMK और AIADMK) दोनों के लिए चुनौती बन गई है. यही वजह है कि बीजेपी ने विजय की पार्टी के साथ गठबंधन करने के बेताब है और डिप्टीसीएम से लेकर 80 सीट देने का ऑफर दिया है.  

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तमिलनाडु का सियासी गणित क्या है? 
तमिलनाडु में पिछले छह दशकों से कांग्रेस या बीजेपी सत्ता में नहीं आ सकी. यहां की राजनीति पूरी तरह से डीएमके और AIADMK के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है. 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में 234 सीटों में से डीएमके गठबंधन को 159 सीटों पर जीत मिली थी, जिसमें डीएमके 133 सीटें, कांग्रेस 18 सीटें पाई थी. इसके अलावा बाकी सहयोगी दलों की मिली थी. AIADMK महज 66 सीटें जीत पाई थी. AIADMK के साथ गठबंधन करने के बाद बीजेपी चार सीटें पाई थी.

2026 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने डीएमके साथ गठबंधन बनाए रखा तो बीजेपी ने AIADMK के साथ नाता जोड़ रखा है. इसके अलावा सुपरस्टार थलपति विजय की पार्टी TVK भी चुनावी मैदान में है, जिससे मुकाबला रोचक बन गया है. स्टालिन के लिए अपनी सरकार को बनाए रखने की अग्निपरीक्षा है तो AIADMK भी अपनी वापसी के लिए बेताब. तमिल एक्टर थलपति विजय ने अपनी पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम बनाकर डीएमके बनाम AIADMK की लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है.

तमिलनाडु में विजय तुरुप का इक्का होंगे?
विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की सक्रियता ने तमिलनाडु के चुनावी समीकरणों को काफी रोचक बना दिया है. विजय के चलते तमिलनाडु की द्विध्रुवीय राजनीति अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदलती नजर आ रही है. विजय अपने भारी-भरकम प्रशंसक आधार के आधार पर राजनीतिक समीकरण को बदलने की कोशिश कर रहे हैं. युवाओं और महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता उन्हें एक नई राजनीतिक ताकत दे रही है. 

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हालांकि, विजय की जमीनी स्तर पर कितनी पकड़ है, उसे चुनाव के बाद ही समझा जा सकेगा. लेकिन, उनकी लोकप्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. सोशल मीडिया, शहरी युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ बना ली है. हाल में उन्हें कुछ निजी विवादों और संगठनात्मक चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा है. 

तमिलनाडु में उनकी पार्टी राज्य के सियासी माहौल को नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है. इस बार के चुनाव में विजय की लोकप्रियता और युवा वोटरों की वजह से द्रविड़ राजनीति कुछ लचीली हुई है. राज्य के मतदाताओं के सामने दो से अधिक विकल्प होने के कारण इस बार लीक से हट कर मतदान हो सकता है.

विजय की एंट्री किसे नफा और किसे नुकसान
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच रही है, लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है. विजय की पार्टी नई ताकत बनने की कवायद में है. DMK मजबूत संगठन के साथ है, जबकि AIADMK आंतरिक विवाद से जूझ रही है. ऐसे में विजय की पार्टी वोटों के बंटवारे में असर डाल सकती है, लेकिन सियासी तौर पर उनकी पार्टी किसे नफा और किसे नुकसान पहुंचाएगी? 

राजनीतिक विश्वलेषकों की माने तो इस बार तमिल के लोग  डीएमके के मौजूदा शासन और AIADMK की पुरानी राजनीति से निराश माने जा रहा हैं, उनके सामने थलपित विजय एक तीसरा विकल्प बनकर उभरे हैं. विजय के समर्थक मुख्य रूप से AIADMK के वोट बैंक (युवा और अनाद्रमुक के पारंपरिक वोटर)में सेंध लगा सकते हैं. AIADMK की 2021 की सत्ता से बाहर होने के बाद से चुनौती से जूझ रही है, ऐसे में विजय उनके लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है. 

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हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक चुनावी नतीजों को लेकर बंटे हुए हैं. एक वर्ग का मानना ​​है कि विजय डीएमके विरोधी वोटों को अपनी ओर खींच सकते हैं और इस प्रक्रिया में एआईएडीएमके के पारंपरिक आधार में सेंध लगा सकते हैं, जिससे सत्ता विरोधी वोट बंट जाएंगे और अप्रत्यक्ष रूप से सत्ताधारी डीएमके को फायदा होगा. वहीं, दूसरा तबका यह बताता है कि अभिनेता सीमान की 'नाम तमिलर कत्ची'(एनटीके), जिसे युवाओं में काफी समर्थन प्राप्त है,विजय की टीवीके के हाथों अपने आधार का एक बड़ा हिस्सा खो सकती है.

