‘कांग्रेस ने अंबेडकर को भी सम्मान नहीं दिया’, कांशीराम पर राहुल के बयान पर मायावती का तीखा पलटवार

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम की जयंती को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है. लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग करते हुए कांग्रेस की पुरानी गलतियों का जिक्र किया. इसके बाद बसपा प्रमुख मायावती ने तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस पर दलित विरोधी राजनीति का आरोप लगाया. दोनों नेताओं के बयान से साफ है कि 2027 चुनाव से पहले दलित वोट की सियासत तेज हो रही है.

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राहुल गांधी पर बरसीं बसपा सुप्रीमो मायावती (File Photo: PTI) राहुल गांधी पर बरसीं बसपा सुप्रीमो मायावती (File Photo: PTI)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:03 PM IST

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित राजनीति एक बार फिर केंद्र में आती दिख रही है. बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती से ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान और उस पर बसपा सुप्रीमो मायावती के पलटवार ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है. इस पूरे मामले के केंद्र में कांशीराम और दलित वोट बैंक की सियासत है.

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दरअसल, लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांशीराम की जयंती की पूर्व संध्या पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, खासतौर पर दलित कार्यकर्ताओं को संबोधित किया. इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी ने अपने समय में दलितों के लिए ठीक से काम किया होता तो कांशीराम जैसे नेता पैदा ही नहीं होते. उन्होंने यह भी कहा कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू उस दौर में होते तो संभवतः कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते.

राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की

राहुल गांधी के इन बयानों को राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर दलित राजनीति और खासकर जाटव वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने पुराने दलित आधार को फिर से मजबूत करना चाहती है. इसी कार्यक्रम में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग को पूरा किया जाएगा.

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राहुल गांधी के इस बयान के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए कांग्रेस की नीयत पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दलित विरोधी सोच के कारण ही बहुजन समाज पार्टी का गठन करना पड़ा.

मायावती ने कांग्रेस-राहुल गांधी पर बोला तीखा हमला

मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी दलितों के मसीहा और संविधान के शिल्पकार बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वो हकदार थे. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद अंबेडकर को भारत रत्न देने में भी देरी की.

बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि कांशीराम के निधन के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन उस वक्त एक दिन का राष्ट्रीय शोक तक घोषित नहीं किया गया. ऐसे में अब कांग्रेस द्वारा कांशीराम को भारत रत्न देने की बात करना राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित कदम लगता है.

मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को भी सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि अन्य राजनीतिक दल, खासकर कांग्रेस, कांशीराम के नाम का इस्तेमाल कर बसपा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के लोगों को ऐसी राजनीति से सतर्क रहना चाहिए.

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बहरहाल सिर्फ कांग्रेस ही नहीं अखिलेश यादव लगातार काशीराम को अपना बनाने पर तुले हैं, अखिलेश यादव तो मुलायम और कांशीराम कोई एक साथ लेकर चल रहे हैं और कांशीराम के जन्म जयंती पर बाकायदा कार्यक्रम कर रहे है.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है. कांशीराम और अंबेडकर जैसे प्रतीकों के जरिए दलित समाज को साधने की कोशिशें आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है.
 

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