पश्चिम बंगाल में चल रही SIR की प्रक्रिया को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर अहम सुनवाई होनी है. ममता बनर्जी खुद कोर्ट में पेश नहीं होंगी, लेकिन उनके वकील राज्य सरकार का पक्ष रखेंगे. इस सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग (ECI) को एक विस्तृत नोट सौंपा है.
राज्य सरकार ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए हैं और अपनी मांगें अदालत के सामने रखी हैं. सरकार का कहना है कि चुनाव से जुड़े आधिकारिक निर्देशों के लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल बंद होना चाहिए.
सरकार के मुताबिक SIR से जुड़े सभी निर्देश आधिकारिक लेटरहेड, मेमो नंबर और तारीख के साथ होने चाहिए और उन्हें पारदर्शिता के लिए वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए.
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माइक्रो ऑब्जर्वर्स को हटाने की मांग
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से माइक्रो ऑब्जर्वर्स (Micro Observers) को प्रक्रिया से हटाए जाने की भी मांग की है. सरकार का कहना है कि जहां माइक्रो ऑब्जर्वर्स और चुनाव अधिकारियों (ERO/AERO) के बीच असहमति हुई है, वहां माइक्रो ऑब्जर्वर्स के फैसले रद्द होने चाहिए और आखिरी फैसले का अधिकार राज्य के चुनाव अधिकारियों के पास ही रहना चाहिए.
सरकार ने 8,505 ग्रुप-बी (Group B) अधिकारियों की सूची चुनाव आयोग को सौंपी है, जिन्हें माइक्रो ऑब्जर्वर्स की जगह काम में लगाया जा सकता है. सरकार की तरफ से ये भी कहा गया है कि सिर्फ नाम मैच ना होने के आधार पर मतदाता सूची से नाम नहीं काटे जाने चाहिए.
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सरकारी आवास आवंटन पत्रों को मान्यता देने की अपील
पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है कि SIR में सरकारी आवास आवंटन पत्रों (House allotment sanction letters) को पहचान के लिए स्वीकार किया जाए. क्योंकि ये एक ठोस दस्तावेजी सबूत है. सरकार ने तर्क दिया कि जब बिहार में इसे माना जा सकता है, तो बंगाल में क्यों नहीं?
संजय शर्मा