पश्चिम बंगाल में बढ़ सकती है SIR डेडलाइन, चुनाव आयोग ने दिया हिंट

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची निरीक्षण (SIR) की समय-सीमा आगे बढ़ सकती है. चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को देखते हुए अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की 14 फरवरी की तय तारीख पर पुनर्विचार कर रहा है. आयोग का कहना है कि समीक्षा के बाद ही तय होगा कि मौजूदा समय-सीमा बरकरार रहेगी या बदली जाएगी.

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बंगाल की फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को आनी है (फाइल फोटो) बंगाल की फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को आनी है (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:53 PM IST

चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची निरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है, और अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी की निर्धारित तिथि से आगे स्थगित होने की संभावना है, चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने से मौजूदा समयसीमा का पालन करना मुश्किल हो सकता है, और उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

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चुनाव आयोग (ईसी) ने पहले सुनवाई की आखिरी डेट 7 फरवरी और प्रारंभिक विस्तार दिए जाने के बाद अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तिथि 14 फरवरी घोषित की थी.

तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. इसके बाद समय-सीमा जांच के दायरे में आ गई.

याचिका पर कार्रवाई करते हुए, भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कई निर्देश जारी किए, जिनमें तार्किक विसंगतियों के कारण सुनवाई के लिए बुलाए गए मतदाताओं की सूचियों का प्रकाशन और वार्ड और पंचायत स्तर पर उन सूचियों का प्रदर्शन शामिल है.

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने के बाद पावती रसीदें दी जानी चाहिए.

दिशा-निर्देश जारी करते हुए पीठ ने टिप्पणी की, 'पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और जमीनी स्तर पर इसकी पुष्टि की जा सकती है.'

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मतदाता सूची का मसौदा 16 दिसंबर को प्रकाशित किया गया था, और आपत्तियों और दावों को दर्ज करने की समय सीमा 15 जनवरी तक खुली थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 19 जनवरी कर दिया गया. सुनवाई फिलहाल 7 फरवरी तक जारी रहने वाली है.

अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की प्रगति की समीक्षा के बाद ही यह निर्णय लिया जाएगा कि 14 फरवरी की समय सीमा को बरकरार रखा जाएगा या उसमें संशोधन किया जाएगा.

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