कल सुबह 7 बजे हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर शुरुआत करेंगे. ये शब्द थे बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के, जब वह पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक एक रात पहले मां काली का आशीर्वाद लेकर कोलकाता के मशहूर कालीघाट मंदिर से बाहर निकल रहे थे. सुवेंदु अधिकारी के हाथ में एक कमल का फूल था और माथे पर तिलक. मैंने तभी उनसे पूछा कि कल भवानीपुर में वोटिंग है, वह अपने दिन की शुरुआत कहां से करेंगे ताकि सुबह-सुबह उनका एक इंटरव्यू मिल जाए. सुवेंदु ने बड़ी सहजता से बताया कि वह हनुमान जी का आशीर्वाद लेकर अपने दिन की शुरुआत करेंगे.
अगले दिन लगभग 6 बजे के आसपास मैं भवानीपुर के लिए होटल से निकल गया. 29 अप्रैल को जब पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण की वोटिंग चल रही थी, तो सुबह लगभग 8 बजे के आसपास सुवेंदु अधिकारी हनुमान मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना करने के बाद अपने दिन की शुरुआत की.
भवानीपुर में कई छोटे-छोटे हनुमान मंदिर हैं, लेकिन एक सबसे बड़ा मंदिर है जहां सुवेंदु अधिकारी चुनाव प्रचार के दौरान भी कई बार आए थे. मैं लगभग 6:45 पर उसी हनुमान मंदिर पर पहुंच गया और हनुमान जी के दर्शन करने के बाद एक कप चाय के साथ सुवेंदु अधिकारी का इंतजार करने लगा, ताकि जैसे ही वह आएं, उनका इंटरव्यू मिल जाए.
लगभग एक घंटा इंतजार करने के बाद अचानक मुझे ऑफिस का कॉल आया - 'पियूष, तुम कहां हो? सुवेंदु अधिकारी हनुमान मंदिर पहुंच गए हैं और दूसरे पत्रकारों को इंटरव्यू दे रहे हैं.' मैंने कहा कि मैं भी तो हनुमान मंदिर पर ही हूं, वह तो यहां नहीं आए. तभी मुझे पता चला कि सुवेंदु अधिकारी एक दूसरे मंदिर में पूजा-अर्चना करने गए हैं, जो भवानीपुर के बीजेपी ऑफिस के पास था.
तुरंत मैं और मेरे सहयोगी उस मंदिर की तरफ भागे. जैसे ही हम दो गलियां पहले पहुंचे, तो कोलकाता पुलिस की बैरिकेडिंग की वजह से रास्ता डायवर्ट हो गया. मैंने तुरंत एक पुलिसकर्मी से पूछा कि क्या सुवेंदु वहां पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि हां, दो गलियां पार करने के बाद एक मंदिर है, वहीं गए हैं, लेकिन वहां आप गाड़ी से नहीं जा पाएंगे, आपको पैदल ही जाना होगा.
मैं अपने कैमरा सहयोगी के साथ तुरंत भागना शुरू कर दिया ताकि जल्दी पहुंच जाऊं और एक इंटरव्यू मिल जाए. मेरे मंदिर तक पहुंचने से ठीक एक मिनट पहले सुवेंदु अधिकारी वहां से निकल गए. मंदिर जाकर पता चला कि वह बीजेपी ऑफिस गए हैं. इसके तुरंत बाद मैं बीजेपी ऑफिस के लिए रवाना हो गया.
वहां पहुंचते ही पता चला कि सुवेंदु अधिकारी भवानीपुर में चल रही वोटिंग को लेकर स्थानीय बीजेपी नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं.
लगभग 9 बजे के आसपास सुवेंदु अधिकारी बीजेपी ऑफिस से निकले. कान पर फोन लगाए, किसी से बात करते हुए वह तेजी से चले आ रहे थे. उनके सुरक्षाकर्मियों ने सभी मीडियाकर्मियों को धक्का देकर रास्ता बनाना शुरू कर दिया. सुवेंदु बिना किसी को इंटरव्यू दिए गाड़ी में बैठे और तेजी से निकल गए.
आगे-आगे सुवेंदु अधिकारी और पीछे-पीछे लंबा काफिला, जिसमें ज्यादातर गाड़ियां मीडिया की थीं. सभी गाड़ियाँ इतनी तेज चल रही थीं कि कब किसकी टक्कर किससे हो जाए, कोई अंदाजा नहीं.
लगभग 10 मिनट के बाद सुवेंदु अधिकारी एक पोलिंग बूथ पहुंचे. भयंकर भीड़ के बीच वह बूथ के अंदर दाखिल हुए. हल्की बारिश हो रही थी और बाहर लंबी कतार में भारी संख्या में मतदाता खड़े थे.
कुछ देर बाद बाहर निकलकर उन्होंने कहा कि वोटिंग थोड़ी धीमी चल रही है और चुनाव आयोग से प्रक्रिया तेज करने की अपील की. जब मैंने पूछा कि भवानीपुर से कौन जीतेगा, तो उन्होंने कहा कि पूरे बंगाल में बीजेपी की लहर है और इस बार हार-जीत से ज्यादा हिंदुओं को बचाने का सवाल है.
इसके बाद वह तुरंत अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गए. भारी सुरक्षा के बीच उनका काफिला तेजी से आगे बढ़ा.
इसके बाद वह लगातार भवानीपुर के अलग-अलग बूथों पर जाकर स्थिति का जायजा लेने लगे. तभी अचानक काफिला रुका और यू-टर्न लेने लगा. साफ था कि कहीं से कोई अहम सूचना आई है.
कुछ देर बाद वह अम्रपाली मीरा बिल्डिंग के सामने पहुंचे, जहां ममता बनर्जी भी मौजूद थीं. माहौल गर्म हो गया. बीजेपी समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. किसी तरह भीड़ के बीच उनसे बात करने पर उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी हिंदू वोटर्स को डराने की कोशिश कर रही हैं.
करीब 45-50 मिनट बाद वह वहां से निकले और कहा कि अब हिंदुओं को कोई नहीं डरा सकता.
इसके बाद वह एक ऐसे बूथ पहुंचे जहां ममता बनर्जी वोट डालने आने वाली थीं. 'जय बंगला' और 'जय श्री राम' के नारे लगे और माहौल तनावपूर्ण हो गया. स्थिति को संभालने के लिए सीआरपीएफ जवानों ने हल्का लाठीचार्ज किया और हालात सामान्य किए.
फिर वह बीजेपी ऑफिस लौटे और एक इमरजेंसी मीटिंग की. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि वह लगातार गृहमंत्री अमित शाह के संपर्क में हैं.
इसी दौरान रास्ते में एक टीएमसी बूथ पर वह रुके और वहाँ मौजूद महिला कार्यकर्ताओं के साथ सहज बातचीत की. उनके पास रखी कोल्ड ड्रिंक पीते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के मामले में राजनीति नहीं होती - “मेरे लिए महिलाएँ माँ या बहन हैं.”
शाम होते-होते माहौल थोड़ा शांत हुआ, लेकिन दिन खत्म नहीं हुआ था.
एक और जगह पैदल मार्च के दौरान स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई. मुस्लिम बहुल इलाके में भारी भीड़ के बीच “जय बंगला” के नारे लगने लगे. सुरक्षा बल तुरंत अलर्ट हो गए. सीआरपीएफ जवानों ने हेलमेट पहन लिए और लाठी तैयार कर ली.
स्थिति बिगड़ती देख सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत गाड़ी मंगवाई और सुवेंदु अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाला. भीड़ ने गाड़ी को रोकने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने घेरा बनाकर उन्हें सुरक्षित निकाल लिया.
करीब आधे घंटे बाद हालात काबू में आए.
शाम 6 बजे वोटिंग खत्म होने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और दावा किया कि बीजेपी भारी बहुमत से सरकार बनाएगी और “अब समय आ गया है कि दीदी आराम करें.”
इस पूरे दिन की भागदौड़ के बाद आखिरकार रात में बैठकर खाना खाया - जो शायद दिन का पहला निवाला था.
यह सिर्फ एक रिपोर्टिंग डे नहीं था - यह बंगाल की राजनीति, तनाव, भीड़ और लोकतंत्र की जमीनी तस्वीर को बेहद करीब से देखने का अनुभव था.
पीयूष मिश्रा