अल्पसंख्यक वोटों को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं. विजय ईसाई होने के नाते अल्पसंख्यकों के उन वर्गों को आकर्षित कर सकते हैं जो पारंपरिक रूप से डीएमके का समर्थन करते हैं. हालांकि, सत्ताधारी पार्टी की मजबूत स्थिति और विजय की राजनीतिक साख अभी परखी न जाने के कारण, ऐसे में  कई लोगों का मानना ​​है कि बड़े पैमाने पर बदलाव होने की संभावना नहीं है. विजय ने बार-बार कहा है कि 2026 के चुनाव डीएमके और टीवीके के बीच 'सीधी टक्कर' होगी, लेकिन इसके बावजूद वे संभावित सहयोगियों में विश्वास जगाने में सफल नहीं हो पाए हैं.

AIADMK और DMK में किसके लिए बड़ा खतरा?
IADMK लगातार राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रही है. पार्टी के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व को लेकर पार्टी के अंदरखाने में असंतोष है. पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम का DMK के साथ जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. इसके अलावा दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी सहयोगी वी के शशिकला ने नई पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. यही वजह है कि AIADMK के वोटों में बिखराव हो सकता है और उसका सीधा फायदा विजय की पार्टी को हो सकती है. 

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वहीं, चुनाव से पहले DMK ने अपने गठबंधन को मजबूत करते हुए कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को मूर्त रूप दिया. समझौते के तहत कांग्रेस 28 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और राज्यसभा की भी एक सीट भी डीएमके ने दे दी है. इसके अलावा एमके स्टालिन ने DMDK को भी अपने साथ मिला लिया है. DMDK का यह कदम विपक्षी खेमे के लिए झटका माना जा रहा है. यह पार्टी इससे पहले कई बार विपक्षी गठबंधनों के साथ रही ही, लेकिन अब स्टालिन के साथ है. ऐसे में स्टालिन ने खुद को मजबूत गठबंधन के रूप में बना रखा है. 

विजय की सियासी एंट्री से AIADMK को पारंपरिक वोट बैंक खोने का सबसे ज्यादा डर है, जबकि DMK पर उनके द्वारा भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने से दबाव बढ़ा है. विजय की राजनीति का लाभ या नुकसान सीमान की 'नाम तमिलर काची' (NTK) को भी हो सकता है. विजय विरोधी वोटों को सफलतापूर्वक अपनी ओर खींचते हैं, तो यह सीधे तौर पर डीएमके के लिए फायदेमंद हो सकता है. हालांकि, विजय खुद को DMK का मुख्य विरोधी बता रहे हैं और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे हैं, जो सत्ताधारी दल के लिए टेंशन का सबब बनी हुई है.

विजय से गठबंधन के लिए बेताब बीजेपी
विजय ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिससे AIADMK-BJP गठबंधन की संभावनाएं कमजोर हो सकती हैं. इसीलिए बीजेपी ने विजय  के साथ गठबंधन करना चाहती है, जिसमें डिप्टीसीएम और 80 सीट देने का ऑफर दे दिया है. इसके बाद भी विजय रजामंद नहीं है, उनका बड़ा फैन बेस है. 

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बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर विजय के समर्थन का छोटा हिस्सा भी चुनाव में ट्रांसफर होता है तो विधानसभा सीटों के चुनाव नतीजों पर इसका असर दिखाई दे सकता है. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अक्सर उम्मीदवार कम वोटों के अंतर से जीत हासिल करते हैं. ऐसे में अगर दो फीसदी वोट भी इधर-उधर हो जाएं तो नतीजों पर इसका असर जरूर पड़ सकता है. इसीलिए बीजेपी हरहाल में  विजय के साथ हाथ मिलाना चाहती है. 

तमिलनाडु में क्या गेम करेंगे विजय?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सभी की निगाहें विजय पर टिकी हुई हैं.  विजय के खेमे के लोग बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर ज्यादा खुश नहीं हैं. सूत्रों के अनुसार, उनके कुछ सलाहकारों को डर है कि अगर TVK जैसी छोटी पार्टी इतनी जल्दी एनडीए जैसे बड़े गठबंधन में शामिल हो जाती है, तो उसकी स्वतंत्र पहचान प्रभावित हो सकती है. 

विजय ने जब पार्टी का ऐलान किया था, तब साफ किया था कि वह गठबंधन नहीं करेंगे. उन्होंने खुद को जनता के सामने एक स्वतंत्र विकल्प के रूप में पेश किया था. ऐसे में शुरुआती दौर में गठबंधन से जुड़ना उनकी उस छवि को प्रभावित कर सकता है. इसीलिए बीजेपी के ऑफर पर अभी तक उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया है, लेकिन अब देखना है कि विजय तमिलनाडु में क्या सियासी गेम करते हैं?

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