Beat Report: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, SIR ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाने वाले बंगाल चुनाव में डाल पाएंगे वोट

पश्चिम बंगाल SIR विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर बड़ा संवैधानिक हस्तक्षेप किया है. कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से क्लियर मतदाताओं को वोटिंग का अधिकार देने के लिए निर्वाचन आयोग से सप्लीमेंट्री वोटिंग लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया है.

Advertisement
एसआईआर ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाने वाले लोग बंगाल चुनाव में वोट डालने के लिए पात्र होंगे. (Photo: ITG) एसआईआर ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट पाने वाले लोग बंगाल चुनाव में वोट डालने के लिए पात्र होंगे. (Photo: ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:02 PM IST

पश्चिम बंगाल SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से क्लियर हुई अपीलों वाले वोटरों के नाम पूरक मतदाता सूची में शामिल करने का निर्देश दिया है. सीजेआई की अगुआई वाली पीठ ने यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त विशिष्ट अधिकारों का प्रयोग करते हुए दिया है. कोर्ट को इस ब्रह्मास्त्र इसलिए इस्तेमाल करना पड़ा क्योंकि उसके सामने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का अभेद्य कवच था. उसे तोड़ने के लिए 142 नंबर का ब्रह्मास्त्र ही सबसे उचित था.

Advertisement

क्योंकि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के मुताबिक निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन की अंतिम तिथि के बाद निर्वाचन आयोग मतदाता सूची में किसी भी किस्म का कोई बदलाव, फेरबदल या सुधार नहीं कर सकता. उसके निदान के लिए ही सुप्रीम कोर्ट ने इस परम शक्ति का प्रयोग किया. कोर्ट ने सोमवार को आदेश पारित करने के तीन दिन बाद गुरुवार को विस्तृत आदेश वेबसाइट पर अपलोड किया.

कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजे पत्र के मुताबिक 13 अप्रैल तक 34 लाख अपील लंबित हैं. 19 अपीलेट ट्रिब्यूनल के जरिए उन्हें तेजी से निपटाया जा रहा है. ट्रिब्यूनल किस प्रक्रिया के आधार पर इन अपीलों पर सुनवाई और निर्णय करेगा, इसकी SOP पैनल के तीन वरिष्ठ जजों की समिति ने सभी पहलुओं और समुचित कानूनी और व्यावहारिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए तैयार की है.

Advertisement

आंकड़ों के मुताबिक 27 लाख नाम हटाए जाने के बाद अपीलें दाखिल हुईं. तो सवाल उठा कि फिर अपीलों का आंकड़ा 34 लाख कैसे पहुंचा? आयोग में उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक जिन लोगों के नाम फाइनल सूची में शामिल हो गए हैं उनको अयोग्य बताते हुए नागरिकों ने उनके नाम काटने की अपीलें भी बड़ी तादाद में दाखिल की हैं. अनगिनत जगह सिर्फ कुछ परिवार नहीं बल्कि मोहल्लों, गलियों और इलाकों में रहने वालों की नागरिकता पर सवाल उठाते हुए अपीलें दाखिल की गई हैं. जाहिर है एक ही मुद्दे पर दावे और आपत्तियों का पूरे ध्यान और मनोयोग से गहन विश्लेषण ट्रिब्यूनल को करना होगा.

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश में निर्वाचन आयोग के लिए निर्देश है कि 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण और 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से दो दिन पहले यानी प्रचार बंद होने के साथ ही पूरक मतदाता सूची प्रकाशित करनी होगी. पहले चरण में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए 21 अप्रैल और 29 अप्रैल को दूसरे चरण में होने वाले मतदान के लिए 27 अप्रैल तक योग्य मतदाता के तौर पर क्लियर होने वाले वोटरों को वोट डालने का अधिकार मिल जाएगा. यानी सभी 19 ट्रिब्यूनल से संबंधित समय सीमा में क्लियर हो चुके नामों को जानकारी लेकर सभी नाम पूरक सूची में प्रकाशित कर सम्बंधित चुनाव क्षेत्र और बूथों तक पहुंचाने होंगे.

Advertisement

आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस बड़ी चुनौती को भी हम आसानी से निभाएंगे. उसके लिए प्रशासनिक अमले को पूरी तरह तैयार रहने को कह दिया गया है. ताकि सुनियोजित ढंग से इसे अंजाम दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता तृणमूल कांग्रेस के वकील और लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने दलील दी थी कि जिन लोगों की अपील लंबित है उनको वोटिंग का अधिकार दिया जाए। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा भी था कि ऐसा नहीं हो सकता. क्योंकि लंबित मामलों में ट्रिब्यूनल का निर्णय क्या आएगा ये निश्चित नहीं है. 

इस पर बनर्जी ने कहा था कि फिर जिन लोगों की अपील पर मतदान से पहले ट्रिब्यूनल ने क्लियरेंस दे दिया है उनको तो वोट डालने दिया जाए. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम विचार करेंगे. कोर्ट ने विचार किया और इस पर आदेश व निर्देश जारी कर दिया. यानी ट्रिब्यूनल ने जिन अपीलों को ग्रीन सिग्नल दे दिया वो तो इस चुनाव में वोट डाल पाएंगे. लेकिन जो अपील खारिज हो जाएंगी वो रेड जोन में चले जाएंगे और वोटिंग के अधिकार से वंचित रह जाएंगे.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement