पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के लिए हो रहे चुनाव में भिड़ रहे 294 उम्मीदवारों में 23 फीसदी यानी 66 उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स और पुडुचेरी इलेक्शन वॉच ने उम्मीदवारों के नामांकन के साथ दाखिल हलफनामों का अध्ययन कर कई चौंकाने वाली और रोचक जानकारी शेयर की है.
नामांकन भरने वाले 294 में से 291 प्रत्याशियों के हलफनामे की जांच के दौरान पाया गया कि राष्ट्रीय पार्टियों के 34, राज्य स्तरीय क्षेत्रीय पार्टियों के 63, रजिस्टर्ड लेकिन गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों के 80 और सबसे ज्यादा 117 इंडिपेंडेंट उम्मीदवार हैं. आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 66 उम्मीदवारों में से 38 यानी 13 फीसदी गंभीर श्रेणी के अपराधों के आरोपी हैं.
जबकि 2021 में हुए पिछले चुनाव में 323 में से 54 यानी 17 फीसदी उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि के थे. कांग्रेस के 21 में से तीन, ऑल इंडिया NR कांग्रेस के 16 में से चार, डीएमके के 12 में से 6 और बीजेपी के 10 में से पांच उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं. इन्होंने अपने हलफनामे में खुद की सारा ब्यौरा दिया है. कांग्रेस के दो, INR कांग्रेस के तीन और डीएमके के पांच प्रत्याशी गंभीर अपराधों के आरोपी हैं.
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बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में इस बार पूर्ण राज्य और बेरोजगारी सबसे अहम मुद्दों के रूप में उभरकर सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि राज्य में शिक्षा के पर्याप्त संस्थान होने के बावजूद, डिग्री हासिल करने के बाद भी युवाओं को अपेक्षित रोजगार नहीं मिल पा रहा है, जिससे निराशा बढ़ रही है. डीएमके विधायक सेंथिल कुमार का कहना है कि, आज के युवा 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की सैलरी वाली नौकरियां चाहते हैं, लेकिन यहां सीमित और छोटे स्तर के रोजगार ही उपलब्ध हैं.
कांग्रेस ने भी अपने मेनिफेस्टो में नौकरी का पूरा रोडमैप देने का दावा किया है. बता दें कि पुडुचेरी की सभी विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान 9 अप्रैल 2026 को किया जाएगा, जबकि चुनाव के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे.
संजय शर्मा